Dwijapriya Sankashti Chaturthi Vrat katha Live Updates: आज है अत्यंत पावन द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत, जानें कैसे और क्यों रखा जाता है ये व्रत
Dwijapriya Sankashti Chaturthi 2026 Vrat katha (द्विजप्रिया संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा) Shubh Muhurat, Puja Vidhi, Ganesh ji ki Aarti, Mantra, Chalisa in Hindi LIVE Updates: फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026 का व्रत 5 फरवरी को गुरुवार के दिन रखा जा रहा है। द्विजप्रिया संकष्टी चतुर्थी व्रत का महत्व क्या है। जानें फरवरी में आने वाली संकष्टी चतुर्थी का व्रत कैसे रखा जाता है। साथ ही पढ़ें द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा हिंदी में।
Dwijapriya Sankashti Chaturthi Vrat katha Live Updates: आज है अत्यंत पावन द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत, जानें कैसे और क्यों रखा जाता है ये व्रत
द्विजप्रिया संकष्टी चतुर्थी व्रत कथा
पुराने समय की बात है। युवनाश्व नाम के एक दयालु और धर्मप्रिय राजा राज्य करते थे। उसी राज्य में विष्णुशर्मा नाम के एक ब्राह्मण रहते थे। उनके सात पुत्र थे, लेकिन परिवार में आपसी कलह और मतभेद के कारण सभी बेटे अलग-अलग रहने लगे। विष्णुशर्मा हर दिन बारी-बारी से अपने पुत्रों के घर भोजन करने जाया करते थे। समय के साथ वे वृद्ध और दुर्बल हो गए। बहुएं उन्हें बोझ समझने लगीं।
एक बार संकष्टी चतुर्थी का पावन दिन आया। विष्णुशर्मा एक-एक कर सभी बहुओं के घर गए, लेकिन किसी ने भी उनका सहयोग नहीं किया। अंत में वे अपनी छोटी बहू के घर पहुंचे। वह अत्यंत निर्धन थी। उसकी आर्थिक स्थिति देखकर विष्णुशर्मा कुछ कहने में संकोच करने लगे। तभी छोटी बहू ने कहा कि वह भी उनके साथ यह व्रत करेगी। उसने सीमित साधनों के बावजूद पूरी श्रद्धा से पूजा की सामग्री जुटाई और दोनों ने विधि-विधान से भगवान गणेश की पूजा की।
इस पर भगवान गणेश छोटी बहू की सेवा भावना, श्रद्धा और सच्चे मन से किए गए व्रत से प्रसन्न हुए। धीरे-धीरे उसका घर धन-धान्य से भर गया। इसीलिए मान्यता है कि द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत सच्चे मन और निस्वार्थ भाव से करने से व्यक्ति के कष्ट दूर होते हैं।
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026 डेट एंड टाइम
5 फरवरी 2026 को गुरुवार के दिन द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा जाएगा। संकष्टी चतुर्थी की तिथि 5 फरवरी 2026 को 12:09 am पर प्रारंभ होगी। इसका समापन 6 फरवरी 2026 को 12:22 am पर होगा।
संकष्टी व्रत पूजा सामग्री
कैसे दें चंद्रमा को अर्घ्य
कार्य की शुरुआत में करें भगवान गणेश के इस मंत्र का जाप
भगवान गणेश को अर्पित न करें तुलसी
आज भगवान गणेश को अर्पित करें ये चीजें
श्री गणेश जी की आरती लिरिक्स
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे पर सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
संकष्टी व्रत में चंद्र दर्शन का क्या महत्व है?
द्विजप्रिया संकष्टी चतुर्थी पर कौन-सा भगवान पूजे जाते हैं?
संकष्टी चतुर्थी का व्रत क्यों रखा जाता है?
संकष्टी चतुर्थी पर चंद्र दर्शन क्यों जरूरी है
द्विजप्रिय संकष्टी पर क्या न करें
संकष्टी चतुर्थी पर चंद्र दर्शन क्यों जरूरी है?
द्विजप्रिय शब्द का क्या अर्थ है
भगवान गणेश पूजा मंत्र
यह सबसे शक्तिशाली और प्रचलित मंत्र है। इसे 11, 21 या 108 बार जपने से विघ्न, डर और मानसिक उलझनें दूर होती हैं।
