अक्सर हमारे साथ होता है कि डॉक्टर की क्लिनिक से निकलने के बाद याद आता है- अरे, यह तो बताया ही नहीं! ये तो पूछना ही भूल गए। अगली बार फोन के नोट्स में थोड़ी तैयारी कर लें। ये 5 बातें लिखी होंगी तो अपनी परेशानी समझाना आसान होगा।
सिर्फ तबीयत ठीक नहीं- लिखने के बजाय लक्षण नोट करें। दर्द कहां है? बुखार या चक्कर कब से हैं? परेशानी लगातार रहती है या बीच-बीच में होती है? शुरुआत की तारीख याद हो तो वह भी लिख लें।
खाने के बाद तकलीफ बढ़ती है या खाली पेट? चलने पर दर्द होता है या आराम करते हुए भी? नींद और रोज के काम पर कितना असर पड़ रहा है? आपने जो महसूस किया है, वही लिखें। वजह का अनुमान लगाना जरूरी नहीं।
हर दवा का नाम, खुराक और लेने का समय नोट करें। विटामिन, सप्लीमेंट, आयुर्वेदिक उत्पाद और खुद से ली गई दर्द की गोली भी शामिल करें। नाम याद नहीं रहता तो पैक की साफ फोटो रख लें। हाल में कोई दवा शुरू या बंद की है तो बताएं।
डायबिटीज, थायरॉइड, बीपी, पुराने ऑपरेशन या अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी लिखें। किसी दवा से एलर्जी हुई हो तो उसका नाम और क्या प्रतिक्रिया हुई थी, यह भी नोट करें। पिछली पर्चियां और जांच रिपोर्ट साथ रखें।
क्या जांच की जरूरत है? दवा कितने दिन लेनी है? किन बदलावों पर ध्यान देना है? दोबारा कब दिखाना है? जो सवाल सबसे ज्यादा परेशान कर रहा है, उसे सूची में सबसे ऊपर रखें और बातचीत की शुरुआत में पूछें।
घर जाकर मुझे क्या करना है और किन लक्षणों पर तुरंत मदद लेनी है- यह भी पूछना जरूरी है। दवा का समय, जांच और अगली मुलाकात फोन में नोट कर लें। कोई बात समझ न आए तो उसी समय दोबारा पूछें।