Budhwar Pradosh Vrat Katha: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत की काफी महिमा बताई गई है। कहते हैं इस व्रत को करने से मनुष्य को तमाम सुखों की प्राप्ति होती है। वहीं अगर बुध प्रदोष व्रत की बात करें तो ये व्रत व्यक्ति की सभी मनोकामनाओं को पूर्ण करने वाला व्रत माना दया है। इस व्रत में मनुष्य को हरी वस्तुओं का प्रयोग करना चाहिए। साथ ही इस दिन शिव जी की अराधना धूप, बेल पत्र से करनी चाहिए। यहां देखें बुध प्रदोष व्रत की कथा।
Budh Pradosh Vrat Katha
Budh Pradosh Vrat Katha In Hindi (बुध प्रदोष कथा)
बुध प्रदोष व्रत की कथा के अनुसार एक आदमी का नया-नया विवाह हुआ और विवाह के 2 दिनों बाद ही उसकी पत्नी मायके चली गई थी। कुछ दिनों के बाद वह पुरुष अपनी पत्नी को लेने उसके घर गया। बुधवार को जब वह पत्नी को लेकर लौटने लगा तो ससुराल पक्ष ने उसे रोकने का खूब प्रयत्न किया और उससे कहा कि विदाई के लिए बुधवार शुभ नहीं माना जाता। लेकिन लड़का नहीं माना और पत्नी के साथ बैल गाड़ी से अपने घर के लिए निकल पड़ा।
नगर के बाहर पहुंचने पर उसकी पत्नी को प्यास लगने लगी। पुरुष लोटा लेकर पानी की तलाश में निकल पड़ा। पत्नी एक पेड़ के नीचे बैठ गई। थोड़ी देर में जब पुरुष पानी लेकर वापस लौटा तो उसने देखा कि उसकी पत्नी किसी से हंस-हंसकर बातें कर रही है और उसके लोटे से पानी भी पी रही है। यह देखकर लड़के को क्रोध आ गया।
वह अपनी पत्नी के पास पहुंचा तो उसके आश्चर्य का कोई ठिकाना नहीं रहा, क्योंकि उसकी पत्नी जिस पुरुष से बात कर रही थी वह देखने में उसी की भांति था। पत्नी भी सोच में पड़ गई। दोनों पुरुष आपस में झगड़ने लगे। धीरे धीरे वहां भीड़ एकत्रित हो गई और सिपाही भी आ गए। हमशक्ल आदमियों को देखकर हर कोई आश्चर्य में पड़ गया।
सिपाही ने स्त्री से पूछा- उसका पति कौन है? वह किंकर्तव्यविमूढ़ हो गई। तब पुरुष शंकर भगवान से प्रार्थना करने लगा- हे भगवान! हमारी रक्षा करें। मुझसे बहुत बड़ी भूल हुई है कि मैंने सास-ससुर की बात नहीं मानी और बुधवार के दिन ही अपनी पत्नी को विदा करा लिया। मैं भविष्य में ऐसा कभी नहीं करूंगा।
जैसे ही उसने प्रार्थना की, दूसरा पुरुष अंतर्ध्यान हो गया। इस तरह से पति-पत्नी सकुशल अपने घर पहुंच गए। कहते हैं उस दिन के बाद से पति-पत्नी नियमपूर्वक बुध त्रयोदशी प्रदोष का व्रत रखने लगे। अत: ये व्रत हर मनुष्य को करना चाहिए।
