Krishna Janmashtami 2022: कृष्ण जन्माष्टमी में पूजा करते वक्त जरूर करें 15 मंत्रों का जाप, सुख समृद्धि से भर जाएगा घर

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jul 25, 2022, 08:22 PM IST

Krishna Janmashtami Puja Vidhi and Mantra: हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव 18 अगस्त के दिन गुरुवार को मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष महत्व है। श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन रात में पूजा की जाती है। इस दिन पूजा करते वक्त कुछ मंत्रों का जाप जरूर करना चाहिए।

Krishna Janmashtami 2022: कृष्ण जन्माष्टमी में पूजा करते वक्त जरूर करें 15 मंत्रों का जाप, सुख समृद्धि से भर जाएगा घर
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Krishna Janmashtami Mantra Chant: हिंदू धर्म में कृष्ण जन्माष्टमी का विशेष महत्व है। कृष्ण जन्माष्टमी भाद्र पद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के साथ रोहिणी नक्षत्र में हर साल मनाई जाती है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल जन्माष्टमी का उत्सव 18 अगस्त दिन गुरुवार को मनाया जाएगा। हिंदू धर्म में ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था। कृष्ण जन्माष्टमी के दिन भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल की पूजा की जाती है।

मान्यता है कि कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा विधि विधान से करने वाले व व्रत रखने वाले लोगों पर भगवान श्री कृष्ण की विशेष कृपा बनी रहती है। श्री कृष्ण जन्माष्टमी के दिन रात में पूजा की जाती है। माना जाता है कि भगवान श्री कृष्ण का जन्म रात्रि में हुआ था, इसलिए कृष्ण जन्माष्टमी की पूजा रात में की जाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भगवान श्री कृष्ण की पूजा करते वक्त कुछ मंत्रों का जाप करने से विशेष लाभ मिलता है। आइए जानते हैं इन मंत्रों के बारे में...

शुद्धि मंत्र
ओम अपवित्रः पवित्रोवा सर्वावस्थां गतोअपि वा। यः स्मरेत पुण्डरीकाक्षं स बाह्याभ्यन्तरः शुचिः।। 

जन्माष्टमी पूजन संकल्प मंत्र
‘यथोपलब्धपूजनसामग्रीभिः कार्य सिद्धयर्थं कलशाधिष्ठित देवता सहित, श्रीजन्माष्टमी पूजनं महं करिष्ये।

आवाहन मंत्र
अनादिमाद्यं पुरुषोत्तमोत्तमं श्रीकृष्णचन्द्रं निजभक्तवत्सलम्। स्वयं त्वसंख्याण्डपतिं परात्परं राधापतिं त्वां शरणं व्रजाम्यहम्।।

आसन मंत्र 
अर्घा में जल लेकर बोलें- रम्यं सुशोभनं दिव्यं सर्वासौख्यकरं शुभम्। आसनं च मया दत्तं गृहाण परमेश्वर।। 

भगवान को अर्घ्य दें
अर्घा में जल लेकर बोलें- अर्घ्यं गृहाण देवेश गन्धपुष्पाक्षतैः सह। करुणां करु मे देव! गृहाणार्घ्यं नमोस्तु ते।। 

आचमन मंत्र 
अर्घा में जल और गंध मिलाकर बोलें- सर्वतीर्थसमायुक्तं सुगन्धं निर्मलं जलम्। आचम्यतां मया दत्तं गृहत्वा परमेश्वर।। 

स्नान मंत्र
अर्घा में जल लेकर बोलें- गंगा, सरस्वती, रेवा, पयोष्णी, नर्मदाजलैः। स्नापितोअसि मया देव तथा शांति कुरुष्व मे।। 

पंचामृत स्नान 
अर्घा में गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद मिलाकर भगवान श्रीकृष्ण को यह मंत्र बोलते हुए पंचामृत स्नान कराएं- पंचामृतं मयाआनीतं पयोदधि घृतं मधु। शर्करा च समायुक्तं स्नानार्थं प्रतिगृह्यताम्।। 

भगवान श्रीकृष्ण को वस्त्र अर्पित करने का मंत्र
हाथ में पीले वस्त्र लेकर यह मंत्र बोलें- शीतवातोष्णसन्त्राणं लज्जाया रक्षणं परम्। देहालअंगकरणं वस्त्रमतः शान्तिं प्रयच्छ मे। भगवान को वस्त्र अर्पित करें।

यज्ञोपवीत अर्पित करने का मंत्र
यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत्सहजं पुरस्तात्। आयुष्मयग्यं प्रतिमुन्ज शुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेजः।।

चंदन लगाने का मंत्र
फूल में चंदन लगार मंत्र बोलें- श्रीखंड चंदनं दिव्यं गन्धाढ्यं सुमनोहरम्। विलेपनं सुरश्रेष्ठ चंदनं प्रतिगृह्यताम्।।

भगवान को फूल चढाएं
माल्यादीनि सुगन्धीनि मालत्यादीनि वै प्रभो। मयाआहृतानि पुष्पाणि पूजार्थं प्रतिगृह्यताम्।।

भगवान को दूर्वा चढाएं
हाथ में दूर्वा लेकर मंत्र बोलें – दूर्वांकुरान् सुहरितानमृतान्मंगलप्रदान्। आनीतांस्तव पूजार्थं गृहाण परमेश्वर।।

भगवान को नैवेद्य भेंट करें
इदं नाना विधि नैवेद्यानि ओम नमो भगवते वासुदेवं, देवकीसुतं समर्पयामि।

भगवान को आचमन कराएं
इदं आचमनम् ओम नमो भगवते वासुदेवं, देवकीसुतं समर्पयामि।

(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)
 

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