Chanakya Niti: सांप के उदाहरण से आचार्य चाणक्य ने मनुष्यों को दिया है बड़ा ज्ञान, ना करें अपनी कमजोरी जाहिर

Chanakya niti: महान लेखक, अर्थशास्त्री और विचारक आचार्य चाणक्य ने लोगों के बेहतरीन जीवन के लिए कई विचार सुझाए हैं। आचार्य चाणक्य का मानना है कि लोगों को कभी भी अपनी कमजोरी दूसरों के सामने जाहिर नहीं करनी चाहिए।

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कमजोर लोग ना करें अपनी कमजोरी जाहिर  

मुख्य बातें

  • बेहतर जीवन के लिए आचार्य चाणक्य ने मनुष्यों को दिए हैं कई लाभदायक विचार।
  • आचार्य चाणक्य के मुताबिक लोगों को नहीं करनी चाहिए अपनी कमजोरी जाहिर।
  • इंसान को अपनाना चाहिए सांप का गुण, बेहतर जीवन के लिए आचार्य ने कहा है इसे बेहतर।

Chankaya niti: चाणक्य ने अपने नीति ग्रंथ में कई ऐसी महत्वपूर्ण बातों का उल्लेख किया है जो इंसान के सुखी जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। आचार्य चाणक्य द्वारा सिखाई गई यह बातें मनुष्य के जीवन के लिए बहुत मददगार साबित होती हैं। जो लोग समाज में अपनी अच्छी पहचान बनाना चाहते हैं तथा लोगों से इज्जत कमाना चाहते हैं उन्हें आचार्य चाणक्य द्वारा दी गई बातों को जरूर अपनाना चाहिए। आचार्य चाणक्य ने अपने ग्रंथ में यह लिखा है कि लोगों को सांप का गुण अपनाना चाहिए। मतलब जब कोई सांप जहरीला नहीं होता है तो वह अपनी फुफकारने की विशेषता नहीं छोड़ता है। जब भी उसके सामने कोई दुश्मन आता है तो वह फुफकार कर उसे डराने की कोशिश करता है ताकि उसका दुश्मन डर कर उस पर हमला ना करे। ठीक वैसे ही जो लोग कमजोर होते हैं उन्हें दूसरों के सामने अपनी कमजोरी को जाहिर नहीं करना चाहिए। 


यहां जानें, आचार्य चाणक्य क्यों लोगों को अपनी कमजोरी जाहिर ना करने की सलाह दे गए हैं। 

लोग उठाएंगे फायदा

आचार्य चाणक्य ने बताया है कि लोगों के सामने अपनी कमजोरी जाहिर करना मतलब खुद के पांव पर कुल्हाड़ी मारना जैसा है। आचार्य चाणक्य यह मानते हैं कि लोगों के सामने कभी भी अपनी कमजोरी जाहिर नहीं करनी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि जब लोगों को आपकी कमजोरी का पता चलता है तब वह इसका फायदा उठा सकते हैं। जो लोग आपसे नफरत करते हैं या आपसे हुई कोई भूल का बदला लेना चाहते हैं तब आपकी कमजोरी उनके लिए शक्ति बन सकती है। 

बिछड़ सकते हैं साथी

जब इंसान हद से ज्यादा दुखी और हताश होता है तब वह पूरी तरह से टूट जाता है। ऐसी परिस्थिति बहुत संवेदनशील होती है। हो सकता है कि आपकी कमजोरी का पता लगते ही आपके प्रियजन आपका साथ छोड़ दें। ऐसी परिस्थिति में आप जिन लोगों का सहारा पाना चाहते हैं हो सकता है कि वह आपको निर्बल समझ कर आपसे दूर चले जाएं। इसीलिए आचार्य चाणक्य यह कहते हैं कि लोगों को सांप का यह गुण अपनाना चाहिए। 

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