Vishwakarma Ji Ki Aarti: ॐ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु जय श्री विश्वकर्मा ह‍िंदी आरती, बढ़ जाएगा पूजा का पुण्य

Vishwakarma Ji Ki Aarti Lyrics in Hindi (ॐ जय श्री विश्वकर्मा प्रभु जय श्री विश्वकर्मा): भगवान विश्वकर्मा की पूजा विश्व के सृजन कर्ता के रूप में की जाती है। पढ़िए उनकी आरती के ह‍िंदी ल‍िर‍िक्‍स।

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भगवान विश्वकर्मा जी की आरती 

मुख्य बातें

  • हिंदू धर्म के अनुसार विश्वकर्मा पूजा के दिन ही हुआ था भगवान विश्वकर्मा का जन्म।
  • भगवान विश्वकर्मा की पूजा अर्चना करने से कारोबार में होती है वृद्धि।
  • भगवान विश्वकर्मा की विश्व सृजन कर्ता के रूप में होती है पूजा।

Vishwakarma Ji Ki Aarti, Vishwakarma Bhagwan Ji Ki Puja Aarti Lyrics: भगवान विश्वकर्मा की पूजा सृष्टि के सृजन करता के रूप में की जाती है। पौराणिक मान्यता के अनुसार देवता गण अपनी रक्षा के लिए भगवान विश्वकर्मा से ही औजार बनाने की गुहार लगाई थी।

विश्वकर्मा पूजा के दिन ही भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था। विश्वकर्मा पूजा के दिन सभी लोग अपने घर में हथियार, औजार, मशीन और दुकानों में मौजूद सामानों की पूजा अर्चना कर भगवान को प्रसन्न करते हैं। यहां आप विश्वकर्मा जी की आरती देखकर शुद्ध-शुद्ध पढ़ सकते हैं। इस बार विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर को मनाया जा रहा है। 

विश्वकर्मा जी की आरती, vishwakarma bhagwan aarti, om jai shri vishwakarma

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।
सकल सृष्टि के करता,
रक्षक स्तुति धर्मा ॥

आदि सृष्टि मे विधि को,
श्रुति उपदेश दिया ।
जीव मात्र का जग मे,
ज्ञान विकास किया ॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।

ध्यान किया जब प्रभु का,
सकल सिद्धि आई ।
ऋषि अंगीरा तप से,
शांति नहीं पाई ॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।

रोग ग्रस्त राजा ने,
जब आश्रय लीना ।
संकट मोचन बनकर,
दूर दुःखा कीना ॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।

जब रथकार दंपति,
तुम्हारी टेर करी ।
सुनकर दीन प्रार्थना,
विपत हरी सगरी ॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।

एकानन चतुरानन,
पंचानन राजे।
त्रिभुज चतुर्भुज दशभुज,
सकल रूप साजे ॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।

ध्यान धरे तब पद का,
सकल सिद्धि आवे ।
मन द्विविधा मिट जावे,
अटल शक्ति पावे ॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।

श्री विश्वकर्मा की आरती,
    जो कोई गावे ।
भजत गजानांद स्वामी,
  सुख संपाति पावे ॥

जय श्री विश्वकर्मा प्रभु,
जय श्री विश्वकर्मा ।
सकल सृष्टि के करता,
रक्षक स्तुति धर्मा॥

विश्वकर्मा जी की आरती का महत्‍व 
मान्यताओं के अनुसार विश्वकर्मा जी की प्रसन्नता से कारोबार में वृद्धि होती है। आपको बता दे भगवान विश्वकर्मा ने ही रावण की लंका, कृष्ण नगरी, पांडव की हस्तिनापुर नगरी और रावण का पुष्पक विमान का निर्माण किया था।

यदि आप भी अपने कारोबार और घर में उन्नति चाहते हैं, तो विश्वकर्मा पूजा के दिन भगवान की आरती जरूर करें। आरती करने से भगवान करने से भगवान विश्वकर्मा बहुत जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। 

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