Ravivar Vrat Katha: कष्टों के निवारण के लिए रविवार को रखें सूर्य देव का व्रत, पढ़ें यह पौराणिक कथा 

Ravivar Vrat Katha: हिंदू धार्मिक शास्त्रों के अनुसार रविवार के दिन सूर्य देव का व्रत रखने से तथा पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। सूर्य देव की पूजा के लिए यहां पढ़ें व्रत कथा।

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रविवार व्रत कथा (Pic: iStock) 
मुख्य बातें
  • मनोकामना पूर्ति के लिए रविवार के दिन रखें व्रत।
  • रविवार के दिन करें सूर्य देव की उपासना।
  • सूर्य देव की पूजा के बाद, करें पौराणिक कथा का पाठ।

Ravivar Vrat Katha Hindi Mein: हिंदू धर्म में सूर्य देव प्रमुख देवताओं में से एक माने गए हैं। वैदिक काल से लोग सूर्य भगवान की पूजा करते आए हैं। मान्यताओं के अनुसार, सूर्य देव की पूजा करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। सूर्य भगवान एक ऐसे देवता हैं जिनके दर्शन हम साक्षात हर दिन करते हैं। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, रविवार के दिन सूर्य देव की पूजा-उपासना की जाती है। रविवार के दिन सूर्य देव की पूजा-उपासना करने से कष्टों का नाश होता है तथा जीवन में सुख-समृद्धि और धन-संपत्ति बनी रहती है। सूर्य देव की सच्चे मन से पूजा करने से दुश्मनों से रक्षा भी मिलती है। सूर्य देव की पूजा के बाद कथा का पाठ अवश्य करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि रविवार के दिन कथा का पाठ करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

रविवार की व्रत कथा 

बहुत पहले एक बुढ़िया रहा करती थी जो हर रविवार को स्नान करने के बाद अपने घर को गोबर से लीप कर भगवान सूर्य का भोजन बनाती थी। उनकी पूजा करने के बाद उन्हें भोख लगाती थी फिर अपना भोजन ग्रहण करती थी। हर रविवार सूर्य देव की पूजा करने के बाद उसका घर धन-धान्य से भर गया था। बुढ़िया की पड़ोसन यह सब देख कर सोचने लगी कि गुड़िया उसकी गाय का गोबर ले जाती है। जिसके बाद उसने अपनी गाय को अंदर बांधना शुरू कर दिया। अगले रविवार को जब बुढ़िया को गोबर नहीं मिला तब ना ही वह अपने घर को गोबर से लीप पाई और ना ही भगवान के लिए भोग तैयार कर पाई। जिसकी वजह से बुढ़िया ने भी दिनभर कुछ नहीं खाया और इस तरह वह निराहार व्रत रही। ‌

सपने में आए भगवान

रात में जब बुढ़िया सोने लगी तब उसके सपने में भगवान आए। सपने में आकर भगवान ने उससे पूछा कि आज उसने घर को गोबर से क्यों नहीं लीपा और उनके लिए भोग क्यों नहीं तैयार किया। तब बुढ़िया ने भगवान को इसका कारण बताया, जिसके बाद सूर्य देव ने बुढ़िया को एक ऐसी गाय दी जो उसकी हर एक मनोकामना को पूरी करेगी। अगली सुबह जब बुढ़िया नींद से उठी तब उसने अपने घर के बाहर एक सुंदर गाय और उसके बछड़े को अपने आंगन में खड़ा देखा। गाय और उसके बछड़े को देखकर बुढ़िया काफी खुश हुई और उसने अपने आंगन में उन दोनों को बांध दिया और चारा खिलाने लगी। 

पड़ोसन को आया गुस्सा

बुढ़िया के घर के बाहर गाय और उसके बच्चे को खड़ा देखकर पड़ोसन को बहुत गुस्सा आया। अगली सुबह पड़ोसन ने देखा की बुढ़िया की गाय ने सोने का गोबर दिया है। बुढ़िया को इस बात का पता ना चले इस वजह से वह रोज सोने का गोबर चुराती रही और अपने घर को लिपटी रही। जब सूर्य देव ने बुढ़िया की पड़ोसन को ऐसा करते देखा तब उन्होंने शाम के समय एक जोरदार आंधी चलाई। आंधी की वजह से बुढ़िया ने गाय और उसके बछड़े को अपने घर के अंदर बांध दिया। अगली सुबह जब वह उठी तो उसने देखा कि उसकी गाय ने सोने का गोबर दिया है जिसे देखकर वह हैरान रह गई। उस दिन से बुढ़िया रोज अपनी गाय को अपने घर के अंदर बांधने लगी।

राजा के सैनिक ले गए गाय

जब पड़ोसन ने देखा कि बुढ़िया रोज अपनी गाय को अपने घर के अंदर बांधती है तब उसे बहुत गुस्सा आया। उसने यह बात जाकर राजा को बता दी जिसके बाद राजा ने अपने सेवकों को उस गाय को लाने की आज्ञा दी। भगवान को भोग लगाने के बाद बुढ़िया जैसे ही भोजन करने लगी वैसे ही राजा के सेवक आए और उस गाय को खोल कर ले गए। यह देखकर बुढ़िया काफी उदास हो गई। जिस वजह से उसने भोजन नहीं किया और रोती रही। वह भगवान से गाय को वापस मांगने की प्रार्थना रात भर करती रही। ‌जब राजा ने गाय को देखा था वह बहुत खुश हुआ। ‌लेकिन अगली सुबह उसने देखा कि उसका पूरा महल गोबर से भर गया है। 

राजा ने बुढ़िया को दे दी गाय

राजा के सपने में भगवान ने उसे बुढ़िया को गाय वापस लौटाने की बात कही। अगली सुबह उस राजा ने बुढ़िया को गाय वापस लौटा दी साथ में उसे धन भी दिया। जैसे ही राजा ने बुढ़िया को गाय लौटा दी वैसे ही उसके महल से सारा गोबर गायब हो गया। जिसके बाद उसने अपने नगर वासियों से हर रविवार को सूर्य देव की पूजा करने को कहा। हर एक नगरवासी हर रविवार को सूर्य देव की पूजा करता था जिसकी वजह से वह सुखी जीवन व्यतीत कर रहे थे।

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