Shiv ji ke jalabhieshek ki katha: क्‍यों क‍िया जाता है भोलेनाथ का जलाभ‍िषेक, क्‍या है इसके पीछे की मान्‍यता

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jul 20, 2020, 06:57 PM IST

Shiv ji ke jalabhieshek ki katha: 2020 में सावन नहीं, बल्कि, विशेष सावन है। इस बार भोलेनाथ को जलाभ‍िषेक जरूर करें। साथ ही जानें उनको क्‍या चढ़ाएं और क्‍या नहीं।

Shiv ji ke jalabhieshek ki katha: क्‍यों क‍िया जाता है भोलेनाथ का जलाभ‍िषेक, क्‍या है इसके पीछे की मान्‍यता
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अक्सर सावन में चार सोमवार होता है, लेकिन इस बार बहुत ही अद्भुत संयोग बना है। इस बार सावन के पांच सोमवार पड़ रहे हैं। इन सभी सोमवार का अपना महत्व है। भले ही इस साल देश में कोरोना के कारण देश के अधिकतर मंदिर बंद पड़े हैं, लेकिन भोले की कृपा आप पर बरस सकती है।

 क्यों खास हैं सावन के पांच सोमवार 
संयोग से योग बनता है जब सावन में चार के बदले पांच सोमवार पड़ते हैं। इस साल भी सावन में चार सोमवार नहीं बल्कि पांच सोमवार पड़ेंगे। इस बार के पांच सोमवार इसलिए महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि वेद-पुराणों की मानें, तो भोलेनाथ के पांच मुख हैं। पंच महाभूतों से मनुष्यों का शरीर बना है. इसलिए ये सावन बहुत खास माना जा रहा है।

क्यों होता है देवादिदेव महादेव का जलाभिषेक ?
आपके मन में कई बार ये सवाल उठता होगा कि आखिर शिवलिंग का अभिषेक क्यों किया जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार जब समुद्र मंथन से निकले विष को भगवान् भोले ने पी लिया था। विष के प्रभाव से शिव शंकर का ताप बढ़ता जा रहा था। उसी ताप को कम करने के लिए देवताओं ने शिव पर जलाभिषेक करना शुरू किया। तब से शिवलिंग का जलाभिषेक किया जाता है।

पांच सोमवार को शिव को चढ़ाएं ये पांच चीजें
सावन में इस साल पांच सोमवार को जब आप व्रत रहें और भोलेनाथ की आराधना करें तो उन्हें पांच चीजें अर्पित करना न भूलें। दूध, दही, घी, शक्कर और शहद। ये पांच वस्तुएं आप अपने शिव को चढ़ाएं और हर भव-बाधा से मुक्ति पाएं।

Lord Shiva

सोम से शुरू सोम पर खत्म ये सावन   
साल 2020 का सावन बड़े संयोग से आया है। सबसे खास बात ये है कि ये सावन सोमवार से शुरू हुआ और सोमवार के दिन ही खत्म होगा। ऐसा संयोग बहुत कम होता है।  

सावन और शिव से जुड़ी ये मान्यताएं नहीं जानते आप

  1. सावन में बैंगन खाना है पाप : भगवान शिव के भक्तों की कई मान्यताएं हैं। माना जाता है कि सावन के पवित्र महीने में सिर्फ मास-मछली ही नहीं, बल्कि बैंगन खाना भी मना है। बैंगन को अशुद्ध माना जाता है।
  2. भूलकर भी न चढ़ाएं तुलसी : ऐसी कथा है कि जलंधर नामक असुर की पत्नी वृंदा के अंश से तुलसी का जन्म हुआ है। जिसे भगवान विष्णु ने पत्नी के रूप में स्वीकार किया। इसीलिए कभी भी भूलकर भी भगवान शिव को तुलसी का पत्ता नहीं चढ़ता।   
  3. हल्दी, तिल और नारियल नहीं : सावन में भगवान शिव को पूरी तरह से प्रसन्न करना चाहते हैं, तो उनकी पूजा की सामग्री में भूलकर भी हल्दी, काला तिल और नारियल के पानी का उपयोग न करें। ये सब शिव आराधना में वर्जित हैं।

सावन के सभी सोमवार का आप व्रत अवश्य रखिए, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि मंदिर न जाएं और अगर आपके यहां कोरोना काल में मंदिर खुला है, तो वहां के नियमों का पालन करते हुए पूजा करें।
 

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