Balarama Facts: क‍िसका अवतार थे कान्‍हा के दाऊ बलराम, क्‍यों कहते हैं उनको क‍िसानों का देवता

kiska avtar they Balarama : श्री कृष्‍ण के बड़े भाई थे बलराम। उनको शेषनाग का अवतार भी माना जाता है। वह हाथ में हल रखते हैं और उनको शक्‍त‍ि का प्रतीक भी माना गया है।

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kaun they Balarama, श्री कृष्‍ण के बड़े भाई थे बलराम 

मुख्य बातें

  • श्री कृष्‍ण के बड़े भाई थे बलराम, वह उनको दाऊ कहते थे
  • उनको शेषनाग का अवतार माना गया है
  • वह क‍िसानों के देवता और हल देवता के नाम से भी जाने हैं

श्री कृष्‍ण से जुड़ी कथाओं में उनके दाऊ यानी बलराम को एक व‍िश‍िष्‍ट स्‍थान द‍िया गया है। बलराम जिन्हें बलभद्र, दाऊ इत्यादि नामों से जाना जाता है, वह श्री कृष्ण के बड़े भाई और देवी रेवती के पति हैं। बलराम को शक्ति का प्रतीक माना जाता है जिन्हें एक आज्ञाकारी पुत्र एक आदर्श भाई एक अच्छा पति इन सभी रूप में देखा जाता है। उनके हाथों में हल होता है और वह शरीर पर नीला वस्त्र होता है। 

बलराम को भीम और दुर्योधन का गुरु कहते हैं। साथ ही उनको क‍िसानों का देवता भी माना जाता है। यहां हम आपको बलराम से जुड़ी कुछ खास बातें बता रहे हैं। 

  1. देवता क्यों कहा जाता है : भगवान श्री कृष्ण के बड़े भाई बलराम हैं जिन्हें वह प्यार से दाऊ कहते थे। जगन्नाथ परंपरा के अनुसार भगवान बलराम को त्रिदेव देवताओं में से एक माना जाता है। एक रूप से बलराम को भगवान विष्णु के आठवें अवतार के रूप में भी देखा जाता है।
  2. शेषनाग का अवतार : भगवान विष्णु के अवतार होने के साथ-साथ कई ग्रंथों में बलराम को शेषनाग का अवतार भी बताया गया है। शेषनाग वह नाग है जिस पर क्षीरसागर में भगवान विष्णु विश्राम करते हैं, कहा जाता है कि शेषनाग अपने फन पर ब्रह्मांड के सभी ग्रहों को रखते हैं।
  3. लक्ष्मण के अवतार बलराम : धर्म ग्रंथों के अनुसार एक बार राम जी के छोटे भाई लक्ष्मण ने उनसे कहा था कि मैं आपसे छोटा हूं इसलिए आपकी सारी आज्ञा मानता हूं जिस पर भगवान श्री राम ने उन्हें यह वरदान दिया कि अगले जन्म में वह उनके बड़े भाई बनेंगे। इसीलिए द्वापर युग में जब श्री कृष्ण और बलराम का जन्म हुआ तब लक्ष्मण के अवतार बलराम श्री कृष्ण के बड़े भाई के रूप में सामने आए।
  4. शक्तिशाली योद्धा : बलराम को गदा युद्ध का सबसे बड़ा योद्धा माना जाता था। बलराम जब बालक रूप में थे, तब से ही वह अपनी गदा से कंस द्वारा भेजे गए कई असुरों का वध कर चुके थे जिनमें मुख्य रूप से धेनुकासुर और प्रलम्बासुर थे। बलराम इतने शक्तिशाली थे कि उन्हें हाथियों के एक झुंड से भी ज्यादा मजबूत माना जाता था।
  5. भीम और दुर्योधन के गुरु बलराम : भीम और दुर्योधन दोनों लोग बलराम के शिष्य थे। बलराम ने ही इन दोनों को गदा युद्ध के सभी गुण सिखाए थे। जब महाभारत का युद्ध हो रहा था तब दोनों योद्धा उनके पास अपनी अपनी तरफ से लड़ने का प्रस्ताव लेकर गए थे लेकिन बलराम ने उन दोनों की तरफ से युद्ध न करने का फैसला किया।
  6. कृषि के देवता बलराम : बलराम को हमेशा हमने एक हल के साथ देखा है बलराम की शारीरिक बनावट को देखकर भी उन्हें किसानों का भगवान कहा जाता है। विष्णु पुराण में यह लिखा है क‍ि कृषि करने वाले लोगों को बलराम की पूजा करनी चाहिए।
  7. समाधि में विलीन हो गए : महाभारत युद्ध के कुछ वर्षों पश्चात कृष्ण के राज्य में गृह युद्ध शुरू हो गया। इस युद्ध ने यदुवंश का पूरा विनाश कर दिया। जिससे बलराम बहुत दुखी हो गए और एक दिन वह एक पेड़ के नीचे बैठकर योग समाधि में लीन हो गए। कुछ वक्त बाद उनके शरीर से एक सांप रूपी आत्मा निकली जिसे बलराम के शेषनाग अवतार का स्वरूप बताया जाता है।
  8. सरल स्वभाव के बलराम : बलराम बहुत सीधे-साधे और सरल स्वभाव के थे। भगवान कृष्ण की जटिल तर्कों को नहीं समझ पाते थे। हालांकि वह हमेशा अपने छोटे भाई से सहमत रहते थे। जब कृष्ण दुर्योधन को महाभारत के युद्ध में अपनी नारायणी सेना दी तब उसमें बलराम ही शामिल थे। हालांकि बलराम ने अपने दोनों शिष्यों के तरफ से युद्ध ना करने का फैसला ले कर अपने आप को एक सम्मानित स्थिति में रखने का काम किया।
  9. भगवान बलराम की शादी : बलराम की पत्नी रेवती एक शक्तिशाली सम्राट राजा काकुदमी की एकमात्र पुत्री थी। माना जाता है कि राजा काकुदमी अपनी पुत्री रेवती के विवाह के लिए चिंतित थे। इसी विषय में उन्होंने ब्रह्मा जी से एक योग्य वर के लिए सलाह मांगी तब ब्रह्मा जी ने कहा भगवान विष्णु के 2 अवतार इस वक्त सृष्टि पर हैं जो भगवान श्री कृष्ण और बलराम के रूप में है। इन्हीं में से बलराम आपकी पुत्री के लिए सुयोग्य वर साबित होंगे। जिसके बाद सम्राट काकुदमी  ने इन दोनों का विवाह करा दिया।
  10. अद्भुत जन्म की कहानी : कंस देवकी का भाई था।एक आकाशवाणी में जब उसे पता चला की देवकी के आठवें पुत्र से उसका वध होगा तो उसने देवकी के पति वासुदेव को और देवकी को कारागार में डाल दिया। माना जाता है कि बलराम का जन्म देवकी के ही गर्भ से उनके सातवें पुत्र के रूप में होना था लेकिन भगवान विष्णु ने योग माया से मिलकर इनको रोहिणी के गर्भ स्‍थाप‍ित कर द‍िया और स्वयं माता देवकी के गर्भ में समा गईं। इस वजह से बलराम भगवान कृष्ण से पहले जन्म ले चुके थे।

बलराम जयंती और इसकी पूजा व‍िध‍ि 
हिंदू पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की षष्ठी पर बलराम जयंती मनाई जाती है। इस दिन महुआ के दातुन से अपने दांत साफ करने चाहिए और उसके बाद ही स्नान करना चाहिए। बलराम जयंती के दिन घर को भैंस के गोबर से लिपने का रिवाज है। कम से कम पूजा स्थल पर गोबर लेपन जरूर करें। बलराम जयंती के दिन भगवान गणेश और माता गौरी के साथ भगवान शिव की विधिवत पूजा करनी चाहिए। घर में पूजा के बाद तालाब के किनारे झरबेरी, पलाश और कांसी का पेड़ लगाने का भी रिवाज हैं। 

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