Ranchi Murder Husband: रांची में हत्यारे पति को मिली आजीवन कारावास की सजा, 4 साल पहले पत्नी की कर दी थी हत्या

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jun 24, 2022, 07:18 PM IST

Ranchi Civil court: पत्नी की हत्या करने के मामले में कोर्ट ने आरोपी पति को दोषी करार दिया है। रांची सिविल कोर्ट ने दोषी पति को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। महिला की हत्या साढ़े चार साल पहले की गई थी। महिला के भाई ने आरोपी के खिलाफ थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी।

Ranchi Murder Husband: रांची में हत्यारे पति को मिली आजीवन कारावास की सजा, 4 साल पहले पत्नी की कर दी थी हत्या

Ranchi Murder Husband: रांची सिविल कोर्ट ने हत्या मामले की सुनवाई करते हुए शुक्रवार की दोपहर आरोपी पति को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर न्यायामुक्त दिनेश राय की अदालत ने यह फैसला सुनाया है। दरअसल, 6 दिसंबर 2017 को कांके थाना क्षेत्र निवासी फरहत अंजुम उर्फ रूही परवीन की हत्या उसके पति ने कर दी थी। 

फरहत अंजुम के भाई जमील अंसारी को ग्रामीणों ने बहन की हत्या की जाने की सूचना दी थी। जमील अपने परिवार के साथ बहन की ससुराल पहुंचा था, जहां उन्हें मालूम हुआ कि 5 दिसंबर को ही फरहत की हत्या कर दी गई थी। इस पर जमील ने कांके थाने में अपने बहनोई सिकंदर अंसारी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज करवाया था। 

अभियोजन पक्ष से कोर्ट में 10 गवाह किए गए पेश

कोर्ट में सुनवाई के समय अभियोजना पक्ष की ओर से 10 गवाहों को पेश किया गया था। वहीं, बचाव पक्ष की ओर से एक भी गवाह नहीं आया। कोर्ट ने दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद अभियुक्त को आईपीसी की धारा 302 के तहत दोषी करार दे दिया। अहम बात है कि आरोपी सिकंदर अंसारी ने हत्या के बाद खुद अपने सगे भाई जहांगीर अंसारी के सामने कबूला था कि उसने ही अपनी पत्नी को मार डाला। इसके लिए उसे बहुत अफसोस भी है। 

बच्चों को बचाने के लिए ग्रामीणों ने आरोपी को बांध दिया था

पत्नी की हत्या किए जाने के बाद बच्चों को भी आरोपी ने मार डाला, इसलिए ग्रामीणों ने उसको रस्सी से बांध दिया था। फिर कांके पुलिस और महिला के मायके वालों को सूचना दी। जब तक पुलिस नहीं आ गई ग्रामीणों ने आरोपी सिकंदर को बंधक बनाए रखा। अब आरोपी आजीवन अपनी पत्नी की हत्या के जुर्म में जेल में कैद रहेगा। कोर्ट के फैसले से मृत महिला के मायके वालों में खुशी है। सभी ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका में पूरा विश्वास था। वह जानते थे कि सच की जीत होगी और फरहत की आत्मा को शांति मिलेगी। 

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