किस नक्षत्र में कौन-सी हो सकती है बीमारी, जानें कब और कितने दिन में ठीक होगा रोग

Constellation related diseases: ज्योतिष में नक्षत्र के आधार पर भी बीमारियों के बारे में बताया गया है। यानी जिस नक्षत्र में आपका जन्म हुआ होगा, उसके कारण आपको कुछ बीमारियों के होने की संभावना ज्यादा होगी।

Constellation related diseases, नक्षत्र से जुड़े रोग
Constellation related diseases, नक्षत्र से जुड़े रोग 

मुख्य बातें

  • नक्षत्र के आधार पर जातक को रोग की संभावना रहती है
  • कुछ नक्षत्र में बीमारी कुछ दिनों की ही होती है
  • कई नक्षत्र में बीमारी उम्र भर या मृत्यु कारक भी होती है

ज्योतिष में कुल 27 नक्षत्र बताए गए हैं। इसके अलावा एक 28वां नक्षत्र अभिजित भी माना गया है। हालांकि, इन 27 नक्षत्र में ही मनुष्य का जन्म होता है और माना जाता है कि जिस नक्षत्र में मनुष्य का जन्म होता है, उस नक्षत्र का प्रभाव तो उस पर पड़ता ही है, उस नक्षत्र से संबंधित बीमारियां भी होने की संभावना ज्यादा होती है। यानी यदि किसी को अनुवांशिक बीमारी न हो तो उसे अन्य बीमारियां उसके नक्षत्र से मिलती हैं। ज्योतिष में प्रत्येक नक्षत्र का संबंध कुछ खास बीमारी से माना गया है। तो चलिए आपको बताएं कि किस नक्षत्र से कौन सी बीमारी संबंधित होती है।

नक्षत्र के अनुसार जानें बीमारियों का ब्यौरा

अश्विनी

अश्विनी नक्षत्र अर्द्धाग्वात, अनिद्रा एवं मतिभ्रम आदि से संबंधित होता है। यदि इस नक्षत्र में मनुष्य का जन्म हो तो वह उसे इससे जुड़ी बीमारियों के होने की संभावना ज्यादा होती है। ये बीमारी मनुष्य की कुंडली में विराजित ग्रहों के आधार पर एक,नौ या पच्चीस दिन तक रह सकती है।

भरणी

इस नक्षत्र के जातकों को तीव्र ज्वर, दर्द एवं शिथिलता या मूर्च्छा से जुड़ी बीमारियां होने की संभावना ज्यादा होती है। ये बीमारी 11, 21 अथवा 30 दिन तक रह सकती है। 

कृत्तिका

इस नक्षत्र के जातकों को उदर शूल, तीव्र वेदना, अनिद्रा तथा नेत्र रोग होने की संभावना ज्यादा होती हैं। ये बीमारी 9, 10 अथवा 21 दिन तक रह सकती है। 

रोहिणी

इस नक्षत्र के जातकों को सिरदर्द, मतिभ्रम, कुक्षिशूल जैसी बीमारियों की संभावना ज्यादा होती है और ये बीमारी तीन से लेकर दस दिन तक रह सकती है। 

मृगशिरा

इस नक्षत्र में त्रिदोष, त्वचा रोग और बार-बार एलर्जी होने की संभावना रहती है। ये बीमारी तीन से नौ दिन तक रह सकती है। 

आर्द्रा

इस नक्षत्र के जातकों को वायु विकार के साथ ही स्नायुविकार और कफ संबंधित रोग होने का डर रहता है। ये बीमारी कम से कम दस दिन तक या एक महीने तक रह सकती है। 

पुनर्वसु

इस नक्षत्र में कमर दर्द, सिरदर्द अथवा गुर्दे आदि के रोग हो सकते हैं। यदि रोग हो तो उसका असर सात दिन से नौ दिन तक रह सकता है। 

पुष्य

यह नक्षत्र तेज बुखार देता है, दर्द तथा अचानक होने वाले पीड़ादायक रोगों को भी देता है। इसमें प्रारंभ हुई बीमारी लगभग 7 दिनों तक रहती है।

आश्लेषा

यह नक्षत्र सर्वांगपीड़ा देने वाला है। बीमारी कोई भी हो मृत्यु तुल्य कष्ट देने वाली होती है। इस नक्षत्र में अगर स्वास्थ्य विकार होते हैं तो वह नौ दिन से लेकर एक महीने तक बने रह सकते हैं। कई बीमारी मृत्युतुल्य भी सिद्ध हो सकती है।

मघा

यह नक्षत्र वायु विकार, उदर विकार तथा मुँह के रोगों से संबंध रखता है। इस नक्षत्र में प्रारंभ हुआ रोग 20 दिन से लेकर 45 दिन तक बना रहता है।

पूर्वाफाल्गुनी

इस नक्षत्र में कर्ण रोग (कान की बीमारी), शिरोरोग, ज्वर तथा वेदना होती है। इसमें कोई बीमारी होती है तो वह 8/15/30 दिनों तक रहती है और कभी-कभी बीमारी बढ़कर एक साल तक भी बनी रहती है।</p>

उत्तराफाल्गुनी

इस नक्षत्र में पित्तज्वर, अस्थिभंग तथा सर्वांगपीड़ा होती है। अगर इस नक्षत्र में कोई बीमारी होती है तो वह 7/15 अथवा 27 दिन तक बनी रहती है।

हस्त

यह नक्षत्र उदर शूल, मंदाग्नि तथा पेट से संबंधित अन्य कई विकारों से संबंध रखता है। यदि इस नक्षत्र में बीमारी होती है तो वह 7/8/9 अथवा 15 दिनों तक बनी रहती है।

चित्रा

इस नक्षत्र का संबंध अत्यन्त कष्टदायक अथवा दुर्घटना जन्य पीड़ाओं से माना गया है। यदि इस नक्षत्र में रोग होता है तो वह 8/11 अथवा 15 दिन तक बना रहता है

स्वाती

यह नक्षत्र उन जटिल रोगों से संबंध रखता है जिनका शीघ्रता से उपचार नहीं होता है। यदि इसमें कोई बीमारी हो तो ये एक से लेकर दस महीने तक रह सकती है।

विशाखा

यह नक्षत्र वात व्याधि (वायु रोग) से संबंधित रोग देता है, कुक्षिशूल, सर्वांगपीड़ा आदि से जुड़े रोग देता है। अगर इस नक्षत्र में कोई बीमारी होती है तो वह आठ से एक महीने तक रह सकती है।

अनुराधा

इस नक्षत्र में तेज बुखार, सिरदर्द तथा संक्रामक रोग होते हैं। इस नक्षत्र में यदि ये रोग हो तो वह छह दिन से लेकर चालीस साल तक रह सकती है।

ज्येष्ठा

इस नक्षत्र में कंपन, विकलता तथा वक्ष संबंधी रोग होते हैं। बीमारी होने पर वह 15, 21 अथवा 30 दिन तक चलती है। कभी-कभी मृत्युदायक रोग भी हो जाते हैं

मूल

यह नक्षत्र उदर रोग, मुख रोग तथा नेत्र रोगों से संबंधित है, इस नक्षत्र में रोग होने पर वह नौ दिन से लेकर उम्रभर रह सकती है।

पूर्वाषाढ़ा

यह नक्षत्र प्रमेह, धातुक्षय, दुर्बलता तथा कुछ गुप्त रोगों से संबंध रखता है। इसमें उत्पन्न हुआ रोग 15 से 20 दिन बना रह सकता है और अगर इतने समय में रोग ठीक नहीं होता तो वह 2, 3 अथवा 6 महीने तक बना रहता है। इस नक्षत्र में पैदा हुई बीमारी कोई भी हो उसकी पुनरावृति भी हो जाती है

उत्तराषाढ़ा

इस नक्षत्र में उदर से जुड़े रोग, कटिशूल और शरीर के कुछ अन्य दर्द देने वाले रोग होते हैं। इस नक्षत्र में पैदा हुए रोग 20 अथवा 45 दिन तक बने रहते हैं

श्रवण

यह नक्षत्र अतिसार, विषूचिका, मूत्रकृच्छु तथा संग्रहणी से संबंध रखता है। इस नक्षत्र में पैदा हुए रोग तीन दिन से लेकिर 25 दिन तक बने रहते हैं।

धनिष्ठा

इस नक्षत्र में आमाशय, बस्ती तथा गुर्दे के रोग होते हैं। इस नक्षत्र में पैदा हुआ रोग 13 दिन तक रहता है। कभी-कभी एक हफ्ता अथवा 15 दिन तक भी चलते हैं।

शतभिषा

इस नक्षत्र में ज्वर, सन्निपात तथा विषम ज्वर होता है। इसमें पैदा हुआ रोग 3/10//21 अथवा 40 दिन तक रहते हैं।

पूर्वाभाद्रपद

इस नक्षत्र में वमन, घबराहट, शूल तथा मानसिक रोग होते हैं। इस नक्षत्र में पैदा हुए रोग 2 से 10 दिन तक रहते हैं और कभी 2 से 3 महीने तक भी रहते हैं।

उत्तराभाद्रपद

इस नक्षत्र में दाँतो के रोग, वात रोग तथा ज्वर से संबंधित रोग आते हैं। इस नक्षत्र में पैदा हुई बीमारी सात दिन से लेकर 45 दिन तक बनी रहती है

रेवती

इस नक्षत्र में मानसिक बीमारी ज्यादा होती हैं, अभिचार, कुछ अन्य रोग तथा वात रोग भी इस नक्षत्र से संबंध रखते हैं। इस नक्षत्र में पैदा हुए रोग दस दिन से लेकर 45 दिन तक रह सकते हैं। 

ऐसे में जिस नक्षत्र में आपका जन्म हुआ है उस आधार पर आप संभावित बीमारियों से बचने का प्रयास पहले से ही कर सकते हैं। 

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