आज साल का सबसे छोटा दिन और लंबी रात, जानिए यह कैसे होता है, गूगल ने भी किया सेलिब्रेट

साइंस
Updated Dec 22, 2019 | 09:21 IST | टाइम्स नाउ डिजिटल

आज साल भर में सबसे लंबी रात होगी और सबसे छोटा दिन होगा। इस भौगोलिक घटना को गूगल ने डूडल बनाकर सेलिब्रेट किया है।

आज साल का सबसे छोटा दिन और लंबी रात, जानिए यह कैसे होता है, गूगल ने भी किया सेलिब्रेट
आज साल का सबसे छोटा दिन और लंबी रात 

नई दिल्ली: सर्दियों का मौसम चल रहा है। दिल्ली-एनसीआर समेत देश के कई हिस्सों में कड़ाके की ठंड पड़ रही है क्योंकि तापमान में भारी गिरावट हुई है। आज साल का सबसे छोटा दिन है और वर्ष की लंबी रात है। यह भौगोलिक घटनाक्रम है। जो प्रत्येक साल 22 दिसंबर को घटित होता है। आज के दिन पृथ्वी का उत्तरी गोलार्ध सूर्य से सर्वाधिक दूरी पर होता है और दक्षिणी गोलार्ध बहुत करीब होता है इसलिए सूर्य किरणें सबसे अधिक पृथ्वी के दक्षिण हिस्से में चमकती रहती हैं। उत्तरी हिस्से में कम पहुंचती हैं। गूगल ने भी डूडल के जरिए आज शीतकालीन संक्रांति का सबसे छोटा दिन और वर्ष की सबसे लंबी रात को सेलिब्रेट किया।

शब्द "संक्रांति" की उत्पत्ति लैटिन के सॉलिस्टिटियम से हुई है जिसका अर्थ है "सूर्य अभी भी खड़ा है", जब 'सूर्य के पथ की गति' कुछ समय के लिए रुक जाती है। संक्रांति इसलिए होती है क्योंकि पृथ्वी अपने घूर्णन के अक्ष पर लगभग 23.5 डिग्री झुकी हुई है और झुकाव के कारण प्रत्येक गोलार्ध को वर्ष भर अलग-अलग मात्रा में सूर्य का प्रकाश प्राप्त होता है।

दिसंबर संक्रांति वह परिघटना है जब सूर्य की सीधी किरणें भूमध्य रेखा के दक्षिण में  मकर रेखा के साथ दक्षिण की ओर पहुंचती हैं। उत्तरी गोलार्ध में यह दिसंबर संक्रांति है और दक्षिणी गोलार्ध में इसे जून संक्रांति के रूप में जाना जाता है। संक्रांति उत्तरी गोलार्ध में तब होती है जब सूर्य भूमध्य रेखा के 23.5 डिग्री दक्षिण में स्थित मकर रेखा के ऊपर होता है। पृथ्वी की धुरी में यह झुकाव वर्ष के अलग-अलग समय में ग्रह के अलग-अलग हिस्सों में सूर्य के संपर्क में आता है।

दिसंबर में, जैसे ही पृथ्वी का उत्तरी ध्रुव सूर्य से दूर होता है, दक्षिणी गोलार्ध को अधिकतम सूर्य का प्रकाश मिलता है। सूर्योदय और सूर्यास्त का सही समय दो चीजों पर निर्भर करता है वह है अलग-अलग टाइम जोन के भीतर भौगोलिक स्थिति और अक्षांश। कई लोग स्टोनहेंज में उस क्षण को पकड़ने के लिए इकट्ठा होते हैं जब सूरज सीधे प्रसिद्ध पत्थरों के साथ संरेखित होता है।
 

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