Hartalika Teej vrat katha: हरतालिका तीज पर करें इस कथा का श्रवण, अखंड सौभाग्य का मिलेगा वरदान 

Hartalika Teej Vrat Katha: भाद्रपद मास में पड़ने वाली हरतालिका तीज का व्रत रखने से सुहागिन महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस दिन शिव-पार्वती की पूजा के बाद कथा का पाठ करना चाहिए।

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हरतालिका तीज की कथा (Pic: Istock) 

मुख्य बातें

  • भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को कहा गया है हरतालिका तीज।
  • सुखी वैवाहिक जीवन और अखंड सौभाग्य के लिए महिलाएं रखती हैं यह व्रत।
  • शिव-पार्वती की पूजा के बाद अवश्य करना चाहिए कथा श्रवण।

Hartalika Teej 2021 Katha: मान्यताओं के अनुसार, हरतालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के साथ कुंवारी कन्याओं के लिए भी लाभकारी है। कहा जाता है कि हरतालिका तीज पर पुराणों में वर्णित कथाओं का श्रवण अवश्य करना चाहिए। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि पर मनाए जाने वाले हरतालिका तीज के पर्व का महात्म अधिक है। इस दिन अखंड सौभाग्यवती और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए सुहागिन महिलाएं शिव-पार्वती की पूजा-उपासना करती हैं तथा निर्जला व्रत रखती हैं। भारत के कुछ राज्यों में महिलाएं इस दिन फलाहार व्रत भी रखती हैं।

Hartalika Teej Vrat Katha in Hindi, हरतालिका तीज व्रत कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब देवी सती ने माता पार्वती के रूप में पुनः शरीर धारण किया था। तब, उनका जन्म हिमालय राज के घर में हुआ था। जब देवी पार्वती बड़ी हुईं तब उनके पिता हिमालय राज ने उनकी शादी करने का निर्णय लिया। हिमालय राज भगवान विष्णु को अपना दामाद बनाना चाहते थे। मगर, वह इस बात से अनजान थे कि माता पार्वती शिव जी को अपने पति के रूप में स्वीकार कर चुकी हैं। 

शिव को पाने के लिए माता पार्वती ने की कठोर तपस्या

देवी सती की मृत्यु के बाद भगवान शिव तपस्या में लीन रहा करते थे और वैरागी बन गए थे। इस दौरान देवी पार्वती और उनके पिता के बीच असमंजस ने जगह बना ली थी। जिसे दूर करने के लिए देवी पार्वती की सखियों ने एक बड़ा कदम उठाया। सखियों ने देवी पार्वती का हरण कर लिया और उन्हें गुफा में छुपा दिया। गुफा में रहकर देवी पार्वती भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या किया करती थीं। 

वैराग्य तोड़ने पर विवश हुए भगवान शिव 

इसी बीच भगवान शिव देवी पार्वती की तपस्या से प्रसन्न हो गए। जिस वजह से उन्हें अपना वैराग्य तोड़ना पड़ा। माता पार्वती से मिलने के बाद भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी बनाया था। कहा जाता है कि तालिका का मतलब सखियां होता है जिन्होंने माता पार्वती का अपहरण किया था। इस वजह से इस तिथि को हरतालिका का नाम दिया गया। हरतालिका तीज का व्रत रखने वाली महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
 

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