Bijasan Mandir, Brajeshwari Mandir: माता के दो चमत्कारी धाम, जां दर्शनमात्र से ही हो जाता है कष्टों का निवारण

आज हम आपको माता के दो ऐसे मंदिरों के बारे में बता रहे हैं, जहां पर पिंडी रूप में विराजमान माता अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण कर कष्टों का निवारण करती हैं।

Brajeshwari Mandir kangra
Brajeshwari Mandir kangra 

मुख्य बातें

  • इंदौर में स्थित बिजासन मंदिर में मां दुर्गा नौ पिंडियों के रूप में हैं विराजमान 
  • साल 1920 में हुआ था मां बिजासन मंदिर का निर्माण, तब से है आस्था का सबसे बड़ा केंद्र
  • कांगड़ा में स्थित मां ब्रजेश्वरी मंदिर नौ शक्तिपीठों में से है एक, दर्शन से होता है कष्टों का निवरण

सनातन हिंदु धर्म में शक्ति की पूजा का पर्व नवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। नवरात्रि मां दुर्गा की अराधना और उपासना का नौ दिवसीय पर्व है। चैत्र नवरात्रि में भी अब कुछ ही दिन बाकी हैं ऐसे में भक्तिमय माहौल पूरे देश में बनने लगा है। मां दुर्गा के भक्त इस पावन पर्व का बेसब्री से इंतजार करते हैं।

इस लेख के माध्यम से आज हम आपको मां दुर्गा के दो ऐसे मंदिरों के बारे में बता रहे हैं, जहां पर पिंडी रूप में विराजमान माता अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण कर कष्टों का निवारण करती हैं। जी हां मां दुर्गा का यह मंदिर पूरे देश दुनिया में मशहूर है। जो भी भक्त इस मंदिर में मां दुर्गा की पिंडी के दर्शन करता है उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और सभी कष्टों का निवारण होता है। आइए जानते हैं मां दुर्गा का यह चमत्कारिक मंदिर कहां हैं और क्या है इस मंदिर की मान्यता और इतिहास।

इंदौर में स्थित मां बिजासन मंदिर

मध्यप्रदेश के इंदौर में स्थित बिजासन मंदिर मां दुर्गा का प्रसिद्ध मंदिर है। मां भगवती के इस मंदिर को लेकर विशेष मान्यता है। यहां पर मां दुर्गा की नौ पिंडियां विराजमान हैं,मान्यता है कि मां दुर्गा के इस मंदिर के दर्शनोपरांत भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और सभी कष्टों का निवारण हो जाता है। कहा जाता है कि बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति इस मंदिर में मां के दर्शन मात्र से ही बीमारी से मुक्त हो जाता है औऱ बेरोजगारों को रोजगार मिल जाता है।

सुबह सवेरे सूरज की किरणें मंदिर के प्रांगण में पहुंचते ही भक्तों की लंबी कतारे यहां लग जाती हैं। इंदौर में मां दुर्गा के मंदिरों में बिजासन माता के मंदिर का अपना एक अलग ही महत्व है। मां वैष्णों देवी के मंदिर के समान इस मंदिर में भी मां दुर्गा की पत्थर की मूर्तियां विराजमान हैं, जो देवी दुर्गा क रूपों का प्रतिनिधित्व करती हैं। देवी दुर्गा के नौ रूपों का प्रतिदिन होने वाला नित्य नया श्रंगार माता के भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करता है। मां दुर्गा के इस मंदिर को लेकर विशेष मान्यता है।

मंदिर का इतिहास

मां बिजासन के मंदिर को लेकर कई ऐतिहासिक कहानियां मौजूद हैं, लेकिन मां दुर्गा की यह पिंडियां कब और कैसे स्थापित हुई इस बात का कोई ऐतिहासिक प्रमाण मौजूद नहीं है। मंदिर के पुजारियों के अनुसार सैकड़ो सालों से मां बिजासन का यह धाम आस्था का केंद्र बना हुआ है, जिन्हें भक्त मां दुर्गा का रूप मानकर पूजते आ रहे हैं औऱ मां अपने भक्तों की मुराद पूरी कर भक्तों के कष्टों का निवारण करती हैं। इस मंदिर के निर्माण को लेकर कहा जाता है कि यह टेकरी होल्कर राजघराने का शिकारगाह हुआ करता था। एक बार शिकार करते हुए राजघराने की नजर इस माता के इस मंदिर पर पड़ी, इसके बाद साल 1920 में यहां मां दुर्गा के नौ पिंडियों का पक्के मंदिर का निर्माण करवाया गया। इस दिन से यहां पर मां दुर्गा के भक्तों का तांता लगा रहता है।

तालाब को लेकर है विशेष मान्यता

मंदिर के प्रांगण में एक तालाब भी स्थित है, जिसमें मछलियां हैं। यहां पर भक्त माता के दर्शनोपरांत मछलियों को दाना खिलाते हैं, भक्तों का मानना है कि तालाब में मछलियों को दाना खिलाने से उनकी मुरादें माता अवश्य पूरी करेंगी। मंदिर के प्रांगण से शहर का मनोरम दृश्य भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

मां ब्रजेश्वरी मंदिर आस्था का दूसरा केंद्र

वहीं कांगड़ा में स्थित ब्रजेश्वरी मंदिर माता के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यहां पर मां के तीन पिंडियों की पूजा होती है। पहाड़ों को नहलाती सूर्यदेव की किरणें औऱ भोर के आगमन पर कांगड़ा की यह विशाल पर्वत श्रंखला को देख ऐसा लगता है कि मानो किसी निपुण जौहरी ने घाटी पर सोने की चादर ही मढ़ दी हो। इसकी खूबसूरती को लफ्जो में बयां कर पाना नामुमकिन है, मंदिर के आसपास का यह मनोरम दृश्य आपको माता की भक्ति में लीन कर देगा। मान्यता है कि इस स्थान पर माता सती का दाहिना वक्ष गिरा था, इसलिए ब्रजेश्वरी शक्तिपीठ में माता के वक्ष की पूजा की जाती है।

ब्रजेश्वरी को लेकर पौराणिक कथा 

कांगड़ा के नगरकोट में स्थित मां ब्रजेश्वरी के इस मंदिर को लेकर पौराणिक कथाओं में भी वर्णन किया गया है। कहा जाता है कि जब माता सती ने पिता के द्वारा भगवान शिव का किए गए अपमान से कुपित होकर अपने पिता राजा दक्ष के द्वारा कराए जा रहे यज्ञ कुंड में कूदकर अपने प्रांण त्याग दिए थे। तब भगवान शिव क्रोधित होकर माता सती के देह को लेकर श्रष्टि के तीनोलोक में घूम रहे थे, भगवान शिव के इस क्रोध को शांत कराने के लिए श्री हरि भगवान विष्णु ने अपने चक्र से माता सती के देह को अलग कर दिया। माता सती के देह के टुकड़े धरती पर जहां जहां गिरे वह स्थल शक्तिपीठ कहलाया। उन्हीं शक्तिपीठों में से एक माता सती का यह मंदिर मां के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है।

माता के मंदिर को लेकर मान्यता

मां ब्रजेश्वरी मंदिर को लेकर मान्यता है कि सच्चे मन से माता की पूजा अर्चना करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं औक दुखों का निवारण होता है। सनातन हिंदु धर्म में इस मंदिर को लेकर अनेको मान्यताएं हैं।

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