चाणक्य नीति: किन जानवरों के कौन से गुण अपनाने के लिए कहते हैं आचार्य कौटिल्य, सफलता की राह में बनेंगे मददगार

सफलता के सूत्र देते हुए आचार्य चाणक्य ने अपने ग्रंथ चाणक्य नीति में 5 जानवरों से एक एक गुण सीखने के लिए कहा हैं। आइए जानते हैं कौन से हैं वो जानवर और उनके गुण।

Chanakya Niti about Animals Qualities
चाणक्य नीति: पक्षियों से सीखे जाने वाले गुण 

मुख्य बातें

  • चाणक्य नीति में बताए गए हैं सफलता के कई सूत्र
  • जानवरों से कुछ गुण सीखकर पा सकते हैं कामयाबी
  • जानिए किस पशु-पक्षी से कौन सी बात अपनाने के लिए कहते हैं चाणक्य

प्रकृति अलग अलग तरह के कई रंगों से भरी हुई है, जहां अगर ध्यान से देखा जाए तो बिना आश्चर्य किए कोई भी नहीं रह सकता है। इंसान ने तो नए नए तरह की कीर्तिमान यहां हासिल किए ही हैं लेकिन उस इतनी क्षमता वाला इंसान जानवरों के कुछ गुणों से प्रभावित हुए बिना नहीं रहता। जानवरों के इन्हीं  गुणों पर कई तरह की कहानियां भी बनी हैं कि कैसे लोगों ने पशु-पक्षियों से प्रेरणा पाकर बड़े बड़े काम कर दिए।

महान बुद्धिजीवी विद्वान आचार्य चाणक्य ने भी अपने ग्रंथ में इस बारे में बात की है और कुछ जानवरों के 5 ऐसे गुण बताए हैं जो सफलता की राह में मददगार साबित होते हुए सफर को आसान बना सकते हैं।

1. कौआ: कौटिल्य कौए से हर समय सतर्क और सावधान रहने की बात सीखने के लिए कहते हैं साथ ही बिना झिझक किए या भयभीत हुए पूरे इच्छाशक्ति के साथ प्रयास की चेष्टा के लिए भी प्रेरित करते हैं।
2. श्वान (कुत्ता): चाणक्य कहते हैं कि हर इंसान को कुत्ते से स्वामी भक्ति का गुण सीखना चाहिए। इसके साथ ही इसी जानवर जैसी नींद लेनी चाहिए, आहट मिलते ही आंख खुल जानी चाहिए।
3. शेर:  हर व्यक्ति को शेर की भांति कोई भी काम पूरी क्षमता और ताकत से करना चाहिए। शेर अपने शिकार पर पूरी शक्ति से हमलावर होता है। इसी तरह से इंसान को भी अपने काम में सफलता पाने के लिए पूरी शक्ति का इस्तेमाल करते हुए लगना चाहिए।


4. बगुला: किसी भी व्यक्ति को अपनी इंद्रियों पर किसी बगुले की तरह ही संयम रखते हुए अपनी शक्ति या क्षमता के अनुसार से ही किसी काम को करना चाहिए।
5. मुर्गा: चाणक्य नीति कहते हैं कि व्यक्ति को मुर्गे की तरह ही सूर्योदय से पहले उठना चाहिए। पीछे न हटते हुए लड़ाई में डटकर मुकाबला करना चाहिए। परिवार में मिल बांट कर खाना चाहिए और मुर्गे की तरह ही इंसान को भी अपने बल पर भोजन प्राप्त करने में लगे रहना चाहिए।

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