Tara Kab Niklega Aaj Live Updates: अहोई अष्टमी पर तारा कब निकलेगा, यहां जानें अहोई व्रत की पूजा विधि
Tara Kab Niklega Aaj Live Updates: अहोई अष्टमी पर तारा कब निकलेगा, यहां जानें अहोई व्रत की पूजा विधि
Ahoi Ashtami 2023 Puja Muhurat (अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त 2023)
अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त - 5 नवंबर की शाम 05:34 से 06:53 तक
तारों को देखने का समय - 5 नवंबर को 05:59 PM पर
अहोई अष्टमी के दिन चन्द्रोदय समय - 12:04 AM (6 नवंबर 2023)
अष्टमी तिथि प्रारम्भ - 05 नवम्बर 2023 को 12:59 AM बजे
अष्टमी तिथि समाप्त - 06 नवम्बर 2023 को 03:18 AM बजे
Ahoi Ashtami Puja Vidhi (अहोई अष्टमी व्रत की पूजन विधि)
-अहोई अष्टमी के दिन सुबह-सुबह स्नान कर लें और स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें।
-फिर गेरु से अहोई माता का चित्र बनाएं या आप चाहें तो बाज़ार से भी बना बनाया अहोई माता का चित्र भी ला सकते हैं।
-सूर्यास्त के बाद तारे निकलने पर अहोई माता की पूजा आरंभ करें।
-पूजन में जल से भरा एक कलश रखें। सफेद धातु या चांदी की अहोई के साथ फूल, उबले हुए चावल, दूध, हलवा और घी का दीपक रखें।
-अहोई माता को रोली से तिलक लगाएं और फिर उन्हें फूल अर्पित करें। पूजा की शुरुआत में घी का दीपक जलाएं।
-फिर अहोई माता को दूध और उबले हुए चावल अर्पित करें।
-फिर गेहूं के सात दाने और दक्षिणा स्वरूप कुछ पैसे अपने हाथ में लें और अहोई अष्टमी की व्रत कथा सुनें।
-पूजा संपन्न होने के बाद गेहूं के दाने और दक्षिणा अपनी सास को देकर उनका आशीर्वाद लें। इसके बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर अपने व्रत का पारण करें।
Laxmi Ji Ki Aarti: लक्ष्मी जी की आरती
नमस्तुभ्यं सुरेश्वरि ।
हरि प्रिये नमस्तुभ्यं,
नमस्तुभ्यं दयानिधे ॥
पद्मालये नमस्तुभ्यं,
नमस्तुभ्यं च सर्वदे ।
सर्वभूत हितार्थाय,
वसु सृष्टिं सदा कुरुं ॥
ॐ जय लक्ष्मी माता,
मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निसदिन सेवत,
हर विष्णु विधाता ॥
उमा, रमा, ब्रम्हाणी,
तुम ही जग माता ।
सूर्य चद्रंमा ध्यावत,
नारद ऋषि गाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥
दुर्गा रुप निरंजनि,
सुख-संपत्ति दाता ।
जो कोई तुमको ध्याता,
ऋद्धि-सिद्धि धन पाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥
तुम ही पाताल निवासनी,
तुम ही शुभदाता ।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशनी,
भव निधि की त्राता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥
जिस घर तुम रहती हो,
ताँहि में हैं सद्गुण आता ।
सब सभंव हो जाता,
मन नहीं घबराता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥
तुम बिन यज्ञ ना होता,
वस्त्र न कोई पाता ।
खान पान का वैभव,
सब तुमसे आता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥
शुभ गुण मंदिर सुंदर,
क्षीरोदधि जाता ।
रत्न चतुर्दश तुम बिन,
कोई नहीं पाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥
महालक्ष्मी जी की आरती,
जो कोई नर गाता ।
उँर आंनद समाता,
पाप उतर जाता ॥
॥ॐ जय लक्ष्मी माता...॥
ॐ जय लक्ष्मी माता,
मैया जय लक्ष्मी माता ।
तुमको निसदिन सेवत,
हर विष्णु विधाता ॥
