Naina Devi Mandir: चमत्‍कारी मानी जाती हैं नैना देवी, मंद‍िर में दर्शन से आंखों के रोग दूर होने की है मान्‍यता

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Sep 18, 2020, 08:34 AM IST

Naina Devi Temple: नैनीताल स्थित नैना देवी मंदिर शक्तिपीठ में शामिल है और मान्यता है कि यहां देवी के दर्शन करने मात्र से नेत्र से जुड़ी हर समस्या दूर हो जाती है।

Naina Devi Mandir: चमत्‍कारी मानी जाती हैं नैना देवी, मंद‍िर में दर्शन से आंखों के रोग दूर होने की है मान्‍यता

नैनीताल स्थित नैनी झील के उत्तरी किनारे पर नैना देवी मंदिर अत्यंत प्राचीन है और 1880 में भूस्खालन से यह मंदिर नष्टत हो गया था, लेकिन बाद में इस मंदिर का निर्माण फिर से किया गया। देवी का ये मंदिर शक्तिपीठ में शामिल है और इसी कारण यहां देवी के चमत्कार देखने को मिलते हैं। नैना देवी मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं और अपनी मनोकामनाएं उनके समक्ष रखते हैं। मान्यता है कि यहां देवी के दर्शन मात्र से नेत्र से जुड़ी समस्याएं लोगों की दूर हो जाती है। नेत्र की समस्याएं ही क्यों? आईए आपको बताएं।

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जब भगवान शिव देवी सती की मृत्यु के बाद उन्हें कैलाश पर्वत ले जा रहे थे तो उनकी एक आंख नैनीताल में गिर पड़ी थी, जबकि दूसरी आंख हिमाचल के बिलासपुर में गिरी थीं। यही कारण है कि देवी का ये मंदिर शक्तिपीठ में शामिल हैं। पुराणों में वर्णित है कि देवी के शरीर का अंग जहां भी गिरा वहां शक्तिपीठ की स्थासपना हुई। इस वजह से नैनीताल का नैना देवी मंदिर 64 शक्तिपीठ में शामिल है। इस मंदिर के अंदर नैना देवी मां की दो नेत्र बने हुए हैं। यही कारण है कि नेत्र से जुड़ी समस्याएं यहां ठीक होती है। वहीं यहां मांगी जाने वाली हर मुराद भी पूरी होती है। मंदिर के अंदर नैना देवी के संग भगवान गणेश जी और मां काली की भी मूर्तियां हैं।

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मंदिर के प्रवेशद्वार पर पीपल का एक बड़ा और घना पेड़ है। यहां नैना देवी को देवी पार्वती का रूप माना जाता है और इसी कारण उन्हें नंदा देवी भी कहा जाता है। मंदिर में नंदा अष्टमी के दिन भव्य मेले का आयोजन किया जाता है, जो कि 8 दिनों तक चलता है और यहां दूर-दूर से लोग आते हैं। यह मंदिर नैनीताल मुख्य बस स्टैंड से केवल 2 किमी की दूरी पर  बना हुआ है।

Naina Devi Mandir | Naina devi temple Himachal | Times of India Travel

नैनी झील का जानें महत्व

नैना देवी मंदिर की तरह नैनी झील को भी बहुत पवित्र माना गया है। एक दंत कथा के अनुसार जब अत्री, पुलस्त्य और पुलह ऋषि को नैनीताल में कहीं पानी नहीं मिला तो  उन्होंने एक गड्ढा खोदा और मानसरोवर झील से पानी लाकर इममें भर दिया। तब से यहां कभी भी पानी कम नहीं हुआ और ये झील बन गई।  स्कं द पुराण में इसे त्रिऋषि सरोवर भी कहा जाता है। मान्यता है कि झील में डुबकी लगाने से उतना ही पुण्य मिलता है जितना मानसरोवर नदी में नहाने से मिलता है।

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