चार दिन बाद खुले मां कामाख्या के द्वार, जानें क्यों खास होता है अंबुबाची के बाद पहला दर्शन

Kamakhya Temple: कामाख्या मंदिर में लगने वाला अंबुबाची मेला खत्म हो गया है। जिसके बाद चार दिनों तक बंद रहे मंदिर के द्वारों को फिर से खोला गया। आइए जानते हैं क्यों खास होता है मेले के बाद पहला दर्शन...

Kamakhya Temple: चार दिन तक चले अंबुबाची महायोग के समापन के बाद असम के गुवाहाटी स्थित मां कामाख्या मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए फिर से खोल दिए गए हैं। कपाट खुलते ही मंदिर परिसर में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। देश-विदेश से पहुंचे श्रद्धालु मां के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए लंबी कतारों में दिखाई दिए। अंबुबाची मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि शक्ति उपासना, तांत्रिक साधना और प्रकृति के प्रति सम्मान का अद्भुत संगम माना जाता है। आइए विस्तार से जानते हैं क्यों ज्यादा है अंबुबाची मेले के बाद पहले दर्शन का महत्व।

Kamakhya Temple

कामाख्या मंदिर

क्या है अंबुबाची महायोग

हिंदू मान्यताओं के अनुसार साल में एक बार मां कामाख्या रजस्वला (मासिक धर्म) होती हैं। इस अवधि को अंबुबाची महायोग कहा जाता है। मान्यता है कि इन तीन से चार दिनों तक मां विश्राम करती हैं, इसलिए मंदिर के कपाट बंद रहते हैं और नियमित पूजा-अर्चना भी रोक दी जाती है। यह पर्व स्त्री शक्ति, सृजन और प्रकृति के चक्र का प्रतीक माना जाता है।

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