Kaal Bhairav Jayanti 2025: हिंदू धर्म में मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को काल भैरव अष्टमी या काल भैरव जयंती के रूप में मनाया जाता है। यह दिन भगवान शिव के उग्र और रक्षक स्वरूप भगवान काल भैरव को समर्पित है, जिन्हें समय का स्वामी, काशी का कोतवाल और सभी नकारात्मक शक्तियों का नाशक माना जाता है। मान्यता है कि इसी दिन भगवान शिव ने ब्रह्मा के अहंकार को चूर करने के लिए काल भैरव रूप धारण किया था। काल भैरव की पूजा से जीवन के भय, शत्रु बाधाएं, ग्रह दोष जैसे राहु-केतु और शनि के प्रभाव दूर होते हैं। सुख, समृद्धि, सुरक्षा और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है।
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस वर्ष अष्टमी तिथि की शुरुआत 11 नवंबर 2025 को रात 11:08 बजे हुई थी और समापन आज 12 नवंबर को रात 10:49 बजे होगा। उदयातिथि के आधार पर मुख्य पर्व आज मनाया जा रहा है। भक्त सुबह से व्रत रखकर पूजा करते हैं, लेकिन काल भैरव की पूजा का विशेष महत्व रात्रि काल में है, इसे खासकर निशिता मुहूर्त यानी मध्यरात्रि में ज्यादा शुभ माना जाता है। यह समय उनकी तांत्रिक साधना और ऊर्जा के चरम पर होने का प्रतीक है।
साल 2025 में काल भैरव अष्टमी पर पूजा के लिए कई शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं। इस में रात्रि का निशिता मुहूर्त सबसे उत्तम माना जाता है, जो 12 नवंबर की रात 11:39 बजे से 13 नवंबर की सुबह 12:32 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, रात 8:00 बजे से 11:00 बजे तक का पहला पहर भी पूजा के लिए अच्छा है। यदि संभव हो, तो मध्यरात्रि के आसपास पूजा करें और काले वस्त्र पहनें, क्योंकि काल भैरव का प्रिय रंग काला है।
काल भैरव की पूजा रात्रि में विशेष रूप से प्रभावी होती है, क्योंकि यह समय उनकी ऊर्जा और शक्ति के चरम का प्रतीक है। पूजा से पहले स्नान कर लें और शांत स्थान चुनें जहां कोई व्यवधान न हो। एक साफ चौकी पर काला या लाल कपड़ा बिछाकर भगवान काल भैरव की मूर्ति, चित्र या यंत्र स्थापित करें।
चारों ओर काले या लाल गुलाब के फूलों से सजाएं और भगवान गणेश का ध्यान पहले करें, ताकि पूजा बिना बाधा के संपन्न हो।
एक तांबे या मिट्टी के कलश में जल भरें और उसमें सुपारी, दूर्वा तथा चंदन डालें। कलश को चौकी के पास रखें और भगवान को काले कपड़े या फूलों का आसन अर्पित करें। सरसों के तेल का दीपक जलाएं और धूप जलाएं। दीपक के सामने ‘ओम भैरवाय नमः’ मंत्र का जप शुरू करें।
हाथ जोड़कर संकल्प लें कि आप मार्गशीर्ष कृष्ण अष्टमी पर भगवान काल भैरव की पूजा कर रहे हैं, ताकि जीवन से भय, बाधाएं और पाप दूर हों। भगवान का ध्यान करें और उन्हें कुत्ते पर सवार, त्रिशूल धारण किए और काले वस्त्रों में कल्पना करें। मुख्य मंत्र ‘ॐ कालभैरवाय नमः’ या ‘ॐ भैरवाय हौं भैरवाय नमः’ कम से कम 108 बार जपें।
पंचोपचार पूजा में भगवान को सबसे पहले चंदन का तिलक लगाएं, फिर काले तिल और फूलों की माला अर्पित करें। धूप-दीप पहले से जलाए हुए हैं। नैवेद्य में काले तिल, उड़द दाल, नारियल, सुपारी, सरसों का तेल और उनकी प्रिय जलेबी या इमरती चढ़ाएं। मिष्ठान भी अवश्य रखें। मौसमी फल और दक्षिणा के रूप में काला कपड़ा या सिक्का अर्पित करें।
काल भैरव चालीसा, अष्टक या स्तोत्र का पाठ करें, विशेष रूप से काल भैरव अष्टकम पढ़ना भय नाशक है। मुख्य मंत्र ‘ॐ भ्रं भैरवाय नमः’ या ‘ॐ कालभैरवाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो भैरव प्रचोदयात्’ 108 या 1008 बार जपें। यदि समय हो, तो रात्रि जागरण करें और भजन गाएं।
पूजा के अंत में कपूर या घी के दीप से आरती करें।
आरती के बोल हैं कि ‘जय भैरव देव, जय भैरव देव, त्रिशूल धरि शूल, कपाल गले माला। भक्तों के संकट हरने वाले, कृपा करो भैरव बाबा।’ तीन से सात प्रदक्षिणा करें और प्रार्थना करें कि हे काल भैरव, मेरे जीवन की रक्षा करें।
पूजा समाप्ति पर प्रसाद बांटें। रात्रि में जरूरतमंदों को काले वस्त्र, तिल, तेल या भोजन दान करें। भगवान काल भैरव के वाहन कुत्ते को रोटी, दूध या बिस्किट खिलाना अत्यंत पुण्यदायी है।
इस रात्रि पूजा से राहु-केतु, शनि दोष शांत होते हैं। करियर, रिश्तों और स्वास्थ्य में बाधाएं दूर होती हैं। काल भैरव की कृपा से जीवन निर्भय और समृद्ध बनता है। लेकिन इस दिन मदिरा, मांसाहार और झूठ से पूरी तरह दूर रहें।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।