Chanakya niti : चाणक्य ने कहा- बुढ़ापे में चाहिए जीवन बेहतर तो इन पांच बातों का जवानी में रखें ख्याल

Chanakya's policies related to old age : आचार्य चाणक्य ने मनुष्य को अपनी नीतियों के माध्यम से बताया है कि यदि वह अपना बुढ़ापा सुख के साथ गुजारना चाहता है तो उसे पांच बातों का विशेष ख्याल रखना चाहिए।

Chanakya's policies related to old age, क्या है बुढ़ापे से जुड़ी चाणक्य की नीति
Chanakya's policies related to old age, क्या है बुढ़ापे से जुड़ी चाणक्य की नीति 

मुख्य बातें

  • अपने संस्कार को बेहतर रखें, तभी आपका बुढ़ापा बेहतर होगा
  • माता-पिता के साथ आपका व्यवहार बच्चे करते हैं गौर
  • पक्षपात या पद का गुमान कभी नहीं करना चाहिए

Chanakya niti : चाणक्य की कूटनीति आज के दौर में भी समकालीन है, क्योंकि वह किसी वस्तु, परिवेश या व्यक्ति विशेष के लिए नहीं थीं। चाणक्य ने अपनी नीतियां संपूर्ण मानव जगत के व्यवहार, सोच और काम करने के तरीकों के आधार पर बनाईं थीं। सदियों पूर्व बनी उनकी नीतियां उनके दूदर्शिता को बताती हैं कि वह अपने समय से आगे की चीजों समझते थे।

यही कारण था कि नंदवंश को उन्होंने उखाड़ फेंका और एक बालक में संपूर्ण राष्ट्र का राजा होने का गुण देखा था। चाणक्य ने मनुष्य को हर स्थितियों में संघर्ष करने और अपना सम्मान बनाए रखने की सीख दी है। इसी क्रम में उन्होंने यह भी बताया कि बुढ़ापे में यदि मनुष्य को सुख-शांति और ऐश्वर्य के साथ रहना है तो पांच बातों का ध्यान देना जरूरी है। आइए आज आपको इसके बारे में बताएं।

  1. बुढ़ापे में आपको रोटी आपकी औलाद नहीं, आपके दिए हुए संस्कार ही खिलाएंगे। आचार्य की नीतियां बताती हैं कि यदि आप अपने बच्चे के समक्ष खुद का अच्छा व्यक्तित्व नहीं पेश करेंगे को तो निश्चित मानें आपका बच्चा आपका कभी सम्मान नहीं करेगा और नहीं आपके प्रति सहानुभूति रखेगा। आप जैसे संस्कार अपने परिजनों या माता-पिता के साथ करते हैं, बच्चा बड़ा होकर वही आपके साथ निश्चित तौर पर दोहराएगा।

  2. आचार्य ने कहा है कि, ईश्वर चित्र में नहीं चरित्र में बसता है, अपनी आत्मा को मंदिर बनाओ। यानी यदि आप अपने चरित्र को बेहतर रखेंगे तो लोग आपकी पूजा स्वयं करने लगेंगे। आपका चरित्र ही आपके मान-सम्मान की वजह होता है। बुढ़ापे में कुछ साथ न दे लेकिन यदि आपका चरित्र स्वच्छ रहा है तो लोग आपका साथ कभी नहीं छोड़ेंगे।

  3. अगर आप एक बड़े पद पर हो तो किसी भी इंसान को छोटा एवं तुच्छ बिल्कुल ना समझे क्योंकि एक आम या छोटा व्यक्ति भी एक बड़े राजा को बर्बाद कर सकता है। चंद्रगुप्त ने नंदवंश की वृहद सेना को हरा कर यह बात साबित कर दी थी। यदि आपके अंदर अपने बड़े होने का गुमान हो तो उसे हटा दें, क्योंकि पद की प्रतिष्ठा या सम्मान कुर्सी तक ही होती है। कुर्सी हटने के बाद आपके कर्म आपके सम्मान का कारक बनते हैं।

  4. हमेशा याद रखें यदि आपको अपने बुढापे को सुख और शांति के साथ बीताना है तो आपको एक मददगार की तरह पेश आना चाहिए। एक व्यक्ति का कर्तव्य यह है कि किसी की भी मदद यदि आपके संभव में है तो आपको करनी चाहिए। आपकी आज की मदद आपके कल का संवारती और ये आपका सबसे बड़ा कर्तव्य है।

  5. पक्षपात करने से बचें, क्योंकि ये तरीका आपके अपनो से आपको दूर करेगा और चापलूसों के बीच घेर देगा। ऐसे में जब आपको जरूरत होगी तो आपके साथ खड़ा होने वाला कोई नहीं होगा।

तो चाणक्य की ये पांच बातें हर मनुष्य के लिए मायने रखती हैं। यदि जीवन में मान-सम्मान चाहिए और बुढ़ापा बेहतर तरीके से काटना है तो इन नीतियों से जरूर सीख लेनी चाहिए।

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