LIVE

विश्वकर्मा पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र, कथा, आरती सबकुछ यहां जानें

लवीना शर्माUpdated Sep 17, 2023, 15:15 IST
Follow on Google News
विश्वकर्मा पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र, कथा, आरती सबकुछ यहां जानें

विश्वकर्मा पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र, कथा, आरती सबकुछ यहां जानें

विश्वकर्मा पूजा का त्योहार हर साल 17 सितंबर को मनाया जाता है। इस दिन लोग वास्‍तुशास्‍त्र के देवता, संसार के प्रथम इंजीनियर और मशीन के देवता माने जाने वाले भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते हैं। विष्‍णु पुराण में विश्‍वकर्मा जी को ‘देव बढ़ई’ कहा गया है। मान्‍यता है इनकी पूजा करने से व्‍यापार में दिन-दूनी रात चौगुनी वृद्धि होती है। इसलिए विश्वकर्मा पूजा के दिन लोग अपने घर के साथ-साथ दुकानों, फैक्ट्री, दफ्तरों और कार्यालयों में विधि-विधान विश्वकर्मा जी की पूजा करते हैं। भगवान विश्‍वकर्मा के जन्‍मदिन को विश्‍वकर्मा पूजा, विश्‍वकर्मा दिवस या विश्‍वकर्मा जयंती के रूप में मनाया जाता है।

Vishwakarma Puja Samagri List Check Here

विश्वकर्मा पूजा मुहूर्त 2023 (Vishwakarma Puja Muhurat 2023)
विश्वकर्मा पूजा- 17 सितंबर 2023, रविवार
विश्वकर्मा पूजा मुहूर्त- 7:50 AM से 12:26 PM
विश्वकर्मा पूजा कन्या संक्रान्ति का क्षण - 01:43 PM
द्विपुष्कर योग - 10:02 AM से 11:08 AM
सर्वार्थ सिद्धि योग - 06:07 AM से 10:02 AM
अमृत सिद्धि योग - 06:07 AM से 10:02 AM

विश्वकर्मा पूजा विधि 2023 (Vishwakarma Puja Vidhi 2023)
-इस दिन सूर्य निकलने से पहले स्नान आदि करके पवित्र हो जाएं।
-इसके बाद कार्यस्थल में काम आने वाली मशीनों को साफ करें।
-फिर पूजा के लिए बैठे।
-इस दिन पूजा में भगवान विष्णु और भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर शामिल करें।
-इसके बाद दोनों देवताओं को कुमकुम, हल्दी, अक्षत, अबीर, गुलाल व फूल, फल, मेवे, मिठाई इत्यादि अर्पित करें।
-फिर आटे की रंगोली बनाएं और उनके ऊपर सात तरह के अनाज रखें।
-पूजा में जल का एक भरा कलश भी जरूर रखें।
-इसके बाद दोनों देवताओं को धूप दीप दिखाएं।
-अंत में दोनों भगवानों की आरती करें।
-इस दिन भगवान विष्णु, भगवान विश्वकर्मा, के साथ ही उनके वाहन हाथी की भी पूजा किए जाने का विधान है।
-विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर सभी संस्थानों को बंद रखा जाता है और सभी जरूरी चीजों की पूजा की जाती है। जैसे की हथियार, वाहन, इलेक्ट्रॉनिक समान आदि।

Vishwakarma Puja Aarti: विश्वकर्मा भगवान की आरती

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के कर्ता रक्षक श्रुति धर्मा ॥

आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया।
शिल्प शस्त्र का जग में, ज्ञान विकास किया ॥

ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नही पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का,सकल सिद्धि आई॥

रोग ग्रस्त राजा ने, जब आश्रय लीना।
संकट मोचन बनकर,दूर दुख कीना॥

जब रथकार दम्पती, तुमरी टेर करी।
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी॥

एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
द्विभुज, चतुर्भुज, दशभुज, सकल रूप साजे॥

ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।
मन दुविधा मिट जावे, अटल शांति पावे॥

श्री विश्वकर्मा जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत गजानन स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा ।
सकल सृष्टि के करता, रक्षक स्तुति धर्मा ॥

विश्वकर्मा पूजा की विधि, मुहूर्त, मंत्र, कथा, आरती, महत्व संपूर्ण जानकारी जानने के लिए बने रहिए हमारे इस लाइव ब्लॉग पर...

SEPT 17, 2023 13:17 IST

आज का पंचांग (Today Panchang In Hindi)

ब्रह्म मुहूर्त- 04:33 ए एम से 05:20 ए एम
प्रातः सन्ध्या- 04:57 ए एम से 06:07 ए एम
अभिजित मुहूर्त- 11:51 ए एम से 12:40 पी एम
विजय मुहूर्त- 02:18 पी एम से 03:08 पी एम
गोधूलि मुहूर्त- 06:24 पी एम से 06:48 पी एम
सायाह्न सन्ध्या- 06:24 पी एम से 07:35 पी एम
अमृत काल- 05:10 ए एम, सितम्बर 18 से 06:55 ए एम, सितम्बर 18
निशिता मुहूर्त- 11:52 पी एम से 12:39 ए एम, सितम्बर 18
द्विपुष्कर योग- 10:02 ए एम से 11:08 ए एम
सर्वार्थ सिद्धि योग- 06:07 ए एम से 10:02 ए एम
अमृत सिद्धि योग- 06:07 ए एम से 10:02 ए एम
SEPT 17, 2023 12:46 IST

विश्वकर्मा पूजा कब होती है

विश्वकर्मा पूजा हर साल कन्या संक्रांति के दिन मनाई जाती है। मान्यता है इसी दिन भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था।
SEPT 17, 2023 12:25 IST

विश्वकर्मा पूजा विधि (Vishwakarma Puja Vidhi)

विश्वकर्मा पूजा वाले दिन सुबह जल्दी उठकर पूजा में इस्तेमाल किए जाने वाली सभी आवश्यक सामग्रियों को जुटा लें। इसके बाद भगवान विश्वकर्मा की विधि विधान पूजा करें। उन्हें चावल और सफेद फूल अर्पित करें। इसके बाद हवन करें। कार्यस्थल में प्रयोग किए जाने वाली मशीनों की पूजा करें। फिर भगवान विश्वकर्मा को प्रसाद चढ़ाएं और अंत में सभी लोगों में प्रसाद वितरित कर दें।
SEPT 17, 2023 12:08 IST

Vishwakarma Puja Havan Mantra: विश्वकर्मा पूजा हवन मंत्र

ॐ विश्वकर्माय नमः ।
SEPT 17, 2023 11:41 IST

Vishwakarma Puja Mantra: विश्वकर्मा पूजा मंत्र

ॐ आधार शक्तपे नम:, ओम कूमयि नम:, ओम अनन्तम नम:, पृथिव्यै
SEPT 17, 2023 11:11 IST

विश्वकर्मा जी की आरती लिखित में

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के कर्ता रक्षक श्रुति धर्मा ॥

आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया।
शिल्प शस्त्र का जग में, ज्ञान विकास किया ॥

ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नही पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का,सकल सिद्धि आई॥

रोग ग्रस्त राजा ने, जब आश्रय लीना।
संकट मोचन बनकर,दूर दुख कीना॥

जब रथकार दम्पती, तुमरी टेर करी।
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी॥

एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
द्विभुज, चतुर्भुज, दशभुज, सकल रूप साजे॥

ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।
मन दुविधा मिट जावे, अटल शांति पावे॥

श्री विश्वकर्मा जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत गजानन स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा ।
सकल सृष्टि के करता, रक्षक स्तुति धर्मा ॥
SEPT 17, 2023 10:56 IST

Vishwakarma Puja Chalisa: विश्वकर्मा पूजा चालीसा

॥ दोहा ॥
श्री विश्वकर्म प्रभु वन्दऊं,
चरणकमल धरिध्यान ।
श्री, शुभ, बल अरु शिल्पगुण,
दीजै दया निधान ॥

॥ चौपाई ॥
जय श्री विश्वकर्म भगवाना ।
जय विश्वेश्वर कृपा निधाना ॥

शिल्पाचार्य परम उपकारी ।
भुवना-पुत्र नाम छविकारी ॥

अष्टमबसु प्रभास-सुत नागर ।
शिल्पज्ञान जग कियउ उजागर ॥

अद्‍भुत सकल सृष्टि के कर्ता ।
सत्य ज्ञान श्रुति जग हित धर्ता ॥ ४ ॥

अतुल तेज तुम्हतो जग माहीं ।
कोई विश्व मंह जानत नाही ॥

विश्व सृष्टि-कर्ता विश्वेशा ।
अद्‍भुत वरण विराज सुवेशा ॥

एकानन पंचानन राजे ।
द्विभुज चतुर्भुज दशभुज साजे ॥

चक्र सुदर्शन धारण कीन्हे ।
वारि कमण्डल वर कर लीन्हे ॥ ८ ॥

शिल्पशास्त्र अरु शंख अनूपा ।
सोहत सूत्र माप अनुरूपा ॥

धनुष बाण अरु त्रिशूल सोहे ।
नौवें हाथ कमल मन मोहे ॥

दसवां हस्त बरद जग हेतु ।
अति भव सिंधु मांहि वर सेतु ॥

सूरज तेज हरण तुम कियऊ ।
अस्त्र शस्त्र जिससे निरमयऊ ॥ १२ ॥

चक्र शक्ति अरू त्रिशूल एका ।
दण्ड पालकी शस्त्र अनेका ॥

विष्णुहिं चक्र शूल शंकरहीं ।
अजहिं शक्ति दण्ड यमराजहीं ॥

इंद्रहिं वज्र व वरूणहिं पाशा ।
तुम सबकी पूरण की आशा ॥

भांति-भांति के अस्त्र रचाए ।
सतपथ को प्रभु सदा बचाए ॥ १६ ॥

अमृत घट के तुम निर्माता ।
साधु संत भक्तन सुर त्राता ॥

लौह काष्ट ताम्र पाषाणा ।
स्वर्ण शिल्प के परम सजाना ॥

विद्युत अग्नि पवन भू वारी ।
इनसे अद्भुत काज सवारी ॥

खान-पान हित भाजन नाना ।
भवन विभिषत विविध विधाना ॥ २० ॥

विविध व्सत हित यत्रं अपारा ।
विरचेहु तुम समस्त संसारा ॥

द्रव्य सुगंधित सुमन अनेका ।
विविध महा औषधि सविवेका ॥

शंभु विरंचि विष्णु सुरपाला ।
वरुण कुबेर अग्नि यमकाला ॥

तुम्हरे ढिग सब मिलकर गयऊ ।
करि प्रमाण पुनि अस्तुति ठयऊ ॥ २४ ॥

भे आतुर प्रभु लखि सुर-शोका ।
कियउ काज सब भये अशोका ॥

अद्भुत रचे यान मनहारी ।
जल-थल-गगन मांहि-समचारी ॥

शिव अरु विश्वकर्म प्रभु मांही ।
विज्ञान कह अंतर नाही ॥

बरनै कौन स्वरूप तुम्हारा ।
सकल सृष्टि है तव विस्तारा ॥ २८ ॥

रचेत विश्व हित त्रिविध शरीरा ।
तुम बिन हरै कौन भव हारी ॥

मंगल-मूल भगत भय हारी ।
शोक रहित त्रैलोक विहारी ॥

चारो युग परताप तुम्हारा ।
अहै प्रसिद्ध विश्व उजियारा ॥

ऋद्धि सिद्धि के तुम वर दाता ।
वर विज्ञान वेद के ज्ञाता ॥ ३२ ॥

मनु मय त्वष्टा शिल्पी तक्षा ।
सबकी नित करतें हैं रक्षा ॥

पंच पुत्र नित जग हित धर्मा ।
हवै निष्काम करै निज कर्मा ॥

प्रभु तुम सम कृपाल नहिं कोई ।
विपदा हरै जगत मंह जोई ॥

जै जै जै भौवन विश्वकर्मा ।
करहु कृपा गुरुदेव सुधर्मा ॥ ३६ ॥

इक सौ आठ जाप कर जोई ।
छीजै विपत्ति महासुख होई ॥

पढाहि जो विश्वकर्म-चालीसा ।
होय सिद्ध साक्षी गौरीशा ॥

विश्व विश्वकर्मा प्रभु मेरे ।
हो प्रसन्न हम बालक तेरे ॥

मैं हूं सदा उमापति चेरा ।
सदा करो प्रभु मन मंह डेरा ॥ ४० ॥

॥ दोहा ॥
करहु कृपा शंकर सरिस,
विश्वकर्मा शिवरूप ।
श्री शुभदा रचना सहित,
ह्रदय बसहु सूर भूप ॥
SEPT 17, 2023 10:52 IST

विश्वकर्मा पूजा मुहूर्त 2023 (Vishwakarma Puja Muhurat 2023)

विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर 2023 दिन रविवार को की जाएगी। वैसे तो पूजा का मुहूर्त दिन भर रहेगा। लेकिन अगर विश्वकर्मा पूजा के सबसे शुभ मुहूर्त की बात की जाए तो वो सुबह 7 बजकर 50 मिनट से 12 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। विश्वकर्मा पूजा कन्या संक्रान्ति का क्षण दोपहर 01:43 PM का है।
SEPT 17, 2023 10:25 IST

Vishwakarma Puja Significance: विश्वकर्मा पूजा का महत्व


हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विश्वकर्मा भगवान को हर चीज़ का निर्माता माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि संसार में जितनी भी निर्जीव वस्तु हैं सभी का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने ही किया है। चाहे वो औधोगिक चीज़ें हो, फैक्ट्री हो, दुकान हो या कोई वाहन या फिर औजार हों। इसलिए विश्वकर्मा पूजा के दिन भगवान विश्वकर्मा के साथ ही साथ सभी निर्जीव वस्तुओं की पूजा भी की जाती है।
SEPT 17, 2023 10:19 IST

Vishwakarma jayanti Vrat Katha: विश्वकर्मा जयंती व्रत कथा

प्राचीन काल में काशी नगरी में एक रथकार अपनी पत्नी के साथ रहता था। वह अपने कार्य अच्छे से करता था, लेकिन फिर भी अधिक धन नही कमा पाता था। इस वजह से उसे अपने जीवन में बहुत सी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। इतना ही नहीं उसकी संतान ना होने की वजह से बभी वह हुत दुखी रहता था। वह और उसकी पत्नी दोनों अक्सर संतान की प्राप्ति के लिए साधु के पास जाते थे। एक दिन उसके पड़ोसी ब्राह्मण ने उससे कहा कि तुम दोनों भगवान विश्वकर्मा की पूजा करों। तुम्हारी इच्छा अवश्य पूरी होगी।
SEPT 17, 2023 09:55 IST

विश्वकर्मा का जन्म कैसा हुआ था

धार्मिक ग्रंथों में विश्वकर्मा को सृष्टि के रचयिता ब्रह्माजी का वंशज माना जाता है। वे ब्रह्माजी धर्म के पुत्र वास्तुदेव के पुत्र थे, जिन्हें शिल्प शास्त्र का पूर्वज माना जाता है। वास्तुदेव की पत्नी अंगिलाश से विश्वकर्मा का जन्म हुआ। अपने पिता के बाद विश्वकर्मा वास्तुकला के महान गुरु बने। मनु, मय, त्वष्टा, शिल्पी और देवज्ञ उनके पुत्र हैं। ये पांचों लड़के स्थापत्य कला की विभिन्न विधाओं के विशेषज्ञ माने जाते हैं। माना जाता है कि भगवान विश्वकर्मा का जन्म भगवान और राक्षसों के बीच समुद्र में उथल-पुथल मचाने के लिए हुआ था। पौराणिक युग के अस्त्र-शस्त्र और कवच भगवान विश्वकर्मा द्वारा ही बनाये गये थे। उन्होंने वज्र की भी रचना की थी।
SEPT 17, 2023 09:27 IST

विश्वकर्मा स्तुति मंत्र

पञ्चवक्त्रं जटाजूटं पञ्चादशविलोचनम् ।

सद्योजाताननं श्वेतं वामदेवं तु कृष्णकम् ॥ १

अघोरं रक्तवर्णं तत्पुरुषं पीतवर्णकम् ।

ईशानं श्यामवर्णं च शरीरं हेमवर्णकम् ॥ २

दशबाहुं महाकायं कर्णकुण्डलमण्डितम् ।

पीताम्बरं पुष्पमाला नागयज्ञोपवीतनम् ॥ ३

रुद्राक्षमालाभरणं व्याघ्रचर्मोत्तरीयकम् ।

अक्षमालां च पद्मं च नागशूलपिनाकिनम् ॥ ४

डमरुं वीणां बाणं च शङ्खचक्रकरान्वितम् ।

कोटिसूर्यप्रतीकाशं सर्वजीवदयापरम् ॥ ५

देवदेवं महादेवं विश्वकर्म जगद्गुरुम् ।

प्रसन्नवदनं ध्यायेत्सर्वविघ्नोपशान्तये ॥ ६

अभीप्सितार्थसिद्ध्यर्थं पूजितो यस्सुरैरपि ।

सर्वविघ्नहरं देवं सर्वावज्ञाविवर्जितम् ॥ ७

आहुं प्रजानां भक्तानामत्यन्तं भक्तिपूर्वकम् ।

सृजन्तं विश्वकर्माणं नमो ब्रह्महिताय च ॥ ८

मन्त्रम् – ओम् विश्वकर्माय नमः ।
SEPT 17, 2023 09:15 IST

Vishwakarma Puja Aarti Lyrics: विश्वकर्मा पूजा आरती लिरिक्स

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु जय श्री विश्वकर्मा।
सकल सृष्टि के कर्ता रक्षक श्रुति धर्मा ॥

आदि सृष्टि में विधि को, श्रुति उपदेश दिया।
शिल्प शस्त्र का जग में, ज्ञान विकास किया ॥

ऋषि अंगिरा ने तप से, शांति नही पाई।
ध्यान किया जब प्रभु का,सकल सिद्धि आई॥

रोग ग्रस्त राजा ने, जब आश्रय लीना।
संकट मोचन बनकर,दूर दुख कीना॥

जब रथकार दम्पती, तुमरी टेर करी।
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत्ति हरी सगरी॥

एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
द्विभुज, चतुर्भुज, दशभुज, सकल रूप साजे॥

ध्यान धरे जब पद का, सकल सिद्धि आवे।
मन दुविधा मिट जावे, अटल शांति पावे॥

श्री विश्वकर्मा जी की आरती, जो कोई नर गावे।
कहत गजानन स्वामी, सुख सम्पत्ति पावे॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा ।
सकल सृष्टि के करता, रक्षक स्तुति धर्मा ॥
SEPT 17, 2023 08:59 IST

Who is Lord Vishwakarma?- कौन हैं भगवान विश्वकर्मा

धार्मिक ग्रंथों में विश्वकर्मा को सृष्टि के रचयिता ब्रह्माजी का वंशज माना जाता है। ब्रह्माजी के सातवें पुत्र विश्वकर्मा देव थे। विश्वकर्मा भगवान को संसार का पहला शिल्पकार माना जाता है। विश्वकर्मा पूजा एक त्योहार है जहां कारीगर, शिल्पकार और श्रमिक भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते हैं। कहा जाता है कि भगवान ब्रह्मा के पुत्र विश्वकर्मा ने पूरे ब्रह्मांड का निर्माण किया था। विश्वकर्मा को देवताओं के महलों का वास्तुकार भी माना जाता है। ऐसी भी मान्यता है कि द्वारका नगरी से लेकर रावण की लंका तक का निर्माण भगवान विश्वकर्मा ने किया था। इसलिए भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का पहला इंजीनियर और वास्तुकार माना जाता है। विश्वकर्मा दो शब्दों से मिलकर बना है विश्व (विश्व या ब्रह्मांड) और कर्म (निर्माता)। इसलिए, विश्वकर्मा शब्द का अर्थ है दुनिया का निर्माता, अर्थात वह जो संसार की रचना करता है।
SEPT 17, 2023 08:51 IST

Vishwakarma Puja Vidhi: विश्वकर्मा पूजा विधि

  • इस दिन सुबह-सुबह अपनी गाड़ी, मोटर या दुकान की मशीनों की अच्छे से सफाई कर लें।
  • फिर स्नान करने के बाद अपनी पत्नी के साथ पूजा के स्थान पर बैठ जाए।
  • फिर भगवान विष्‍णु जी का ध्‍यान करें और उन्हें फूल अर्पित करें।
  • भगवान विश्वकर्मा की पूजा के लिए सुबह का समय ज्यादा शुभ माना जाता है इसलिए कोशिश करें कि सुबह में ही स्नान-ध्यान के बाद भगवान की पूजा करें।
  • पूजा के लिए भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति या तस्वीर, जल से भरा कलश, धूप, सुपारी, पीली सरसों, अक्षत, माला, फूल, चंदन आदि सामग्री को एकत्रित कर लें।
  • इसके बाद अपने हाथ में फूल और अक्षत लेकर इस मन्त्र का उच्चारण करें, “ऊं आधार शक्तपे नमः ऊं कूमयि नमः ऊं अनंतम नमः ऊं पृथिव्यै नमः ऊं श्री सृष्टतनया सर्वसिद्धया विश्वकर्माया नमो नमः।”
  • मंत्र पढ़ने के बाद हाथ में रखे अक्षत और फूल भगवान पर चढ़ा दें।
  • फिर पीली सरसों को चार पोटलियों में बांधकर कार्यस्थल या ऑफिल की चारों दिशाओं में लटका दें।
  • इसके बाद अपने हाथ में और पूजा स्थल पर उपस्थित लोगों के हाथ में मोली बांध लें।
  • फिर भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करते हुए उनकी आराधना करें।
  • अब जमीन पर आठ पंखुड़‍ियों वाला एक कमल बनाएं और उस पर फूल चढ़ा दें।
  • इसके बाद अंत में भगवान विश्वकर्मा की आरती करें और अंत में प्रसाद बांटे।
SEPT 17, 2023 08:20 IST

Vishwakarma Puja Vrat Katha: विश्वकर्मा पूजा व्रत कथा

जब सृष्टि का निर्माण हो रहा था, तो वहां सबसे पहले भगवान नारायण सागर में शेषशय्या पर प्रकट हुए। भगवान विष्णु के प्रकट होने के बाद उनकी नाभि से भगवान ब्रह्मा दृष्टिगोचर हो गए थें। ब्रह्मा के पुत्र 'धर्म' और धर्म के पुत्र 'वासुदेव' थे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार 'वस्तु' से उत्पन्न 'वास्तु' सातवें पुत्र थे,जो शिल्पशास्त्र के ज्ञाता थे। वासुदेव की पत्नी अंगिरसी' ने विश्वकर्मा जी को जन्म दिया। आगे चलकर भगवान विश्वकर्मा भी वास्तुकला के अद्वितीय आचार्य बनें।
SEPT 17, 2023 07:49 IST

Vishwakarma Puja Mantra: विश्वकर्मा पूजा मंत्र

ओम आधार शक्तपे नम: और ओम् कूमयि नम:; ओम् अनन्तम नम:, पृथिव्यै नम
SEPT 17, 2023 07:45 IST

विश्वकर्मा जयंती 2023 का महत्व (Vishwakarma Puja 2023 Significance)

विश्वकर्मा जयंती का हिंदू धर्म में विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन विश्व के पहले वास्तुकार भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इनकी पूजा से व्यक्ति की शिल्पकला का विकास होता है। इस दिन लोग पूरे विधि-विधान से विश्वकर्मा जी की पूजा करते हैं। साथ ही अपने कार्यस्थल में प्रयोग किए जाने वाले औजारों और अस्त्रों की साफ सफाई करके उनकी पूजा भी करते हैं। इस पूजा के बाद प्रसाद बांटने का भी विधान है।
SEPT 17, 2023 07:33 IST

Vishwakarma Puja Samagri List in Hindi: विश्वकर्मा पूजा सामग्री लिस्ट इन हिंदी

  • विश्वकर्मा भगवान की प्रतिमा
  • रोली
  • लौंग
  • इलायची
  • सर्वौषधि
  • सप्तमृत्तिका
  • पीली सरसों
  • जनेऊ 5 पीस
  • इत्र
  • पीला सिंदूर
  • पीला अष्टगंध चंदन
  • लाल सिंदूर
  • हल्दी (पिसी)
  • जटादार सूखा नारियल 1 पीस
  • अक्षत (चावल) 1 किलो
  • धूपबत्ती
  • रुई की बत्ती (गोल / लंबी)
  • देशी घी
  • हल्दी (समूची)
  • सुपाड़ी (समूची बड़ी)
  • गरी का गोला (सूखा) 2 पीस
  • पानी वाला नारियल 1 पीस
  • कपूर
  • कलावा
  • लाल वस्त्र 1 मीटर
  • पीला वस्त्र 1 मीटर
  • कुश (पवित्री)
  • लकड़ी की चौकी
  • चुनरी (लाल या पीली)
  • बताशा 500 ग्राम
  • गंगाजल
  • नवग्रह चावल
  • दोना (छोटा-बड़ा)
  • मिट्टी का कलश (बड़ा)
  • मिट्टी का प्याला 8 पीस
  • नवग्रह समिधा 1 पैकेट
  • हवन सामग्री 500 ग्राम
  • तिल 100 ग्राम
  • जौ 100 ग्राम
  • मिट्टी की दियाली 8 पीस
  • हवन कुण्ड
  • माचिस
  • आम की लकड़ी 2 किलो
  • पंचरत्न व पंचधातु
  • धोती पीली या लाल 1 पीस
  • अगोंछा पीला या लाल 1 पीस
  • गुड़ 100 ग्राम
  • कमलगट्टा 100 ग्राम
  • शहद
  • पंचमेवा
  • मिष्ठान 500 ग्राम
  • पान के पत्ते (समूचे) 21 पीस
  • ऋतु फल 5 प्रकार के
  • दूब घास 50 ग्राम
  • केले के पत्ते 5 पीस
  • आम के पत्ते 2 डंठल
  • फूल माला
  • गुलाब/गेंदा का खुला हुआ फूल 500 ग्राम
  • धोती
  • कुर्ता
  • अंगोछा
  • पंच पात्र
  • माला इत्यादि
  • तुलसी की पत्ती
  • दूध 1 लीटर
  • दही 1 किलो
  • जल (पूजन हेतु)
  • गाय का गोबर
  • मिट्टी
  • बिछाने का आसन
  • आटा 100 ग्राम
  • चीनी 500 ग्राम
  • अखंड दीपक
  • तांबे/पीतल का कलश
  • थाली
  • कटोरी
  • चम्मच
  • परात
  • पंचामृत
SEPT 17, 2023 07:19 IST

Vishwakarma Puja 2023 Muhurat Time: विश्वकर्मा पूजा मुहूर्त

विश्वकर्मा पूजा- 17 सितंबर 2023, रविवारविश्वकर्मा पूजा मुहूर्त- 7:50 AM से 12:26 PMविश्वकर्मा पूजा कन्या संक्रान्ति का क्षण - 01:43 PMद्विपुष्कर योग - 10:02 AM से 11:08 AMसर्वार्थ सिद्धि योग - 06:07 AM से 10:02 AMअमृत सिद्धि योग - 06:07 AM से 10:02 AM