Sunrise Time Today (16 May 2026): आज 16 मई 2026, शनिवार का दिन है। आज ज्येष्ठ अमावस्या, शनि अमावस्या और वट सावित्री व्रत का विशेष संयोग बना है। हिंदू धर्म में इस दिन का अत्यंत धार्मिक महत्व माना जाता है। सुहागिन महिलाएं वट सावित्री व्रत रखकर बरगद के वृक्ष की पूजा करती हैं, वहीं शनि अमावस्या होने के कारण शनि देव की पूजा और पितरों के निमित्त दान-पुण्य का भी विशेष महत्व है। ऐसे में आज सूर्योदय का समय जानकर ही पूजा और व्रत की शुरुआत करना शुभ माना जाता है।
आज का सूर्योदय टाइम
धार्मिक मान्यता है कि ज्येष्ठ अमावस्या के दिन सूर्योदय के समय स्नान कर सूर्यदेव को अर्घ्य देने से पापों का नाश होता है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। वहीं वट सावित्री व्रत करने वाली महिलाएं सूर्योदय के बाद व्रत संकल्प लेकर पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। आइए जानते हैं आज के दिन सूर्योदय (Aaj ka Suryoday Time) का सही समय...
शहरों के अनुसार सूर्योदय का समय (16 मई 2026)
- दिल्ली – सुबह 5:29 बजे
- मुंबई – सुबह 6:03 बजे
- कोलकाता – सुबह 4:56 बजे
- चेन्नई – सुबह 5:42 बजे
- बेंगलुरु – सुबह 5:49 बजे
- हैदराबाद – सुबह 5:44 बजे
- जयपुर – सुबह 5:35 बजे
- लखनऊ – सुबह 5:17 बजे
- पटना – सुबह 5:03 बजे
- भोपाल – सुबह 5:36 बजे
- अहमदाबाद – सुबह 5:50 बजे
- चंडीगढ़ – सुबह 5:24 बजे
- देहरादून – सुबह 5:22 बजे
- शिमला – सुबह 5:20 बजे
- अमृतसर – सुबह 5:26 बजे
- नागपुर – सुबह 5:36 बजे
- पुणे – सुबह 5:59 बजे
- इंदौर – सुबह 5:39 बजे
- रांची – सुबह 5:00 बजे
- गुवाहाटी – सुबह 4:35 बजे
नोट: ये समय विभिन्न पंचांगों और स्थानीय समयानुसार अनुमानित हैं। शहर के अनुसार 1–2 मिनट का अंतर संभव है। सटीक जानकारी के लिए स्थानीय पंचांग देखें।
ज्येष्ठ अमावस्या और वट सावित्री व्रत की तिथि
दैनिक पंचांग के अनुसार आज ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है। अमावस्या तिथि का प्रारंभ 16 मई 2026 को सुबह 05:11 बजे से हो रहा है और इसका समापन 17 मई 2026 को देर रात 01:30 बजे होगा। इसी दिन उत्तर भारत में वट सावित्री व्रत रखा जाएगा। मान्यता है कि माता सावित्री ने अपने तप और पतिव्रत धर्म के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। इसी कारण महिलाएं बरगद के पेड़ की पूजा कर अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मांगती हैं।
आज की पूजा का शुभ समय
आज सूर्योदय के तुरंत बाद लगभग 10 से 15 मिनट तक सूर्यदेव को जल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना गया है। इस दौरान तांबे के लोटे में जल, लाल फूल और अक्षत डालकर “ॐ सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करते हुए अर्घ्य देना लाभकारी माना जाता है।
इसके बाद महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर कच्चा सूत बांध सकती हैं और वट सावित्री व्रत कथा का श्रवण कर सकती हैं। वहीं शनि अमावस्या होने के कारण पीपल वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना भी शुभ माना जाता है।
