Chanakya Niti: जिंदगी में भूलकर भी ना करें ये 5 काम, ऐसा करने पर धन से रह जाएंगे वंचित

चाणक्य एक कुशल राजनीतिज्ञ, कूटनीतिज्ञ और अर्थशास्त्री के रूप में विश्व विख्यात आचार्य चाणक्य की नीतियां आज भी प्रासंगिक हैं। जिन्हें व्यक्ति अपने जीवन में उतारकर एक सुखी जीवन व्यतीत कर सकता है।

chanakya niti, चाणक्य नीति
chanakya niti, चाणक्य नीति 

मुख्य बातें

  • चाणक्य के अनुसार अपनी कमजोरी का प्रदर्शन करना मुसीबत में डाल सकता है।
  • शक्ति के समक्ष आकार का कोई महत्व नहीं होता।
  • अधर्म के मार्ग पर चलने वाला हो जाता है नष्ट।

भारतीय राजनीति और अर्थशास्त्र के जनक कहे जाने वाले आचार्य चाणक्य का नीतिशास्त्र इंसान के लिए काफी उपयोगी माना गया है। चाणक्य की नीतियों के बल पर कई राजाओं ने अपना शासन चलाया है। इन्हीं नीतियों के बल पर चाणक्य ने चंद्रगुप्त मौर्य को सम्राट बना दिया।

आपको बता दें आचार्य चाणक्य को विष्णुगुप्त और कौटिल्य के नाम से भी जाना जाता है। आचार्य चाणक्य एक कुशल राजनीतिज्ञ, चतुर कूटनीतिज्ञ और प्रकांड अर्थशास्त्री के रूप में विश्व विख्यात हुए। आज भी आचार्य चाणक्य के बताए गए सिद्धांत और नीतियां प्रासंगिक हैं। जिन्हें व्यक्ति अपने जीवन में उतारकर एक सुखी जीवन व्यतीत कर सकता है और अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। तो आइए जानते हैं आचार्य चाणक्य की कुछ महत्वपूर्ण नीतियां। 

अपनी कमजोरी का प्रदर्शन ना करें

आचार्य चाणक्य ने अपने नीतिशास्त्र में कहा है कि जिस प्रकार कोई सांप जहरीला नहीं है फिर भी वह फुफकारना नहीं छोड़ता ठीक उसी प्रकार कमजोर व्यक्ति को हर वक्त अपनी कमजोरी का प्रदर्शन नहीं करना चाहिए। यदि आप ऐसा करते हैं तो कोई भी व्यक्ति आसानी से आपकी कमजोरी का फायदा उठा लेगा।

अधर्म के मार्ग पर चलने वाला होता है नष्ट

चाणक्य नीतिशास्त्र में कई महत्वपूर्ण बातें बताई गई हैं। जो व्यक्ति के जीवन में आज भी विशेष महत्व रखती हैं। इस नीति शास्त्र के अनुसार जो मनुष्य अपने समाज को छोड़कर दूसरे समाज में जा मिलता है, वह उसी राजा की तरह नष्ट हो जाता है जो अधर्म के मार्ग पर चलता है।

ऐसा करने पर रह जाएंगे धन से वंचित

आचार्य चाणक्य के अनुसार जो अस्वच्छ कपड़े पहनता हैं और खुद को साफ नहीं रखता। बहुत खाता है और कठोर शब्द बोलता है, सूर्योदय के बाद उठता है। उसका कितना भी बड़ा व्यक्तित्व क्यों ना हो वह लक्ष्मी की कृपा से वंचित रह जाएगा।

वाणी में मधुरता ही मनुष्य की विशेषता है

आचार्य चाणक्य के अनुसार उदारता, वचनों में मधुरता, साहस, आचरण में विवेकता जिस मनुष्य में होगी, उस व्यक्ति की बराबरी कोई नहीं कर सकता। इन्हें हर मनुष्य को अपने आचरण में लानी चाहिए। इससे व्यक्ति सफलता के मार्ग को छू सकता है।

शक्ति के आगे आकार नहीं रखता महत्व

आचार्य चाणक्य के नीतिशास्त्र में कहा गया है हाथी का शरीर कितना विशाल है लेकिन फिर भी वह एक छोटे से अंकुश से नियंत्रित हो जाता है। इसी तरह एक दिया घने अंधकार का नाश करती है और कड़कती बिजली पहाड़ को तोड़ देती है। ठीक उसी प्रकार शक्ति के समक्ष आकार का कोई महत्व नहीं होता।

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