Sawan Somwar Vrat Niyam In Hindi (सावन सोमवार व्रत नियम): सावन सोमवार व्रत 22 जुलाई से शुरू हो गए हैं। ये व्रत भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए खास माने जाते हैं। सावन सोमवार व्रत में व्रती सुबह-शाम शिव की पूजा करते हैं। तो वहीं शाम में इस व्रत की कथा सुनते हैं और इसके बाद अपना व्रत खोल लेते हैं। लेकिन कुछ लोग ये व्रत अगले दिन खोलते हैं। जिन लोगों के विवाह में दिक्कत रही है उनके लिए ये व्रत विशेषतौर पर फलदायी साबित होता है। यहां आप जानेंगे सावन सोमवार व्रत के नियम।
Sawan Somwar Vrat Niyam In Hindi
सावन सोमवार के नियम (Sawan Somwar Vrat Niyam In Hindi)
- सावन सोमवार के दिन शिवलिंग का अभिषेक जरूर करना चाहिए। साथ ही शिवलिंग पर बेलपत्र भी चढ़ाने चाहिए।
- सावन सोमवार व्रत में दिन में नहीं सोना चाहिए।
- इस व्रत में शाम के समय भगवान शिव का पूरे विधि विधान के साथ पूजन करना चाहिए।
- इस दिन सावन सोमवार व्रत कथा पढ़ना बिल्कुल भी न भूलें।
- सावन के पूरे महीने में सात्विक भोजन करना चाहिए।
- सावन सोमवार के दिन बेल के पत्तों को नहीं तोड़ना चाहिए। लेकिन पूजा के लिए आप 1 दिन पहले से ही बेलपत्र तोड़कर रख सकते हैं।
- सावन सोमवार के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करें।
- भगवान शिव को केतकी के फूल अर्पित न करें।
- सावन सोमवार के दिन दूध और दूध से बनी हुई चीजों का प्रयोग नहीं करें।
- इस दिन काले रंग के कपड़े न पहनें।
- सावन सोमवार व्रत के दिन बाल भी नहीं धोने चाहिए।
- शाम की पूजा के बाद व्रत खोल सकते हैं।
- इस व्रत में सेंधा नमक का इस्तेमाल कर सकते हैं।
- भगवान शिव की पूजा में तुलसी का इस्तेमाल नहीं करना है।
- शिव जी को नारियल पानी नहीं चढ़ाना जाता है।
- शिव जी को सिंदूर का तिलक नहीं लगाना चाहिए।
क्या सावन सोमवार व्रत में बाल धो सकते हैं (Sawan Somwar Vrat Me Bal Dho Sakte Hai)
सावन सोमवार व्रत में सुहागिन स्त्रियों को बाल नहीं धोने चाहिए। हालांकि कुंवारी लड़कियां बाल धो सकती हैं।
सावन सोमवार व्रत विधि (Sawan Somwar Vrat Vidhi)
सुबह स्नान के बाद भगवान शिव के समक्ष व्रत का संकल्प लें। फिर एक वेदी पर भगवान शिव की मूर्ति स्थापित करें। फिर पंचामृत से भगवान का अभिषेक करें और सफेद चंदन का तिलक जरूर लगाएं। इसके अलावा पूजा में बेलपत्र, भांग, धतूरा और सफेद फूलों का इस्तेमाल जरूर करें। शाम में शिव जी की फिर से विधि विधान पूजा करें और सोमवार की व्रत कथा सुनें। फिर शिव जी के मंत्रों का जाप करें और अंत में आरती उतारें।
