मां और चाचा संग मिल चाकू ले पति की कर दी थी धुनाई, पत्नी के खिलाफ कोर्ट पहुंचा केस तो मिली यह सजा

Pune Crime News: सिटी कोर्ट ने आरोपी महिला को अपने पीड़ित पति को 12, 000 रुपये का मुआवजा देने के आदेश दिए हैं।

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पत्नी की पिटाई से परेशान पति पहुंचा कोर्ट, मिला न्याय   |  तस्वीर साभार: Representative Image
मुख्य बातें
  • 58 वर्षीय महिला को कोर्ट ने अनोखी सजा सुनाई
  • कोर्ट ने महिला को अच्छे व्यवहार का प्रदर्शन करने का दिया है निर्देश
  • नौ साल पुराने मामले में कोर्ट ने सुनाई खास सजा

Pune Crime News: लगभग नौ साल पहले अपनी मां और रिश्तेदारों के साथ अपने पति पर हमला करने के लिए दोषी ठहराई गई 58 वर्षीय महिला को कोर्ट ने अनोखी सजा सुनाई है। सिटी कोर्ट ने महिला को अपने पीड़ित पति को 12, 000 रुपये का मुआवजा देने के आदेश दिए हैं। साथ ही एक साल के लिए शांति बनाए रखने और अच्छे व्यवहार का प्रदर्शन करने का निर्देश दिया है। वकाड निवासी अनीता सारद (66), उसकी मां हीराबाई दिघे (78), चाचा बालासाहेब खरवास (71) और विश्वनाथ पठारे (65) ने नवंबर 2013 में एक पारिवारिक विवाद को लेकर राजेंद्र सरद के साथ मारपीट की थी।

इन सभी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा के तहत मामला दर्ज किया गया था। अनीता और राजेंद्र सरद के घर में अक्सर झगड़ा होता रहता था। 4 नवंबर 2013 को उनका विवाद हुआ था। विवाद को सुलझाने के लिए अनीता की मां और दो चाचा उनके घर गए थे। हालांकि, बहस बढ़ गई और चारों आरोपियों ने राजेंद्र पर चाकू से हमला कर दिया। इसके बाद पीड़ित राजेंद्र ने इन सभी के खिलाफ हिंजेवाड़ी थाने में जाकर शिकायत दर्ज कराई। मामले की सुनाई करने वाले न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी एसजे डोलारे ने कहा है कि घटना के चश्मदीद गवाहों ने मामले का समर्थन किया।

कोर्ट ने सुनाई ये अनोखी सजा

जांच अधिकारी और चिकित्सा अधिकारी ने यह साबित किया कि राजेंद्र पर चाकू से हमला करने से उसके दोनों हाथों पर चोट के निशान हैं। इस तरह अभियोजन पक्ष ने साबित कर दिया है कि आरोपी की तरफ से राजेंद्र पर चाकू से हमला किया गया था। जज ने कहा कि घटना के बाद से दंपति एक साथ नहीं रह रहे हैं। दंपति का एक बेटा और एक बेटी है। बेटी राजेंद्र के साथ जबकि एक बेटा अनीता के साथ रहता है। इसलिए कपल के बीच हुए विवाद ने उन पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है।

मुकदमे के लंबित रहने के दौरान अनीता के अच्छे व्यवहार पर ध्यान देते हुए अदालत ने कहा है कि यह मामला पिछले आठ वर्षों से अदालत में लंबित है। इस अवधि के दौरान आरोपी नियमित रूप से अदालत में उपस्थित होती रही हैं। अन्य आरोपियों की उम्र और अस्वस्थता और अनीता के ऊपर बच्चे की जिम्मेदारी को देखते हुए उन्हें जेल में बंद नहीं किया जाना चाहिए। इसलिए आरोपी को अच्छे आचरण की आजमाइश का मामला है।

अदालत ने अनीता और उसके रिश्तेदारों को आरोपों से बरी कर दिया लेकिन उन्हें 3,000 रुपये के जुर्माने से दंडित किया। अदालत ने अनीता को एक वर्ष की अवधि के भीतर अदालत में पेश होने और इस बीच शांति और अच्छा व्यवहार बनाए रखने का निर्देश दिया।

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