जहां दिखाया गया रहमान डकैत का खौफ, वहां होती है इन देवी की पूजा, कहलाती हैं 'नानी मां'
- Authored by: Mohit Tiwari
- Updated Dec 15, 2025, 12:32 PM IST
Mata Shaktipeeth in Pakistan: धुरंधर मूवी वाले रहमान डकैत का जिस क्षेत्र ल्यारी में खौफ था, वहीं हिंदुओं का एक पावन शक्तिपीठ भी है। यहां पर हर साल लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन करने आते हैं। यहां स्थानीय मुस्लिम समुदाय भी माता को 'नानी मां' के रूप में पूजता है। आइए जानते हैं कि माता के इस शक्ति पीठ की क्या खासियत है?
कौन हैं बलूचिस्तान की देवी 'नानी मां'
Mata Shaktipeeth in Pakistan: धुरंधर मूवी के रहमान डकैत का खौफ जिस क्षेत्र में था, पाकिस्तान के उसी बलूचिस्तान प्रांत के रेगिस्तानी इलाके में, हिंगोल नेशनल पार्क की पहाड़ियों के बीच एक प्राचीन गुफा मंदिर स्थित है। जो हिंदू धर्म के बड़े तीर्थस्थलों में शामिल है। यह माता के 51 शक्तिपीठों में से एक है। यहां हिंगलाज माता मंदिर है।
मान्यता है कि यहां माता सती का मस्तक गिरा था। यहां कोई मूर्ति या दरवाजा नहीं है, केवल एक प्राकृतिक पत्थर को सिंदूर लगाकर हिंगलाज माता के रूप में पूजा जाता है। स्थानीय मुस्लिम समुदाय माता को 'नानी मां' या 'बिबी नानी' कहकर पूजते हैं और हिंदू तीर्थयात्रियों की सेवा करते हैं। यह मंदिर सदियों से हिंदू-मुस्लिम एकता का अनोखा प्रतीक बना हुआ है।
क्या है मंदिर की पौराणिक कथा?
हिंदू पुराणों के अनुसार, जब माता सती ने अपने पिता दक्ष के यज्ञ में आत्मदाह कर लिया, तो भगवान शिव उनके शरीर को लेकर तांडव करते हुए पूरी सृष्टि में भटकने लगे। इस पर भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 51 (या कुछ मान्यताओं में 52) भागों में विभाजित कर दिया। माता सती के शरीर के जो भाग जहां गिरे वहां शक्तिपीठ बन गए। माना जाता है कि हिंगलाज में माता सती का ब्रह्मरंध्र (मस्तक का ऊपरी भाग) गिरा था। इस कारण यह स्थान शक्तिशाली शक्तिपीठ माना जाता है। यहां भैरव रूप में भी शिव की पूजा होती है। पाकिस्तान में यह एकमात्र प्रमुख शक्तिपीठ है जो सक्रिय रूप से पूजा जाता है।
क्या है मंदिर की विशेषता?
हिंगलाज माता मंदिर एक छोटी प्राकृतिक गुफा में है, जहां कोई कृत्रिम मूर्ति नहीं है। केवल एक छोटा सा अनगढ़ पत्थर सिंदूर से रंगा हुआ है, जिसे माता का स्वरूप माना जाता है। गुफा में प्रवेश करके श्रद्धालु माथा टेकते हैं। मंदिर के आसपास चंद्रगुप और खंडेवारी जैसे मड वॉल्केनो भी हैं, जहां तीर्थयात्री नारियल फोड़कर मन्नत मांगते हैं। यह स्थान हिंगोल नदी के किनारे है और प्रकृति की गोद में बसा होने से और भी पवित्र लगता है।
पाकिस्तान की सबसे बड़ी हिंदू तीर्थयात्रा
हर साल अप्रैल में (चैत्र नवरात्रि के आसपास) हिंगलाज यात्रा होती है, जिसमें लाखों श्रद्धालु शामिल होते हैं। यह पाकिस्तान की सबसे बड़ी हिंदू तीर्थयात्रा है। यात्री कराची से बस या पैदल रेगिस्तान पार करके मंदिर पहुंचते हैं। स्थानीय बलोच और जिकरी मुस्लिम समुदाय यात्रियों की मदद करते हैं और सुरक्षा प्रदान करते हैं। यात्रा में चंद्रगुप मड वॉल्केनो पर चढ़ना और नारियल फोड़ना अनिवार्य रस्म है।
हिंदू-मुस्लिम एकता का है अनोखा उदाहरण
हिंगलाज माता को स्थानीय मुस्लिम 'नानी मां' कहते हैं। जिकरी मुस्लिम समुदाय मंदिर की देखभाल करता है। यात्रा में हिंदू और मुस्लिम दोनों शामिल होते हैं, जो सदियों पुरानी सांझी विरासत का प्रमाण है। यह मंदिर धार्मिक सद्भाव का जीवंत प्रतीक है। हिंगलाज माता मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि मानवता और एकता का संदेश भी देता है।