Dussehra 2021: दशहरा पर देश भर में रावण दहन, लोगों ने कोरोना के भी जलाए पुतले
आज पूरे भारत में दशहरा का पवित्र पर्व मनाया जा रहा है। दशहरा या विजयदशमी पर सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करना लाभदायक माना गया है। इस दिन विधिपूर्वक सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करने से शत्रु परास्त होते हैं।
आज पूरे भारत में दशहरा यानी विजयदशमी का पर्व धूमधाम से और श्रद्धा-भाव के साथ मनाया जा रहा है। आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर मां दुर्गा ने महिषासुर नामक राक्षस का संहार किया था। इसी दिन भगवान श्रीराम ने लंकापति रावण का वध किया था। दशहरा या विजयदशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना गया है। आज ही के दिन नवरात्रि व्रत का पारण किया जाता है तथा दुर्गा विसर्जन किया जाता है। भारत के विभिन्न प्रांतों में दशहरा का पर्व लोक परंपराओं के साथ मनाया जाता है। दशहरा या विजयदशमी पर भारत के कई प्रांतों में अस्त्र-शास्त्र की पूजा, शमी वृक्ष पूजन और सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित किया जाता है।
दशहरा पर विधिपूर्वक सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करना लाभदायक माना गया है। इस दिन सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित करने से भक्तों को कई लाभ प्राप्त होते हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, यह उपाय करने से साहस में वृद्धि होती है इसके साथ शत्रुओं का विनाश होता है।
देशभर में धूमधाम से मनाई गई विजय दशमी, दशहरा पर हुए रावण दहन
राजधानी दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में हर जगह धूमधाम से विजय दशमी का पर्व मनाया गया। कई जगहों पर रामलीला का आयोजन भी किया गया है। जगह जगह पर रावण दहन भी किया गया, अलग अलग तरह के रावण को बनाकर लोगों ने जलाया, वहीं पटना में तो लोगों ने कोरोना के रावण का पुतला भी जलाया।
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दशहरा 2021 शस्त्र पूजा मुहूर्त
विजय दशमी या दशहरा पर शस्त्र पूजा विजय मुहूर्त में करने का विधान है। विजय दशमी 2021 पर 15 अक्टूबर को यह मुहूर्त दोपहर बाद 02:02 बजे से 02:48 बजे तक है। इसलिए इस शुभ मुहूर्त में आप शस्त्र पूजा कर सकते हैं, इसके अलावा अन्य समय पर भी शस्त्र पूजा की जाती है।
दशहरा 2021 रावण दहन मुहूर्त
आज 16 अक्टूबर को दशहरा पूजा के बाद रावण के साथ-साथ कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों के दहन की परंपरा है। रावण दहन का मुहूर्त शाम को 07 बजकर 26 मिनट से रात में 09 बजकर 22 मिनट तक मौजूद है। इस शुभ मुहूर्त में रावण दहन कीर्ति और यश देने वाला माना गया है।
भगवान राम की भी होती है पूजा
दशहरा के शुभ दिन आध्यात्मिक और मानसिक शक्तियों में वृद्धि के साथ कष्टों के निवारण हेतु मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम की पूजा अर्चना की जाती है। श्रीरामचंद कृपालु भजमन स्तुति के साथ भगवान का इस दिन ध्यान करना चाहिए।
दशहरा 2021 पर पूजा की विधि
सुबह स्नान करने के बाद सर्वप्रथम गाय के गोबर की दस केकड़ियां या कंडे बनाए जाते हैं। इन केकड़ियां पर आटा, हल्दी और रोली का टीका लगाया जाता है। इसके बाद नवरात्रि के दिन बोए जौ को इन केकड़ियां पर लगाया जाता है। धूप दीप कर आप इस तरह परिवार के साथ दशहरे की पूजा कर सकते हैं।
दशहरा पर किसकी होती है पूजा?
दशहरा यानि विजयदशमी के दिन भगवान राम, मां दुर्गा, मां सरस्वती, भगवान गणेश और हनुमान जी की पूजा अर्चना की जाती है। तथा इस दिन शमी के वृक्ष की पूजा भी की जाती है।
दशहरा 2021 पर कैसे करें सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित
दशहरा या विजय दशमी तिथि पर सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करना भक्तों के लिए लाभदायक माना गया है। दशहरा पर यह उपाय करने से साहस में वृद्धि होती है तथा हर काम में सफलता मिलती है। इस दिन जल में अक्षत या रोली डालकर लोटे से सूर्यदेव को अर्घ्य अर्पित करना चाहिए। इसके बाद 'ॐ घृणि सूर्याय नमः' मंत्र का जाप करना चाहिए।
दशहरा 2021 पर कब है रावण दहन का समय, जानें यहां
रावण, कुंभकरण और मेघनाथ के पुतले का दहन करने के साथ मनुष्य अपने अंदर मौजूद अवगुणों का नाश भी करता है और हमेशा सत्य की राह पर चलने का संकल्प लेता है। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, शुभ मुहूर्त में रावण दहन करना चाहिए। आज यानी 15 अक्टूबर, शुक्रवार को रावण दहन के लिए शाम 07:26 से रात 09:22 के बीच की समय अवधि उत्तम है।
दशहरा 2021 पूजा के लिए यहां जानें श्री राम जी की आरती
श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणम्
नवकंज-लोचन, कंज-मुख, कर कंज, पद कंजारुणम्
कंदर्प अगणित अमित छबि, नवनील-नीरद सुंदरम्
पट पीत मानहु तड़ित रुचि शुचि नौमि जनक-सुतानरम्
भजु दीनबंधु दिनेश दानव-दैत्य-वंश-निकंदनम्
रघुनंद आनँदकंद कोशलचंद दशरथ-नंदनम्
सिर मुकुट कुंडल तिलक चारु उदारु अंग विभूषणम्
आजानुभुज शर-चाप-धर, संग्राम-जित-खर-दूषणम्
इति वदति तुलसीदास शंकर-शेष-मुनि-मन रंजनम्
मम् हृदय-कंज-निवास कुरु, कामादि खल-दल-गंजनम्
किस मुहूर्त में करें दशहरा 2021 की पूजा, जानें यहां
हिंदू धर्म शास्त्रों के मुताबिक, विशिष्ट संयोग में दशहरा की पूजा करना लाभदायक माना गया है। आज दशहरा की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त दोपहर 02:02 से 02:48 तक रहने वाला है। दशहरा की पूजा के लिए कुल 46 मिनट की अवधि है। शुभ मुहूर्त में दशहरा की पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा भगवान का आशीर्वाद मिलता है।
क्या है दशहरा पर्व का महत्व, कब है शुभ मुहूर्त, जानें यहां
सनातन धर्म में दशहरा पर्व का विशेष महत्व है। इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना गया है। इस दिन महिषासुरमर्दिनि मां दुर्गा और भगवान श्री राम की पूजा करने से भक्तों को विशेष लाभ मिलता है तथा उनकी सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं। आज, दशहरा के पर्व पर तीन शुभ योग बन रहे हैं। आज दोपहर 02:01 से 02:47 तक विजय मुहूर्त रहने वाला है।
क्या है दशहरा का इतिहास, हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार जानें यहां
हिंदू धर्म शास्त्रों में वर्णित कथाओं के अनुसार, मां सीता को अधर्मी रावण से बचाने के लिए, भगवान श्रीराम ने आश्विन मास के शुक्ल पक्ष में 9 दिनों तक मां दुर्गा की पूजा-आराधना की थी। और दसवें दिन भगवान श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त किया था। इसीलिए दशहरा को विजयदशमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन रावण मेघनाथ और कुंभकरण का पुतला बनाकर जलाया जाता है और बुराई पर अच्छाई की जीत का जश्न मनाया जाता है।
मेष और वृष राशि के जातक आज करें यह उपाय
दशहरा पर विभिन्न राशि के जातकों को विशेष उपाय अवश्य करने चाहिए। मेष राशि के जातक आज के दिन 'ॐ रामभद्राय नमः' मंत्र का जाप करें। इस मंत्र का जाप करने से मेष राशि के जातकों को विभिन्न क्षेत्रों में सफलता मिलेगी। वहीं, वृष राशि के जातक आज अपने खर्च पर ध्यान दें। आज का दिन वृष राशि के जातकों के लिए शुभ होने वाला है। इस दिन वृष राशि के जातकों को आर्थिक लाभ मिल सकता है।
कब करें दशहरे पर शमी के पेड़ की पूजा?
हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार दशहरा पर शमी के पेड़ की पूजा करना लाभदायक माना गया है। इस दिन शमी के पेड़ की पूजा करने से विभिन्न क्षेत्रों में सिद्धि प्राप्त होती है तथा शत्रु परास्त होते हैं। दशहरे पर प्रदोष काल में शमी वृक्ष पूजन किया जाता। शमी वृक्ष पूजन के लिए प्रदोष काल उत्तम माना गया है।
आखिर दशहरा को क्यों कहा जाता है विजय दशमी, जानें यहां
आज पूरे भारत में दशहरा का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस पर्व को विजय दशमी के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि आज के ही दिन श्री राम ने रावण का वध किया था, इसीलिए आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि यानी दशहरा को विजय दशमी के नाम से भी जाना जाता है।
दशहरा का मंत्र
दशहरे पूजन में इस मंत्र का जाप करें -
राम रामाय नम:- ॐ अपराजितायै नमः- पवन तनय बल पवन समाना, बुद्धि विवेक विज्ञान निधाना ।
कवन सो काज कठिन जग माहि, जो नहीं होत तात तुम पाहि ॥
नीलकंठ के करें दर्शन
विजय दशमी तिथि पर नीलकंठ पक्षी का दर्शन करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस पक्षी को देखने से साक्षात भोलेनाथ के दर्शन व आशीर्वाद मिलता है।
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मकर राशि में तीन ग्रह
पंचांग के अनुसार, आज यानी दशहरा 2021 दिन चंद्रमा का गोचर मकर राशि में रहेगा। वैसे मकर राशि में तीन ग्रहों की युति बन रही है. इस दिन गुरु, शनि और चंद्रमा एक साथ मकर राशि में रहेंगे जिसे ज्योतिष शास्त्री अनूठा संयोग मान रहे हैं।
देता है ये संदेश
दशहरे का पर्व हमें दस प्रकार के पापों काम, क्रोध, मोह, मद, अहंकार, हिंसा और चोरी से बचने का संदेश देता है। साथ ही ये सकारात्मकता का संदेश भी देता है।
दशहरे की शुभकामनाएं
दशहरा पर करें यह उपाय, नहीं होगी कभी धन की कमी
घर की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए दशहरा के दिन विधिपूर्वक सूरजमुखी के जड़ की पूजा करें। सूरजमुखी के जड़ की पूजा करने के बाद इसे अपने घर की तिजोरी में संभाल कर रख दें। मान्यताओं के अनुसार, दशहरा पर यह उपाय करने से कभी भी धन की कमी नहीं होती है।
इस वर्ष विजय दशमी पर बन रहे हैं यह तीन शुभ योग
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष दशहरा 15 अक्टूबर के दिन मनाया जाएगा। इस दिन श्रवण नक्षत्र में सर्वार्थसिद्धि योग, अभिजीत मुहूर्त और विजयी मुहूर्त हैं जो बहुत शुभ माने जाते हैं। इस मुहूर्त में दशहरा की पूजा करना लाभदायक माना गया है।
दशहरा पर कैसे करें शमी वृक्ष का पूजन?
दशहरा पर प्रदोष काल में शमी के पेड़ के पास जाकर प्रणाम करें, फिर शमी के पेड़ में गंगाजल अर्पित करें। इसके पश्चात दीपक जलाएं और पेड़ के नीचे सांकेतिक शस्त्र रखें। अब धूप, नैवेद्य और दीप से पंचोपचार व षोडशोपचार पूजा करें। अंत में प्रार्थना करने के बाद यह मंत्र पढ़ें।
शमी शम्यते पापम् शमी शत्रुविनाशिनी।
अर्जुनस्य धनुर्धारी रामस्य प्रियदर्शिनी।।
करिष्यमाणयात्राया यथाकालम् सुखम् मया।
तत्रनिर्विघ्नकर्त्रीत्वं भव श्रीरामपूजिता।।
दशहरा पर क्यों नहीं करना चाहिए स्त्री व बुजुर्ग का अपमान और जीव जंतु का नुकसान?
सनातन धर्म में दशहरा तिथि बेहद महत्वपूर्ण मानी गई है इस दिन लोगों को स्त्री और बड़े-बुजुर्गों का सम्मान करना चाहिए। दशहरा पर स्त्री या बड़े-बुजुर्गों का अपमान करने से बचना चाहिए, ऐसा इसलिए क्योंकि जो व्यक्ति स्त्री या बड़े-बुजुर्गों का अपमान करता है उससे मां लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं। दशहरा या विजय दशमी तिथि पर जानवरों का नुकसान भी नहीं करना चाहिए। मान्यताओं के अनुसार, जो इंसान जीव-जंतु को नुकसान पहुंचाता है उसका भाग्य नष्ट हो जाता है।
दशहरा पर क्यों पेड़ काटना माना गया है वर्जित?
हिंदू धर्म शास्त्रों के मुताबिक, दशहरा पर कुछ कार्य वर्जित हैं। पेड़ और पौधे मानव स्वास्थ्य के लिए अहम भूमिका निभाते हैं। हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, दशहरा पर पेड़ काटना अशुभ है। ऐसी मान्यता है कि, दशहरा पर पेड़ काटने से व्यक्ति का स्वास्थ्य खराब हो जाता है।
दशहरा पर क्यों खाया जाता है पान? यहां जानें क्या है इसकी वजह
दशहरा पर रावण दहन के बाद पान का बीड़ा खाने की परंपरा है। इस पौराणिक परंपरा को असत्य पर सत्य की जीत से जोड़ा जाता है। पान का बीड़ा खाने से पहले इसे हनुमानजी को अर्पित किया जाता है। दरअसल, दशहरा के पर्व के बाद से संक्रामक बीमारियां बढ़ जाती हैं और पान स्वास्थ्य के लिए उत्तम माना गया है, इसीलिए इस दिन पान खाया जाता है। यह भी कहा जाता है कि नवरात्रि का व्रत रखने से पाचन शक्ति पर प्रभाव पड़ता है इस परिस्थिति में पान का सेवन करने से सेवन किए गए पदार्थों का पाचन अच्छी तरह से होता है।
दशहरा पर कैसे करें मां लक्ष्मी को प्रसन्न?
दशहरा या विजय दशमी पर घर के ईशान कोण में अष्टकमल बनाना चाहिए। इस दिन ईशान कोण में लाल रंग के फूल, कुमकुम या रोली से रंगोली भी बनानी चाहिए। यह उपाय करने से मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है तथा घर में सुख-समृद्धि और शांति का आगमन होता है।
भाग्योदय के लिए दशहरा पर करें यह उपाय
भाग्योदय के लिए दशहरा पर किसी सुनसान जगह पर फिटकरी ले जाएं और अपने ऊपर सात बार उबारकर कर अपने पीछे की दिशा में फेंक दें। फेंकने के बाद सीधा अपने घर आ जाएं और मंदिर में दिया जलाएं। याद रहे फिटकरी फेंकने के बाद पीछे मुड़कर ना देखें। इस बात का भी ध्यान रखें कि यह उपाय करते समय आप अकेले रहें और कोई भी आपको ना देखे।
दशहरे पर मां दुर्गा, भगवान राम तथा अस्त्र-शस्त्र की पूजा का महत्व
सनातन धर्म में दशहरा तिथि बेहद महत्वपूर्ण मानी गई है। इस दिन भगवान श्रीराम तथा महिषासुर मर्दिनि मां दुर्गा की पूजा करने से अद्भुत लाभ की प्राप्ति होती है। मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा की पूजा करने से कष्ट, दरिद्रता एवं कठिनाइयां दूर हो जाती हैं। इस दिन श्री राम की पूजा करने से धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। अस्त्र-शस्त्र की पूजा करना भी फायदेमंद माना गया है। दशहरा पर पूजा करने से नवग्रह भी नियंत्रित रहते हैं।
नौकरी में उन्नति पाने के लिए दशहरा पर करें यह उपाय
नौकरी में उन्नति पाने के लिए दशहरा पर 'ॐ विजयायै नमः' मंत्र का जाप करें। इसके पश्चात 10 फल चढ़ाकर सब में बांटें। यह उपाय करने से नौकरी या व्यापार में आ रही मुसीबतें दूर हो जाती हैं तथा धन संबंधित समस्याओं से भी छुटकारा मिलता है।
हनुमानजी के सामने जलाएं तेल का दिया
विजयादशमी के दिन शाम को नकारात्मक दुष्प्रभाव को खत्म करने के लिए दक्षिण दिशा में मुंह करके हनुमानजी के सामने तिल के तेल का दिया जलाएं और सुंदरकांड का उच्च स्वर में पाठ करें।
क्या संदेश देता है ये पर्व
विजयदशमी का पर्व असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है। इस दिन भगवान राम की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सकारात्मकता का प्रसार होता है। यह पर्व हमें दस प्रकार के पापों काम, क्रोध, मोह, मद, अहंकार, हिंसा और चोरी से बचने का संदेश देता है। तथा इस दिन रावण का पुतला दहन करने से व्यक्ति के समस्त पापों का नाश होता है। वहीं इस दिन शस्त्र पूजन का भी विधान है, लोग अस्त्र शस्त्र की पूजा कर विजय की कामना करते हैं। आइए जानते हैं विजयदशमी की पौराणिक कथा के बारे में।
गायत्री मंत्र का 108 बार करें जप
विजयादशमी यानि दशहरा के दिन गायत्री मंत्र का 108 बार जाप करना शुरू करते हैं, तो बुद्धि-शुद्धि एवं निर्मल होगी। इससे मनुष्य का ह्रदय बल एवं आत्मबल भी बढ़ता है और उसे सभी समष्याओं का सामना करने का सामर्थ्य मिलता है।
दशहरा पर जरूर करें ये काम
इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार भी किया था, इसलिए भी इसे विजय दशमी के रूप में मनाया जाता है। विजय दशमी के दिन अपने अस्त्र-शस्त्र की साफ-सफाई कर उसका निरीक्षण करें. इन अस्त्र-शस्त्रों का पूजन भी करें।
दशहरे का महत्व
सनातन हिंदू धर्म में विजयदशमी का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान राम की पूजा अर्चना करने से सभी कष्टों का नाश होता है और विशेष फल की प्राप्ति होती है। तथा रावण का पुतला दहन करने से सभी अवगुणों का नाश होता है। इस दिन मां भगवती की मूर्ती का विसर्जन भी किया जाता है। साथ ही विजयदशमी के दिन शस्त्र पूजन का भी विधान है, मान्यता है कि इस दिन शस्त्र पूजन से आपके अस्त्र शस्त्रों से किसी को नुकसान नहीं पहुंचता है।
पूजा का शुभ मुहूर्त
पूजा का शुभ मुहूर्त 15 अक्टूबर 2021, शुक्रवार को दोपहर 02 बजकर 02 मिनट से दोपहर 02 बजकर 48 मिनट तक है। इस दौरान मां भगवती और भगवान राम की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और कष्टों का निवारण होता है।
दशहरा 2021 का शुभ मुहूर्त, Vijayadashmi 2021 Puja Muhurat
नौ दिनों की नवरात्रि की समाप्ति के साथ 14 अक्टूबर 2021, बृहस्पतिवार को शाम 06 बजकर 52 मिनट से दशमी तिथि की शुरुआत होगी और इसका समापन 15 अक्टूबर 2021, शुक्रवार को शाम 06 बजकर 02 मिनट पर होगा।
भगवान राम ने किया था रावण का वध
आश्विन मास की शुक्ल पक्ष को मनाया जाने वाला दशहरा या विजयादशमी का यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व है। इसी दिन भगवान राम ने लंका के राजा रावण का वध किया था।


