Paush Maas 2021: पौष मास में सूर्यदेव के 7 चमत्कारिक मंत्र, संक्रांति तक जाप करने से पूरा होगा हर काम

Chanting these 7 mantras of Suryadev: पौष मास भगवान सूर्य को समर्पित होता है। यदि मकर संक्रांति तक लगातार सूर्य के प्रिय 7 मंत्र का जाप कर मनुष्य कर ले तो उसके रुके कार्य अवश्य पूरे हो जाएंगे।

Chanting these 7 mantras of Suryadev, सूर्य देव के 7 मंत्र
Chanting these 7 mantras of Suryadev, सूर्य देव के 7 मंत्र 

मुख्य बातें

  • पौष मास में प्रति दिन संक्रांति तक सूर्य को जल दें।
  • रविवार के दिन विशेष रूप से सूर्य की पूजा करें।
  • रविवार के दिन केसरिया रंग के वस्त्र धारण।

पौष मास में प्रति दिन संक्रांति तक सूर्य को जल देना और उनकी आराधना करना बहुत ही पुण्य की प्राप्ति कराता है। सूर्यदेव को प्रतिदिन तांबे के लोटे में अक्षत और लाल पुष्प डाल कर जल देना बहुत ही पुण्ककारी होता है। साथ ही यद आप सूर्य के 7 प्रिय मंत्रों का जाप कर लें तो शायद ही आपके जीवन में कोई समस्या रहेगी। यदि आप प्रतिदिन सूर्य की आराधना न कर सकें तो कम से कम रविवार के दिन विशेष रूप से सूर्य की पूजा करें। रविवार का दिन सूर्य देवता की आराधना के लिए माना गया है। पौष मास में सूर्यदेव को जल देकर उनके विशेष मंत्र का जाप आपकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाएंगी।

हिंदू धर्म में प्रत्येक वार किसी न किसी ग्रह और देवता को समर्पित होता है। मास में भगवान सूर्य की पूजा करना बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। तो चलिए आपको सूर्य देव के कुछ ऐसे ही मंत्र बताएं जो आपके जीवन की सारी रुकावटों को दूर कर सकते हैं।

  1. ॐ घृ‍णिं सूर्य्य: आदित्य:
  2. ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा.
  3. ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:
  4. ॐ ह्रीं घृणिः सूर्य आदित्यः क्लीं ॐ
  5. ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय नमः
  6. ॐ सूर्याय नम:
  7. ॐ घृणि सूर्याय नम:

रविवार को यह उपाय जरूर करें

रविवार के दिन केसरिया रंग के वस्त्र धारण करें और सूर्य देव की उपासना के साथ सूर्य देव के निमित्त व्रत करें और व्रत न कर सकें तो इस दिन नमक का त्याग करें। साथ ही सूर्य को प्रबल बनाने के लिएगुड़, लाल पुष्प, तांबा, गेहूं आदि का दान करें और माणिक्य रत्न या बेल मूल की जड़ी धारण करें। एक मुखी रुद्राक्ष धारण करना भी सूर्य को कुंडली में प्रबल बनाता है।

शास्त्र में सूर्य को एक प्रभावशाली ग्रह माना गया है. इसीलिए सूर्य को ग्रहों को राजा भी कहा जाता है। सूर्य ऊर्जा और आत्मा का कारक भी है। जिस व्यक्ति की जन्म कुंडली में सूर्य मजबूत स्थिति में विराजमान होते हैं और शुभ ग्रहों से दृष्ट होते हैं ऐसे जातक राजा के समान होते हैं। सूर्य प्रधान व्यक्ति को जीवन में उच्च पद और मान सम्मान प्राप्त होता है।

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