Ramadan 2022: खत्म हुआ इंतजार, दिख गया रमजान का चांद 3 अप्रैल को रखा जाएगा पहला रोजा
रमजान का पवित्र माह शुरू हो गया है क्योंकि रमजान का चांद भी निकल आया है यानी अब पहला रोजा 3 अप्रैल यानी संडे को रखा जाएगा, लोग चांद के निकलने का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे गौर हो कि इस्लाम का पवित्र माह-ए-रमजान का महीना चांद निकलने के साथ शुरू होता है इस साल 3 अप्रैल से रमजान का पाक महीने शुरू हो रहा है क्योंकि 2 अप्रैल को चांद निकल आया है
रमजान का पवित्र महीना यह इस्लामी कैलेंडर का नौवां माह है, जिसे सबसे ज्यादा पवित्र माह माना जाता है, इसमें 29 से 30 दिन तक रोजा रखा जाता है और इसका समापन ईद-उल-फितर के साथ होता है।रमजान माह में चांद दिखने की अहम भूमिका होती है जिस दिन रात में चांद दिखता है, उसके अगले दिन से रमजान का रोजा रखा जाता है, 2 तारीख को चांद दिख गया है इस हिसाब से अब 3 अप्रैल से पहला रोजा रखा जाएगा।
रमजान के पवित्र माह में दिन में पांच बार पढ़नी होती है नमाज
मुस्लिम रोजे के दौरान दिन में पांच बार नमाज पढ़ते हैं। फज्र की नमाज (सुबह की नमाज) से लेकर इशा (रात की नमाज) की नमाज तक वे दिन भर में पांच बार नमाज पढ़ते हैं।
इस्लाम धर्म में रमजान महीने का बहुत महत्व
पूरे एक माह तक मुस्लिम समाज के लोग रोजा रखते हैं। इस दौरान दिन के समय न कुछ खाया जाता है और न ही पिया जाता है। रमजान के महीने में रोजा रखने के पीछे तर्क दिया जाता है कि इस दौरान व्यक्ति अपनी बुरी आदतों से दूर रहने के साथ ही खुद पर संयम रखने की कोशिश करता है।
रमजान शुरू होने की तारीख हर साल बदलती रहती है
इस्लामिक कैलेंडर चांद के साइकल पर आधारित होता है। ऐसे में किसी भी महीने की शुरुआत या अंत चांद के दिखने पर आधारित होती है, जिस दिन पवित्र रमजान माह के प्रारंभ होने का ऐलान होता है फिर उसके अगले दिन सुबह से रोजा रखा जाता है।
लखनऊ में रमजान का 'चांद' दिखा, 2 अप्रैल रविवार को रखा जाएगा पहला रोजा
सऊदी अरब में 2 अप्रैल से रोजा रख रहे हैं मुस्लिम
सऊदी अरब, यूएई और ऑस्ट्रेलिया सहित कई देशों में रमजान का चांद 1 अप्रैल यानी शुक्रवार को नजर आ चुका है और यहां शनिवार यानी 2 अप्रैल से रमजान शुरू हो गया है और लोग यहां रोजा रखे हैं।
कोरोना के चलते दो साल तक रमजान खुलकर नहीं मनाया गया
लखनऊ ईदगाह के इमाम मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि रमजान पर दो साल बाद हम लोग आजादी की तरह खुशी मनाएंगे लोगों ने कोरोना के चलते दो साल तक रमजान खुलकर नहीं मनाया गया।
इसलिए पूरे एक माह रमजान में रोजा रखा जाता है
रमजान को लेकर इस्लामिक मान्यता है कि इसी पवित्र माह में ही अल्लाह से पैगंबर मोहम्मद साहब को कुरान की पहली आयतें मिली थीं। जिसके कारण ही पूरे एक माह रमजान में रोजा रखा जाता है।
देशभर में सहरी और इफ्तार का समय अलग-अलग
रमजान में सूरज उगने और सूरज ढलने के बाद ही खाना खाया जाता है। सुबह के खाने को सहरी कहा जाता है। वहीं, सूरज ढलने के बाद नमाज पढ़कर रोजा खोला जाता है, जिसे इफ्तार कहा जाता है।
रमजान का महीना चांद निकलने के साथ शुरू होता है
2 अप्रैल को मगरिब (सूरज डूबने का समय) के बाद यदि चांद (Moonrise today time) निकलता है तो तीन अप्रैल से रोजा रखा जाएगा

