Nag Panchami 2020 Date, Tithi, Puja Muhurat: जानें कब है नाग पंचमी, ढाई घंटे के मुहूर्त में इस तरह करें पूजन

Nag Panchami 2020 : सावन मास के शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को नाग पंचमी का त्‍योहार मनाया जाता है। इस द‍िन नाग देवता को पूजने की परंपरा है ताक‍ि उनकी कृपा परिवार पर बनी रहे।

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Nag Panchami 2020, नाग पंची 2020  |  तस्वीर साभार: Shutterstock

मुख्य बातें

  • सावन मास में हर‍ियाली तीज के दो द‍िन बाद नाग पंचमी मनाई जाती है
  • ये पर्व पूरे देश में मनाया जाता है और इस द‍िन सांपों को दूध प‍िलाने की परंपरा भी है
  • नाग पंचमी पर खासतौर पर 12 नाग देवताओं की पूजा होती है

ह‍िंदू कलेंडर के अनुसार, नाग पंचमी का त्‍योहार सावन मास की शुक्‍ल पक्ष की पंचमी को आता है। वहीं अक्‍सर ये हर‍ियाली तीज के दो द‍िन बाद मनाया जाता है। अंग्रेजी कलैंडर के मुताब‍िक, ये त्‍योहार जुलाई या अगस्‍त महीने में आता है। नाग पंचमी पर नागों की पूजा होती है और देश भर में उनको दूध प‍िलाने की परंपरा है ताक‍ि नाग देवता प्रसन्‍न होकर अपनी कृपा परिवार पर बनाए रखें। 

Nag Panchami 2020 Date, नाग पंचमी 2020 की तारीख 
साल 2020 में सावन मास की शुरुआत 6 जुलाई से हुई है। इस तरह नाग पंचमी का पर्व 25 जुलाई को शन‍िवार के द‍िन आ रहा है। द‍िन सावन के शुक्‍ल पक्ष की पंचमी तिथि है। 

Nag Panchami 2020 Tithi, नाग पंचमी 2020 की त‍िथ‍ि 

पंचमी तिथ‍ि आरंभ : 24 जुलाई को दोपहर 2:34 बजे से 
पंचमी तिथ‍ि समाप्‍त : 25 जुलाई को दोपहर 12:02 बजे से 


Nag Panchami 2020 Puja Muhurat Time, नाग पंचमी पर पूजा का मुहूर्त व समय 
25 जुलाई 2020 को नाग पंचमी की पूजा का समय सुबह 5:54 बजे से लेकर सुबह के 8:34 बजे तक रहेगा। 
इस तरह नाग पंचमी पूजा के मुहूर्त की अवध‍ि दो घंटे और 40 मिनट का रहेगी। 

Why Nag Panchami is celebrated, क्‍यों मनाई जाती है नाग पंचमी 
पुराणों में सर्पों को लेकर बहुत कथाएं कही गई हैं। भगवान विष्णु शेष नाग पर शयन करते हैं। समुद्र मंथन में नाग वासुकी का प्रयोग है। वहीं शिव जी के गले में भी नाग सुशोभित है। नाग को भोलेनाथ का आभूषण तक कहा गया है। 
इस प्रकार नाग पूजा का महत्व सनातन धर्म में और भी बढ़ जाता है। साथ ही सावन मास में पंचमी के द‍िन सांपों की पूजा का व‍िधान श‍िव शंकर को प्रसन्‍न करने से भी है। यह भी कहा गया है क‍ि अगर कुंडली में काल सर्प दोष है तो नाग पंचमी पर पूजा करके इसे दूर क‍िया जा सकता है। 

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  1. इस द‍िन घर की दीवारों पर नाग के चित्र बनाएं जाते हैं। इनको दूध से स्‍नान भी कराया जाता है।
  2. इसके बाद मंत्रोच्‍चारण के साथ पूजा की जाती है।
  3. हालांक‍ि नाग से पहले श‍िव पूजन भी होता है। श‍िवजी का भी दूध से रुद्राभिषेक होता है।
  4. प्रसाद में लावा और दूध बांटा जाता है। 

जिनकी कुंडली राहु से पीड़ित हो, वो इस दिन रुद्राभिषेक अवश्य करें। ज‍िन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष होता है, वे इस द‍िन खास पूजन कराते हैं। 


 

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