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Ahoi Ashtami 2021: धूमधाम से मनाई गई अहोई अष्‍टमी, विधि-विधान से पूजा कर मांगा संतान सुख का आशीर्वाद

Ahoi Ashtami 2021: अहोई अष्टमी का व्रत संतान की सुरक्षा और लंबी आयु के लिए रखा जाता है। माताएं अपनी संतान के लिए यह व्रत करती हैं। इस दिन विधि-विधान के साथ अहोई माता की पूजा-अर्चना कर संतान के सुख की प्रार्थना की जाती है। अहोई अष्टमी का व्रत रखने से संतान के सभी संकट दूर होते हैं।

टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटलटाइम्स नाउ नवभारत डिजिटलUpdated Oct 29, 2021, 12:49 IST
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Ahoi Ashtami 2021: धूमधाम से मनाई गई अहोई अष्‍टमी, विधि-विधान से पूजा कर मांगा संतान सुख का आशीर्वाद
Photo Credit: Times Now

Ahoi Ashtami 2021: अहोई अष्टमी का व्रत संतान की सुरक्षा और लंबी आयु के लिए रखा जाता है। इस दिन मांए देवी पार्वती की आराधना कर संतान की रक्षा के लिए प्रार्थना करती हैं। माना जाता है कि इस व्रत को करने से देवी पार्वती गणपति और कार्तिकेय के समान उनकी संतान की भी रक्षा करती हैं। माता अहोई देवी पार्वती का स्वरूप मानी गई हैं। साथ ही जिन महिलाओं की गोद खाली होती है वह भी इस व्रत को करती हैं, ताकि उन्हें भी संतान की प्राप्ति हो सके।

माताएं अपनी संतान के लिए यह व्रत करती हैं, इसलिए जिवितपुत्रिका की तरह ही इस व्रत का भी बहुत महत्व माना गया है। इस दिन विधि-विधान के साथ अहोई माता की पूजा-अर्चना कर संतान के सुख की प्रार्थना की जाती है। अहोई अष्टमी का व्रत रखने से संतान के सभी संकट दूर होते हैं। 

OCT 28, 2021 21:19 IST

गेंहू के सात दाने लेकर सुने कथा

अहोई अष्टमी के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान कर देवी का स्मरण कर व्रत का संकल्प लिया जाता है। इसके बाद अहोई माता की पूजा के लिए दीवार या कागज पर गेरू से अहोई माता और उनके सात पुत्रों का चित्र बनाया जाता है। शाम के समय पूजन के लिए अहोई माता के चित्र के सामने एक चौकी रखकर उस पर जल से भरा कलश रख दें और माता को रोली व चावल अर्पित कर उनका सोलह श्रृंगार करें। इसके बाद मीठे पुए या आटे का हल्वे का प्रसाद चढ़ाएं। कलश पर स्वास्तिक बना कर हाथ में गेंहू के सात दाने लेकर अहोई माता की कथा सुनें। 

OCT 28, 2021 20:03 IST

अष्टमी के दिन क्या करना अशुभ

अहोई अष्टमी (Ahoi Ashtami) के व्रत के दिन महिलाओं को मिट्टी से जुड़ा कोई काम नहीं करना चाहिए, इसके अलावा भूलकर भी खुरपी का इस्तेमाल नहीं करें। अहोई अष्टमी के दिन ऐसा करना अशुभ होता है।

OCT 28, 2021 19:12 IST

अहोई से लेकर दिवाली तक पहनते हैं स्याहु की माला

अहोई अष्टमी की पूजा के लिए चांदी की अहोई बनाई जाती है, जिसे स्याहु भी कहते हैं। पूजा के समय इस माला कि रोली, अक्षत से इसकी पूजा की जाती है, इसके बाद एक कलावा लेकर उसमे स्याहु का लॉकेट और चांदी के दाने डालकर माला बनाई जाती है। व्रत करने वाली माताएं इस माला को अपने गले में अहोई से लेकर दिवाली तक धारण करती हैं।

OCT 28, 2021 18:08 IST

अहोई पहनने का सही तरीका

अहोई अष्टमी के दिन अहोई माता की पूजा करें और करवा में जल भरकर रखें। अहोई माता की कथा सुनें और स्याहु माता के लॉकेट की पूजा करें। उसके बाद संतान को पास में बैठाकर माला बनाएं। इस मौले को मौली के धागों की मदद से तैयार करें। माला बनाने के लिए किसी प्रकार की सूई या पिन का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। संतान का तिलक करें और माला धारण करें।
 

OCT 28, 2021 17:28 IST

संध्या काल में पढ़ते हैं अहोई कथा

संध्या के समय अहोई माता की कथा सुनने के बाद तारे को अर्घ्य देकर पूजा पूर्ण होती है। पूजा के बाद महिलाएं चांदी की बनी स्याहु की माला पहनती हैं।

OCT 28, 2021 16:38 IST

अहोई अष्टमी व्रत कथा

एक समय की बात है। एक नगर में एक साहूकार रहता था। उसके सात बेटे थे। सातों की शादी हो चुकी थी। एक बार दीपावली के कुछ दिन पहले उसकी बेटी अपनी भाभियों के संग घर की लिपाई के लिए जंगल से मिट्टी लाने के लिए गई। जंगल से मिट्टी खोदते वक्त गलती से खुरपी स्याहू के बच्चे पर लग गई जिससे उसकी मौत हो गई। इस घटना को देखकर स्याहू की माता बहुत दुखी हुई और उसने साहूकार की बेटी को कभी भी मां न बनने का श्राप दे दिया। इस श्राप के प्रभाव से साहूकार की बेटी को के घर किसी भी संतान का जन्म नहीं हुआ। इस वजह से साहूकार की बेटी बहुत दुखी रहने लगी। एक बार उसने अपनी भाभियों से कहा कि आप में से कोई एक भाभी अपनी कोख बांध लें। अपनी ननद की यह बात सुनकर सबसे छोटी भाभी तैयार हो गई। श्राप के प्रभाव के कारण जब भी वह कोई बच्चे को जन्म देती वह 7 दिन बाद मर जाता था। यह देखकर साहूकार की बेटी अपनी इस समस्या को लेकर एक पंडित से के पास गई। पंडित ने साहूकार की बेटी की सारी व्यथा सुनी और उन्होंने सुरही गाय की सेवा करने को कहा। 

यह बात सुनकर साहूकार की बेटी सुरही गाय की सेवा करनी शुरू कर दी। उसकी सेवा को देखकर गाय बहुत प्रसन्न हुई और एक दिन साहूकार की बेटी को स्याहू के माता के पास ले गई। रास्ते में जाते वक्त उसे गरुड़ पक्षी के बच्चे दिखे जिसे सांप मारने वाला था। जैसे ही सांप बच्चे को मारने की कोशिश की साहूकार की बेटी ने सांप को मारकर गरुड़ पक्षी के बच्चे को बचा लिया। उसी समय गरुड़ पक्षी की मां वहां आई और वह देखकर बहुत प्रसन्न हुई। तब वह उसे स्याहू की माता के पास ले गई। स्याहू की माता उसके उपकार को सुनकर बहुत प्रसन्न हुई और उसने उसे सात संतान की माता होने का आशीर्वाद दिया। उनके आशीर्वाद से उसके कोख से 7 पुत्र ने जन्म लिया। इस तरह से उसका परिवार भरापूरा हो गया और वह सुखी जीवन व्यतीत करने लगी। इसलिए अहोई अष्टमी को माता अहोई की कथा जरूर सुनें।

OCT 28, 2021 15:48 IST

व्रत की कथा सुनने से ही संपूर्ण फल की प्राप्ति

महिलाएं कार्तिक मास में कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई माता का व्रत करती हैं। इस दिन सभी माताएं अहोई माता की पूजा अर्चना प्रदोष काल में निर्जला रहकर करती हैं। ऐसी मान्यता है, कि इस दिन यदि माताएं श्रद्धा पूर्वक अहोई माता की पूजा करें, तो माता प्रसन्न होकर उनके पुत्र की दीर्घायु कर देती हैं। शास्त्र के अनुसार इस पूजा में माता की कथा सुनना या पढ़ना बेहद लाभदायक होता हैं। ऐसा कहा जाता है इस व्रत की कथा सुनने से ही संपूर्ण फल की प्राप्ति हो जाती है। 

OCT 28, 2021 14:34 IST

क्यों पहनी जाती है स्याहु माला

अहोई अष्टमी पर संतान की लंबी आयु के लिए व्रत रखा जाता है। कार्तिक मास में आने वाली अष्टमी पर संतान की रक्षा और उनकी मंगलकामना के निमित्त माताएं निर्जला व्रत रखती हैं। इस दिन अहोई देवी की पूजा की जाती है। व्रत पूजा के साथ एक खास चीज इस पूजा में बकहुत मायने रखती है वह है स्याहु। स्याहु संतान की संख्या के आधार पर बनता है और उसे मौली में देवी अहोई की लॉकेट के साथ माताएं धारण करती हैं।

स्याहु चांदी से बनता है। अष्टमी के दिन स्याहु की पूजा रोली, अक्षत, दूध व पके हुए चावल से की जाती है। पूजा के बाद माताएं इसे अपने गले में पहनती हैं। इस माला को अष्टमी के दिन धारण करने के बाद दिवाली तक लगातार पहने रहना होता है। दिवाली वाले दिन जब अहोई अष्टमी के दिन जल भरे करवा से ही संतान जब स्नान कर लेती है तब माताएं स्याहु को निकला कर सुरक्षित रख देती हैं।

OCT 28, 2021 14:34 IST

जानें स्‍याहु माला का रहस्‍य

अहोई अष्टमी के दिन माताएं अपने गले में स्याहु की माला भी धारण करती हैं। इस स्याहु माला के पीछे एक रहस्य छुपा होता है। स्याहु की माला में चांदी के दाने और अहोई मईया की लॉकेट होती है। ये चांदी के दाने संतान की संख्या के अनुसार एक दो या उससे अधिक बनाई जाती है।  

OCT 28, 2021 13:55 IST

दोपहर को सोने से करें परहेज

अहोई अष्टमी का व्रत करने वाले को दोपहर में सोने से परहेज करना चाहिए। साथ ही इस दिन मिट्टी को हाथ न लगाएं, न कोई पौधा उखाड़ें नहीं।  

OCT 28, 2021 13:34 IST

गाय को खिलाएं अनाज

अहोई अष्‍टमी की व्रत कथा सुनते वक्‍त अपने हाथ में सात तरह के अनाज रखें। पूजा करने के बाद यह अनाज गाय को खिला दें। 

OCT 28, 2021 13:04 IST

सफेद पुष्‍प अर्पित करने के लाभ

संतान की जल्द तरक्की के लिए अहोई माता को सफेद फूलों की माला अर्पित करें। माता को हलुआ और पूड़ी बनाकर अर्पित करें। 

OCT 28, 2021 12:59 IST

माता को अर्पित करें लाल पुष्‍प

बच्चे को क्रोध अधिक आता है तो अहोई अष्टमी के दिन अहोई माता को लाल पुष्प और चावलों को लाल रंग से रंगकर अर्पित करें। 

OCT 28, 2021 11:55 IST

शाम को तारों को दें अर्घ्य

अहोई अष्टमी की शुरुआत सूर्योदय से पहले हो चुकी है। आज  माताएं संतान की उन्नति, सुख-समृद्धि और लंबी उम्र के लिए निर्जला उपवास रख रहीं हैं। शाम को तारों को अर्घ्य देकर इस व्रत का पारण करेंगी।

OCT 28, 2021 08:40 IST

इन रंगों के कपड़े नहीं पहनें महिलाएं

अहोई अष्टमी की पूजा शुरू करने से पहले गणेश जी की पूजा करना का विशेष महत्व है! इसके अलावा महिलाएं गहरे नीले या काले रंग के कपड़े नहीं पहनें। अहोई अष्टमी पर अर्घ्य के लिए कांसे के लोटे का इस्तेमाल नहीं करें। 

OCT 28, 2021 07:57 IST

अहोई अष्टमी पर इस बार होगा गुरु-पुष्य योग

अहोई अष्टमी व्रत (Ahoi Ashtami Vrat) के दिन गुरू पुष्य योग (Guru Pushya Yog) की उपस्थिति होने के कारण अहोई अष्टमी व्रत का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। 

OCT 28, 2021 07:04 IST

अहोई अष्‍टमी की आरती

अहोई माता की आरती

जय अहोई माता, जय अहोई माता।
तुमको निसदिन ध्यावतहर विष्णु विधाता॥
     ॥ जय अहोई माता॥

ब्रह्माणी, रुद्राणी, कमलातू ही है जगमाता।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावतनारद ऋषि गाता॥
     ॥ जय अहोई माता॥

माता रूप निरंजनसुख-सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावतनित मंगल पाता॥
      ॥ जय अहोई माता॥

तू ही पाताल बसंती, तू ही है शुभदाता।
कर्म-प्रभाव प्रकाशकजगनिधि से त्राता॥
      ॥ जय अहोई माता॥

जिस घर थारो वासावाहि में गुण आता।
कर न सके सोई कर लेमन नहीं धड़काता॥
       ॥ जय अहोई माता॥

तुम बिन सुख न होवेन कोई पुत्र पाता।
खान-पान का वैभवतुम बिन नहीं आता॥
     ॥ जय अहोई माता॥

शुभ गुण सुंदर युक्ताक्षीर निधि जाता।
रतन चतुर्दश तोकूकोई नहीं पात॥
     ॥ जय अहोई माता॥

श्री अहोई माँ की आरतीजो कोई गाता।
उर उमंग अति उपजेपाप उतर जाता॥
जय अहोई माता, जय अहोई माता।

OCT 28, 2021 06:14 IST

आज सूर्योदय-सूर्यास्त और चंद्रोदय-चंद्रास्त का समय

सूर्योदय का समय : 06:30 AM
सूर्यास्त का समय : 05:40 PM
चंद्रोदय का समय: 05:39 PM
चंद्रास्त का समय : 01:01 PM

OCT 28, 2021 06:13 IST

अहोई अष्टमी के व्रत का शुभ मुहूर्त (Ahoi Ashtami 2021 Shubh Muhurat)

अष्टमी तिथि प्रारंभ: 28 अक्टूबर 2021 गुरुवार, 12:49PM से

अष्टमी तिथि समाप्ति: 29 अक्टूबर 2021 शुक्रवार, 2:09 PM तक

अहोई अष्टमी 2021 शुभ पूजा मुहूर्त: 28 अक्टूबर 2021, गुरुवार, समय: 05:39 PM से 06:56 तक

OCT 27, 2021 23:34 IST

बच्चे को आता है गुस्सा, करें ये उपाय

बच्चे को अगर गुस्सा ज्यादा आता है तो अहोई अष्टमी के दिन अहोई माता को लाल फूल और चावल को लाल रंग से रंगरकर अर्पित करें। इसे लाल रंग के कपड़े में बांधकर बच्चे के कमरे में रख दें। बच्चे का गुस्सा खत्म हो जाएगा।
 

OCT 27, 2021 21:57 IST

पारण में न करें सफेद चीजों का सेवन 

अहोई अष्टमी के व्रत के पारण में सफेद चीज जैसे चावल, दूध, दही आदि का सेवन न करें। इसके अलावा दिन के वक्त भूलकर भी न सोएं। इससे व्रत का फल नहीं मिलेगा

OCT 27, 2021 20:19 IST

जानिए क्यों किया जाता है गणेश पूजन 

अहोई अष्टमी के दिन गणेश जी की पूजा की जाती है। दरअसल भगवान गणेश सभी देवी-देवताओं में पूजनीय हैं। इसलिए अहोई अष्टमी के दिन पहले गणेश जी का पूजन किया जाना चाहिए।

OCT 27, 2021 20:18 IST

द्वापर युग से चली आ रही है ये प्रथा

अहोई अष्टमी में संतान प्राप्ति के लिए राधा कुंड पर स्नान का विशेष महत्व है। राधा कुंड मथुरा पर स्थित है। कुंड में एक विशेष मुहूर्त पर ही स्नान किया जाता है। राधा कुंड में स्नान करने की प्रथा द्वापर युग से चलती आ रही है। 
 

OCT 27, 2021 19:13 IST

दिव्य स्नान का शुभ मुहूर्त

राधा कुंड में दिव्य स्नान का पहला शुभ मुहूर्त शाम 6.38 बजे और 8.33 बजे तक है। वहीं, दूसरा शुभ मुहूर्त देर रात 1 बजकर 9 मिनट से लेकर रात 3 बजकर 23 मिनट तक है। 

OCT 27, 2021 18:33 IST

मिलेगा ज्यादा पुण्य

अहोई अष्टमी गुरुवार को है। गुरुवार को गुरु पुष्य नक्षत्र योग होने से अत्यधिक लाभ मिलता है। इस बार अहोई व्रत करने वाली माताओं को कई गुना ज्यादा फल मिलता है।

OCT 27, 2021 16:50 IST

बन रहे हैं एक साथ तीन शुभ योग

अहोई अष्टमी में तीन विशेष योग बन रहे हैं। ये हैं सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग और गुरु पुष्य योग। पुष्य नक्षत्र को सभी नक्षत्रों का राजा माना जाता है।

OCT 27, 2021 16:23 IST

माला पहनने की सही विधी

स्याहु माता के लॉकेट की पूजा करें, उसके बाद संतान को पास में बैठाकर माला बनाएं। माला मौली के धागों की मदद से तैयार की जाती है। माला बनाने के लिए सूई या पिन का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। संतान का तिलक करने के बाद ही माला को धारण करें।

OCT 27, 2021 15:35 IST

दिवाली तक पहनते हैं स्याहु की माला

अहोई अष्टमी की पूजा के लिए चांदी की अहोई बनाई जाती है। इसे स्याहु भी कहते हैं। इस माला की रोली, अक्षत से पूजा होती है। इसके बाद एक कलावा लेकर उसमे स्याहु का लॉकेट और चांदी के दाने डालकर माला बनाई जाती है। व्रती माताएं माला को अपने गले में अहोई से लेकर दिवाली तक धारण करती हैं।

OCT 27, 2021 14:41 IST

अहोई पर आठ कोष्ठक वाली पुतली की होती है पूजा

आठ कोष्ठक वाली एक पुतली बनाकर अहोई माता का चित्रांकन किया जाता है। कोष्ठक के आसपास साही और उसके बच्चों की आकृति बनायी जाती है। होई को आमतौर पर गेरू से बनाकर दीवार पर टांगा जाता है या फिर मोटे कपड़े पर कढ़ाई करके होई की आकृति निर्मित की जाती है और इसे दीवार पर लटका दिया जाता है। अहोई अष्टमी के दिन व्रत रखकर अहोई माता की पूजा की जाती है। इस दिन चंद्रमा दूसरे नक्षत्र में चला जाता है और अलग अलग राशियों पर प्रभाव डालता है इसलिए व्रत रखने वाली महिलाओं को अपनी राशि के अनुसार ही अलग अलग तरीके से पूजा करनी चाहिए।
 

OCT 27, 2021 14:21 IST

अहोई अष्टमी के दिन राधा कृष्ण कुंड में स्नान करने से भर जाती है सूनी गोद

माना जाता है कि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी यानि अहोई अष्टमी की मध्य रात्रि राधा कृष्ण कुंड में स्नान करने से सूनी गोद भर जाती है। मान्यता है कि अहोई अष्टमी के दिन ही इन कुंडों का निर्माण किया गया था इसलिए अहोई अष्टमी पर राधा कृष्ण कुंड में स्नान करने का विशेष महत्व है। इस दिन यहां स्नान करने के लिए भारी संख्या में लोग आते हैं।

OCT 27, 2021 13:22 IST

अहोई अष्टमी व्रत कथा

प्राचीन समय में एक साहूकार था। उसकी सात बहुएं थी। दीवाली के दिन उसकी इकलौती पुत्री अपने मायके आयी। जब उसकी सभी भाभियां घर की लिपाई करने के लिए मिट्टी लेने जंगल जा रही थीं तब वह भी उनके साथ गई। साहूकार की पुत्री जिस स्थान से मिट्टी काट रही थी, वहीं पर साही का बेटा खेल रहा था। गलती से खुरपी लगने के कारण साही का बेटा मर गया। जब साही को यह बात पता चली तो उसने क्रोधित होकर साहूकार की बेटी को संतान ना होने का श्राप दिया। तब साहूकार की बेटी ने अपने भाइयों से यह श्राप अपने ऊपर लेने के लिए कहा। उसकी छोटी भाभी यह श्राप लेने के लिए तैयार हो गयी।

उसे कोई बच्चा पैदा होता तो सात दिन में ही मर जाता। इस तरह उसके सात पुत्रों की मौत हो गयी। तब उसे एक पंडित ने बताया कि सुरही गाय की सेवा करने से वह पाप मुक्त हो सकती है। अपनी सेवा से सुरही गाय प्रसन्न हुई और उसे एक स्याहु के पास लेकर गयी। रास्ते में दोनों पानी पीने के लिए रुकी थीं तभी छोटी बहू की नजर गरुड़ पंखनी पर पड़ी जिसे सांप डसने जा रहा था। छोटी बहू ने सांप को मारकर गरुड़ पंखनी की रक्षा की। यह देखकर गरुड़ पंखनी की मां प्रसन्न हुई और छोटी बहू को श्राप से मुक्त करके सात संतानों की प्राप्ति का वरदान दिया। उस दिन अष्टमी थी तभी से अहोई अष्टमी का व्रत पुत्र के लिए किया जाता है। यह व्रत प्राचीन काल से ही प्रचलित है। जिस तरह साहूकार की छोटी बहू को सुंदर पुत्रों की प्राप्ति हुई, उसी तरह महिलाएं भी अहोई अष्टमी का व्रत रखकर सुंदर संतान की प्राप्ति के साथ ही उसके सुख समृद्धि की कामना करती हैं।

OCT 27, 2021 12:53 IST

अहोई माता की पूजा में ना करें ये गलतियां 

1. पूजा की शुरुआत हमेशा गणेश जी की पूजा से करनी चाहिये। ऐसा इसलिये क्‍योंकि उन्‍हें प्रथम पूजनीय माना गया है। 
2. इस व्रत को बिना कुछ खाए और पिये रखा जाता है। ऐसा करने से आपकी संतान हमेशा सुखी रहेगी। 
3. अहोई अष्टमी के दिन अपने सास - ससुर के लिए बायना जरूर निकालें। यदि सास-ससुर न हों तो इसे किसी बुजुर्ग को भी दे सकते हैं। 
4. व्रत कथा सुनते वक्‍त हाथों में 7 प्रकार के अलाज पकड़ें। पूजा खत्‍म होने के बाद इन्‍हें किसी गाय को खिलाएं। 
5. अहोई अष्टमी के दिन पूजा करते समय अपने बच्चों को अपने पास बैठाएं और अहोई माता को भोग लगाने के बाद वह प्रसाद अपने बच्चों को खिलाएं। 
6. इस दिन पेड़ पौधों को नहीं उखाड़ना चाहिये। 

OCT 27, 2021 12:31 IST

व्रत से एक दिन पहले करें ये काम

व्रत के एक दिन पहले से ही व्रत के नियमों का पालन शुरू हो जाता है। व्रत की पूर्व संध्या पर सात्विक भोजन करने के बाद महिलाएं रात 12 बजे के बाद से कुछ भी नहीं खाती हैं। अहोई अष्टमी का व्रत रखने से पहले जानें अहोई की पूजा विधि और इसका महत्व।

OCT 27, 2021 12:22 IST

देवी पार्वती का स्वरूप हैं माता अहोई (ahoi mata kaun hai)

अहोई का मतलब होता है अनहोनी को टालने वाला। संतान के लिए रखे जाने वाले इस व्रत की कामना भी यही होती है कि हर अनहोनी संतान से दूर रहे। माता अहोई देवी पार्वती का स्वरूप मानी गई हैं। इस दिन मांए देवी पार्वती की आराधना कर संतान की रक्षा के लिए प्रार्थना करती हैं।

OCT 27, 2021 12:21 IST

अहोई अष्टमी व्रत का महत्व (Ahoi Ashtami Vart ke mahatva)

अहोई अष्टमी पर माताएं अपने बच्चों की लंबी उम्र के लिए यह व्रत करती हैं। माना जाता है कि इस व्रत को करने से देवी पार्वती गणपति और कार्तिकेय के समान उनकी संतान की भी रक्षा करती हैं। साथ ही जिन महिलाओं की गोद खाली होती है वह भी इस व्रत को करती हैं, ताकि उन्हें भी संतान की प्राप्ति हो सके। यह व्रत निर्जला रखा जाता है।

OCT 27, 2021 12:21 IST

अहोई अष्टमी की पूजा करें ऐसे (Ahoi Ashtami Puja)

अहोई अष्टमी के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान कर लें और उसके बाद देवी का स्मरण कर व्रत का संकल्प लें। इसके बाद अहोई माता की पूजा के लिए दीवार पर या कागज पर गेरू से अहोई माता का चित्र बनाएं और साथ ही देवी के सात पुत्र भी इस चित्र में जरूर बनाएं। अहोई अष्टमी की पूजा विशेषकर शाम के समय ही होती है। इसलिए शाम के समय पूजन के लिए अहोई माता के चित्र के सामने एक चौकी रखकर उस पर जल से भरा कलश रख दें और देवी को रोली-चावल अर्पित कर उनका सोलह श्रृंगार करें। इसके बाद मीठे पुए या आटे का हलले का प्रसाद भोग लगाएं। कलश पर स्वास्तिक बना कर हाथ में गेंहू के सात दाने लेकर अहोई माता की कथा सुननी चाहिए। इसके बाद तारों को अर्घ्य देकर व्रत संपन्न किया जाता है।