हर माता-पिता की ख्वाहिश होती है कि वो अपने बच्चे को अच्छी परवरिश दें। इसके लिए पेरेंट्स, पेरेंटिंग के कई अलग-अलग तरीके अपनाते हैं और हर तरीका बच्चे के विकास पर प्रभाव डालता है। इन दिनों पेरेंटिंग का जो तरीका चर्चा का विषय बना हुआ है वो है सिटरवाइजिंग पेरेंटिंग। ऐसे में चलिए जानते हैं क्या है सिटरवाइजिंग पेरेंटिंग और क्यों इस नए पेरेंटिंग का क्रेज बढ़ता जा रहा है।
Sitterwise parenting.
क्या होता है सिटरवाइजिंग पेरेंटिंग?
सिटरवाइजिंग पेरेंटिंग इन दिनों काफी ट्रेंड में है और पेरेंट्स को पेरेंटिंग का ये तरीका काफी पसंद आ रहा है। सिटरवाइजिंग पेरेंटिंग बच्चों की परवरिश का एक आधुनिक तरीका है जिसमें माता-पिता अपने बच्चों के साथ लगातार पीछे-पीछे भागने या हर चीज़ में हस्तक्षेप करने के बजाय, उन्हें एक ही जगह पर बैठकर निगरानी में रखते हुए खुद से खेलने और सीखने का मौका देते हैं। इसमें माता-पिता बच्चों की हर एक्टिविटी पर नज़र तो रखते हैं, लेकिन उन्हें फ्री छोड़ देते हैं। यह बच्चों और माता-पिता दोनों के लिए फायदेमंद माना जाता है। इस पेरेंटिंग में फोकस बच्चों के साथ अच्छी बॉन्डिंग पर किया जाता है। सिटरवाइजिंग पेरेंटिंग बच्चे और पेरेंट्स के बीच गैप कम करने का काम करते हैं।
कैसे अलग है सिटरवाइजिंग पेरेंटिंग?
पेरेंट्स अपने बच्चों की परवरिश को लेकर काफी एक्टिव हो चुके हैं। आज के इस मॉडर्न वर्ल्ड में पेरेंट्स अपने बच्चों को पारांपरिक तरीकों से परवरिश देने की बजाय न्यू पेरेंटिंग टेक्निक फॉलो कर रहे हैं। सिटरवाइजिंग पेरेंटिंग भी एक मॉडर्न पेरेंटिंग स्टाइल है। इस पेरेंटिंग का मुख्य उद्देश्य बच्चों और पेरेंट्स के बीच गैप को कम करना है। सिटरवाइजिंग पेरेंटिंग में बच्चों और माता-पिता के बीच अच्छी बॉन्डिंग बनती है।
इस नए पेरेंटिंग तरीके का क्रेज क्यों बढ़ रहा है और क्या है इसके फायदे
बच्चों बनते हैं आत्मनिर्भर
सिटरवाइजिंग पेरेंटिंग में बच्चे अपनी पसंद की चीजें करने के लिए फ्री होते हैं। पेरेंट्स दूर से बस उनकी एक्टिविटी को मॉनिटर करते हैं। ऐसे में जब बच्चों को खुद से चीज़ें करने और समस्याओं का सामना करने का मौका मिलता है, तो उनमें आत्मनिर्भरता बढ़ती है और वे अपनी समस्याओं को खुद हल करना सीखते हैं। यह उनके आत्मविश्वास को भी बढ़ाता है।
समय की बचत और तनाव में कमी
आज की बिजी लाइफस्टाइल में माता-पिता अक्सर बच्चों के पीछे भागते-भागते थक जाते हैं। सिटरवाइजिंग पेरेंटिंग के जरिए वो अपने बच्चों पर नज़र तो रखते हैं, लेकिन दूर से बैठकर। जिससे समय की बचत होती है। इससे उनके तनाव में कमी आती है।
मजबूत बॉन्डिंग
यह तरीका बच्चों और माता-पिता के बीच गैप कम करने और बॉन्डिंग को मजबूत करने में मदद करता है। माता-पिता बच्चों को दूर से देखकर उनके इंट्रेस्ट और व्यक्तित्व को बेहतर ढंग से समझ पाते हैं।
बच्चों के लिए 'मी टाइम'
इस पेरेंटिंग स्टाइल में बच्चों को अकेला खेलने और खुद के साथ समय बिताने का मौका मिलता है, जो उनके सोचने-समझने के तरीकों को बढ़ाता है।
