Chhath Puja 2025 Date Time Puja Kab hai: छठ का नहाय खाय कैसे किया जाता है? देखें छठ महापर्व 2025 कैलेंडर, सामग्री लिस्ट, विधि, आरती सबकुछ
Chhath Puja 2025 Date Time, Shubh Muhurat (छठ पूजा कब से शुरू है नहाय खाय, खरना, संध्या अर्घ और उषा अर्घ) Chhathi Maiya Vrat Katha, Samagri List, Puja Vidhi: आज यानी 25 अक्टूबर से महापर्व छठ पूजा की शुरूआत हो रही है। 4 दिनों का ये त्योहार बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाता है। इस दौरान व्रत महिलाएं निर्जला उपवास रखती हैं और कठिन नियमों का पालन करते हुए छठी मैया और सूर्य देव की पूजा करती हैं। देखें छठ की पूजा सामग्री, छठ पूजा 2025 का पूरा कैलेंडर, छठ पूजा डेट्स 2025, छठ पूजा 2025 का शुभ मुहूर्त, छठ पूजा की कथा और छठ पूजा आरती लिरिक्स - तक की पूरी जानकारी।
Chhath Puja 2025 Date Time Puja Kab hai: छठ का नहाय खाय कैसे किया जाता है? देखें छठ महापर्व 2025 कैलेंडर, सामग्री लिस्ट, विधि, आरती सबकुछ
छठ पूजा 2025 कैलेंडर-
छठ पूजा सामग्री लिस्ट-
छठ मईया गीत (ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से)
ऊ जे केरवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
ऊ जे नारियर जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए॥जय॥
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥जय॥
अमरुदवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
शरीफवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए॥जय॥
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥जय॥
ऊ जे सेववा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए।
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए॥जय॥
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय।
सभे फलवा जे फरेला खबद से, ओह पर सुगा मेड़राए॥जय॥
मारबो रे सुगवा धनुख से, सुगा गिरे मुरझाए।
ऊ जे सुगनी जे रोएली वियोग से, आदित होई ना सहाय॥जय॥
छठ मईया गीत (पहिले पहिल हम कईनी)
पहिले पहिल हम कईनी, छठी मईया व्रत तोहर,
छठी मईया व्रत तोहर।
करिहा क्षमा छठी मईया, भूल-चूक गलती हमार,
भूल-चूक गलती हमार।
गोदी के बलकवा के दिहा, छठी मईया ममता-दुलार,
छठी मईया ममता-दुलार।
पिया के सनईहा बनईहा, मैया दिहा सुख सार,
मैया दिहा सुख सार।
नारियल केरवा घवदवा, साजल नदिया किनार,
साजल नदिया किनार।
सुनिहा अरज छठी मैया, बढ़े कुल परिवार,
बढ़े कुल परिवार।
घाट सजवली मनोहर, मैया तोरा भगती अपार,
मैया तोरा भगती अपार।
लिहि ए अरग हे मैया, दिहीं आशीष हजार,
दिहीं आशीष हजार।
पहिले पहिल हम कईनी, छठीमैया बरत तोहर,
छठीमैया व्रत तोहर।
करिहा क्षमा छठी मईया, भूल-चूक गलती हमार
भूल-चूक गलती हमार, भूल-चूक गलती हमार।
छठ मैया कौन है
पौराणिक कथाओं के मुताबिक छठ मैया ब्रह्मा जी की मानस पुत्री और भगवान सूर्य की बहन हैं। षष्ठी देवी यानी छठ मैया संतान प्राप्ति की देवी हैं।
छठ व्रत नियम
- छठ पूजा के दौरान घर में प्याज, लहसुन और मांसाहारी चीजों का सेवन किसी के लिए भी वर्जित है।
- व्रती के द्वारा बनाए गए छठ के भोजन में गंगाजल का उपयोग किया जाता है और इसे मिट्टी या कांसे के बर्तनों में बनाया जाता है।
- छठ पूजा की सामग्री प्रसाद, फल और अर्घ्य की सामग्री बांस की टोकरी यानी सूप में रखी जाती है।
- व्रतधारी को शरीर और मन की शुद्धि के लिए नदी, तालाब या किसी स्वच्छ जलाशय में स्नान करना जरूरी होता है।
- छठ पूजा में सूर्य को अर्घ्य जल में खड़े होकर दिया जाता है।
- व्रती को पूजा के दौरान चमड़े की वस्तुओं का भूलकर भी इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
- ध्यान रहे कि छठ का प्रसाद बनाने में उपयोग किए जाने वाले बर्तन और चूल्हा शुद्ध होना चाहिए।
- चूल्हा जलाने के लिए लकड़ी या उपले का इस्तेमाल करें।
- व्रती को पलंग या चारपाई पर नहीं सोना चाहिए।
छठ पूजा का महत्व
छठ पूजा के दौरान महिलाएं 36 घंटे का निर्जला उपवास रखती हैं। व्रत रहते हुए छठ का प्रसाद तैयार करती हैं। फिर पानी में खड़े होकर डूबते और उगते सूरज को अर्घ्य देती हैं। मान्यताओं अनुसार छठ पूजा करने से संतान को दीर्घायु और सुखी जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है। कई महिलाएं संतान प्राप्ति के लिए भी छठ का व्रत रखती हैं।
छठ पूजा गीत (हो दीनानाथ)
सोना सट कुनिया, हो दीनानाथ
हे घूमइछा संसार, हे घूमइछा संसार
सोना सट कुनिया, हो दीनानाथ
हे घूमइछा संसार, हे घूमइछा संसार
आन दिन उगइ छा हो दीनानाथ
आहे भोर भिनसार, आहे भोर भिनसार
आजू के दिनवा हो दीनानाथ
हे लागल एती बेर, हे लागल एती बेर
बाट में भेटिए गेल गे अबला
एकटा अन्हरा पुरुष, एकटा अन्हरा पुरुष
अंखिया दियेते गे अबला
हे लागल एती बेर, हे लागल एती बेर
बाट में भेटिए गेल गे अबला
एकटा बाझिनिया, एकटा बाझिनिया
बालक दियेते गे अबला
हे लागल एती बेर, हे लागल एती बेर
Chhath Puja 2025 Date Time Puja Kab hai LIVE: छठ पूजा के दूसरे दिन कौन सी रस्म होती है?
छठ पूजा में क्या-क्या प्रसाद बनता है?
- खजूर
- ठेकुआ
- केला
- डाभ नींबू
- नारियल
- गन्ना
- सिंघाड़ा, सुपारी और सुथनी
- आंवला
- मूली और पत्ते
- कच्चा हल्दी
हो दीनानाथ - छठ पूजा गीत
सोना सट कुनिया, हो दीनानाथ
हे घूमइछा संसार, हे घूमइछा संसार
सोना सट कुनिया, हो दीनानाथ
हे घूमइछा संसार, हे घूमइछा संसार
आन दिन उगइ छा हो दीनानाथ
आहे भोर भिनसार, आहे भोर भिनसार
आजू के दिनवा हो दीनानाथ
हे लागल एती बेर, हे लागल एती बेर
बाट में भेटिए गेल गे अबला
एकटा अन्हरा पुरुष, एकटा अन्हरा पुरुष
अंखिया दियेते गे अबला
हे लागल एती बेर, हे लागल एती बेर
बाट में भेटिए गेल गे अबला
एकटा बाझिनिया, एकटा बाझिनिया
बालक दियेते गे अबला
हे लागल एती बेर, हे लागल एती बेर
केलवा के पात पर उगे लन सुरुजमल झांके झुके छठ गीत
केलवा के पात पर उगे लन सुरुजमल झांके झुके, केलवा के पात पर उगे लन सुरुजमल झांके झुके।।
के करेलू छठ बरतिया से झांके झुके, के करेलू छठ बरतिया से झांके झुके ||
हम तोहसे पूछी बरतिया ए बरतिया के केकरा लागी, हम तोहसे पूछी बरतिया ए बरतिया के केकरा लागी ।।
के करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी, के करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी ।।
हमरो जे बेटवा तोहन अइसन बेटावा से उनके लागी, हमरो जे बेटवा तोहन अइसन बेटावा से उनके लागी ।।
से करेली छठ बरतिया से उनके लागी, से करेली छठ बरतिया से उनके लागी ।।
अमरूदिया के पात पर उगे लन सुरुजमल झांके झुके, अमरूदिया के पात पर उगे लन सुरुजमल झांके झुके ।।
के करेलू छठ बरतिया से झांके झुके, के करेलू छठ बरतिया से झांके झुके ।।
हम तोहसे पूछी बरतिया ए बरतिया के केकरा लागी, हम तोहसे पूछी बरतिया ए बरतिया के केकरा लागी ।।
के करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी, के करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी ।।
हमरो जे स्वामी तोहन अइसन स्वामी से उनके लागी, हमरो जे स्वामी तोहन अइसन स्वामी से उनके लागी ।।
से करेली छठ बरतिया के उनके लागी, से करेली छठ बरतिया के उनके लागी ।।
नारियर के पात पर उगे लन सुरुजमल झांके झुके, नारियर के पात पर उगे लन सुरुजमल झांके झुके ।।
के करेली छठ बरतिया से झांके झुके, के करेली छठ बरतिया से झांके झुके ।।
हम तोहसे पूछी बरतिया ए बरतिया से केकरा लागी, हम तोहसे पूछी बरतिया ए बरतिया से केकरा लागी ।।
के करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी, के करेलू छठ बरतिया से केकरा लागी ।।
हमरो जे बेटी तोहन बेटिया से उनके लागी, हमरो जे बेटी तोहन बेटिया से उनके लागी ।।
से करेली छठ बरतिया से उनके लागी, से करेली छठ बरतिया से उनके लागी ।।
छठ करने की विधि-
छठ मईया गीत (पहिले पहिल हम कईनी)
छठी मईया व्रत तोहर।
करिहा क्षमा छठी मईया, भूल-चूक गलती हमार,
भूल-चूक गलती हमार।
गोदी के बलकवा के दिहा, छठी मईया ममता-दुलार,
छठी मईया ममता-दुलार।
पिया के सनईहा बनईहा, मैया दिहा सुख सार,
मैया दिहा सुख सार।
नारियल केरवा घवदवा, साजल नदिया किनार,
साजल नदिया किनार।
सुनिहा अरज छठी मैया, बढ़े कुल परिवार,
बढ़े कुल परिवार।
घाट सजवली मनोहर, मैया तोरा भगती अपार,
मैया तोरा भगती अपार।
लिहि ए अरग हे मैया, दिहीं आशीष हजार,
दिहीं आशीष हजार।
पहिले पहिल हम कईनी, छठीमैया बरत तोहर,
छठीमैया व्रत तोहर।
करिहा क्षमा छठी मईया, भूल-चूक गलती हमार
भूल-चूक गलती हमार, भूल-चूक गलती हमार।
क्या छठ पूजा में मांसाहार खाना या बनाना उचित है?
नहीं। छठ पूजा के दिनों में घर में मांसाहार, शराब, प्याज, लहसुन या किसी तामसिक वस्तु का प्रयोग पूर्णतः निषिद्ध है। पूरा वातावरण सात्त्विक और पवित्र बनाए रखना आवश्यक है।
खरना का क्या महत्व है?
नहाय-खाय के दिन क्या खाया जाता है?
कद्दू-भात (लौकी-भात) और चना दाल, जो शुद्ध घी में बना होता है और प्याज-लहसुन रहित होता है।
छठ पूजा में व्रती कौन हो सकता है?
छठ पूजा के चार दिन कौन-कौन से होते हैं?
दूसरा दिन, खरना- निर्जला उपवास और शाम को गुड़ की खीर का प्रसाद।
तीसरा दिन, संध्या अर्घ्य- डूबते सूर्य को अर्घ्य देकर आभार प्रकट किया जाता है।
चौथा दिन, उषा अर्घ्य- उदयमान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का समापन किया जाता है।
