Kamika Ekadashi 2020: जानिए कब है कामिका एकादशी, इस मुहूर्त और पूजा विधि से मिलेंगे बेशुमार लाभ

Kamika Ekadashi/ Pavitra Ekadashi Vrat: कामिका एकादशी के व्रत से यज्ञ करने और गायें दान करने के बराबर पुण्य मिलने की मान्यता है। यहां जानिए इस व्रत से जुड़ी तमाम बातें।

Kamika Ekadashi Puja vidhi and Vrat Katha
कामिका एकादशी 2020 

मुख्य बातें

  • बेहद शुभ माना गया है कामिका एकादशी पर रखा जाने वाला व्रत
  • भगवान विष्णु की तुलसी पत्र चढ़ाकर और पाठ करके होती है पूजा
  • भगवान कृष्ण ने धर्मराज युधिष्ठिर को सुनाई थी कामिका एकादशी की कथा

Kamika Ekadashi 2020: कामिका एकादशी को पावित्रा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के उपेंद्र अवतार की पूजा की जाती है। इस एकादशी का व्रत करने से पिछले जन्म की बाधाएं दूर हो जाती हैं। इस पवित्र एकादशी व्रत का फल हजारों गाय दान करने से प्राप्त होने वाले पुण्य के बराबर है और इसे दुनिया में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। यह एकादशी जीवन में समृद्धि और खुशियां लाती है।


कामिका एकादशी व्रत पूजा विधि (Kamika Ekadashi Puja Vidhi):

इस एकादशी पर किया गया व्रत सभी पापों और कष्टों को नष्ट करता है और समृद्धि लाता है। कामिका एकादशी व्रत विधान इस प्रकार है:

1. सुबह जल्दी स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लें और फिर भगवान विष्णु की पूजा करें।
2. भगवान को फल, फूल, तिल (तिल), दूध और पंचामृत चढ़ाएं।
3. व्रत के दिन भगवान विष्णु के नाम का पाठ करें और पूजा (भजन-कीर्तन) करें। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें।
5. अगले दिन द्वादशी के दिन ब्राह्मण को भोजन और दान दें। फिर, केवल अपना खाना खाएं।

कामिका एकादशी तिथि (Kamika Ekadashi Date)

साल 2020 में 15 जुलाई को कामिका एकादशी आ रही है। 
एकादशी तिथि शुरू: 15 जुलाई रात 10:19 बजे से 
एकादशी तिथि समाप्‍त: 16 जुलाई, रात 11.44 तक। 
कामिका एकादशी का व्रत आप 16 जुलाई को रख सकते हैं। अगर व्रत न रखें तो सुबह पूजा करने के बाद दान भी कर सकते हैं। 

कामिका एकादशी व्रत का महत्व (Significance of Kamika Ekadashi):

कामिका एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। इसके प्रभाव से सभी अधूरे कार्य पूरे हो जाते हैं। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से न केवल किसी भक्त को लाभ मिलता है, बल्कि उसके पूर्वजों के कष्टों का भी अंत होता है। कामिका एकादशी के अवसर पर, तीर्थ स्थानों पर किसी नदी, झील या तालाब में स्नान करना और अश्वमेध यज्ञ के बराबर फल मिलने की मान्यता है।

यदि आप श्री विष्णु जी को प्रसन्न करना चाहते हैं, तो तुलसी के पत्तों (तुलसी पत्र) का उपयोग करके उनकी पूजा करें। इससे न केवल वह प्रसन्न होंगे, बल्कि आपके सभी कष्ट भी समाप्त हो जाएंगे। कामिका एकादशी की कथा सुनना एक यज्ञ करने के बराबर है।

कामिका एकादशी व्रत कथा (Kamika Ekadashi Vrat Katha):

महाभारत काल के दौरान, धर्मराज युधिष्ठिर ने श्री कृष्ण से कहा, 'हे भगवान, कृपया मुझे कामिका एकादशी की कहानी और महत्व बताएं।' भगवान कृष्ण ने कहा- 'ब्रह्मा जी ने स्वयं इस एकादशी की कथा देवर्षि नारद को सुनाई थी, इसलिए मैं भी आपको वही बताऊंगा।'

एक समय था जब नारद जी ने ब्रह्मा जी से कामिका एकादशी की कथा सुनने की इच्छा व्यक्त की। तब ब्रह्मा जी ने कहा- 'हे नारद! कामिका एकादशी व्रत की कथा सुनने मात्र से वाजपेय यज्ञ का फल प्राप्त होता है।' इस दिन शंख, चक्र और गदाधारी भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।

गंगा, काशी, नैमिषारण्य और पुष्कर जैसे तीर्थों में स्नान करने से प्राप्त फलों को भगवान विष्णु की पूजा से भी प्राप्त किया जाता है। अपने पापों से डरने वाले व्यक्ति को कामिका एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए। जो भी व्यक्ति इस एकादशी व्रत पर भगवान विष्णु को समर्पित तुलसी के पत्ते (तुलसी पत्र) अर्पित करता है, उसे अच्छे फल और सौभाग्य प्राप्त होते हैं।

अगली खबर