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टिप-टिप बरसता पानी... मन क्यों हो जाता है भारी? बारिश आते ही बिना वजह उदासी महसूस होती है, जानिए क्या है Monsoon Blues

बारिश का मौसम हर किसी के लिए खुशियां नहीं लाता। कई लोगों का मूड इस दौरान उदास, थका हुआ और चिड़चिड़ा रहने लगता है। इसे Monsoon Blues कहते है। जानिए इसके कारण, लक्षण और इससे बाहर निकलने के आसान उपाय।

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What is Monsoon Blues
Authored by: Avni Bagrola
Updated Jul 6, 2026, 20:21 IST
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बारिश की पहली फुहार, ठंडी हवा और मिट्टी की खुशबू ज्यादातर लोगों को अच्छी लगती है। लेकिन हर किसी के लिए मानसून इतना खुश होने या नाचने-गाने वाला मौसम नहीं होता। कुछ लोग इस मौसम में बिना किसी खास वजह के उदास महसूस करने लगते हैं। उनका किसी काम में मन नहीं लगता, बार-बार नींद आती है, थकान बनी रहती है और छोटी-छोटी बातें भी परेशान करने लगती हैं। इस तरह की चीजें महसूस होने वाली स्थिति Monsoon Blues कहते हैं।

यह कोई अलग बीमारी नहीं, बल्कि मौसम बदलने के दौरान मूड और डेली रूटीन में आने वाले बदलावों का असर हो सकता है। लगातार बादल, कम धूप, नमी और बदली हुई लाइफस्टाइल इसकी वजह बन सकती है। अच्छी बात यह है कि कुछ आसान आदतों को अपनाकर इस स्थिति से काफी हद तक बचा जा सकता है। आइए जानते हैं कि मानसून ब्लूज़ क्या होता है और इसका हमारे मन और शरीर पर क्या असर पड़ता है।

क्या होता है Monsoon Blues?

Monsoon Blues ऐसी स्थिति है जिसमें बारिश के मौसम में व्यक्ति पहले की तुलना में ज्यादा उदास, सुस्त या मानसिक रूप से थका हुआ महसूस कर सकता है। हर व्यक्ति में इसके लक्षण अलग हो सकते हैं। किसी को सिर्फ आलस महसूस होता है, तो किसी का मूड लंबे समय तक खराब रह सकता है।

Monsoon Blues

Monsoon Blues

बारिश का मौसम मूड पर क्यों असर डालता है?

मानसून में कई दिनों तक धूप कम निकलती है। इससे शरीर की बॉडी क्लॉक और मूड रेगुलेशन पर असर पड़ सकता है। मौसम बदलने के कारण दिनचर्या भी बदल जाती है। लोग कम बाहर निकलते हैं, फिजिकल एक्टिविटी भी कम हो जाती है और कई बार अकेलापन भी महसूस होने लगता है। यही बातें धीरे-धीरे मूड को प्रभावित कर सकती हैं। जिसकी वजह से बारिश के मौसम में कुछ लोगों को काफी उदास सा महसूस होने लगता है।

क्या आपको है Monsoon Blues?

मानसून ब्लूज के कुछ साधारण से लक्षण हो सकते हैं। जिन्हें पढ़कर आप भी समझ सकते हैं कि, कहीं बारिश आते ही अगर आपका भी मूड खराब हो जाता है। तो उसकी वजह ये तो नहीं..

  • बिना वजह उदासी महसूस होना।
  • हर समय थकान या सुस्ती रहना।
  • काम में मन न लगना।
  • ज्यादा सोने या बार-बार नींद आने का मन करना।
  • छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन होना।
  • दोस्तों या परिवार से मिलने का मन न करना।
  • किसी भी काम में पहले जैसी खुशी महसूस न होना।
Monsoon Blues Symptoms

Monsoon Blues Symptoms

क्या हर उदासी Monsoon Blues होती है?

हालांकि ये भी समझना जरूरी है कि, हर तरह की उदासी मानसून ब्लूज नहीं है। कभी-कभी एक-दो दिन मूड खराब होना सामान्य बात है। लेकिन अगर उदासी कई हफ्तों तक बनी रहे, डेली लाइफ प्रभावित होने लगे या व्यक्ति लगातार निराश महसूस करे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी हो सकता है।

ये भी हो सकती है बड़ी वजह

घर से बाहर निकलना, सूरज की रोशनी में कुछ समय बिताने से बॉडी हैप्पी और पॉजिटिव रहती है। लेकिन वहीं बारिश में लोग अक्सर घर या ऑफिस के अंदर ज्यादा समय बिताते हैं। धूप कम मिलने और खुली हवा में कम जाने से मन पर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि मानसून में कई लोग खुद को पहले से ज्यादा सुस्त महसूस करते हैं।

Reason of Monsoon Blues

Reason of Monsoon Blues

Monsoon Blues से कैसे बचें?

अगर आपको भी बारिश वाले इस मौसम में बेवजह उदासी महसूस हो रही है। तो आप अपनी लाइफस्टाइल में कुछ छोटे मोटे बदलाव कर सकते हैं।

1. रोज थोड़ी देर धूप मिलने पर बाहर जरूर निकलें

जब भी मौसम साफ हो, कुछ समय खुली हवा बैठे। इससे शरीर और मन दोनों को फायदा मिलता है।

2. हल्की एक्सरसाइज करें

योग, स्ट्रेचिंग, वॉक या घर पर हल्की कसरत भी मूड बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।

3. दिनचर्या न बदलें

सोने, उठने और खाने का समय नियमित रखें। इससे शरीर का संतुलन बना रहता है।

4. पौष्टिक खाना खाएं

बरसात में सिर्फ तला-भुना खाने की बजाय फल, सब्जियां, दाल और पर्याप्त पानी को भी अपनी डाइट में शामिल करें।

Monsoon Blues Prevention

Monsoon Blues Prevention

5. अपनों से जुड़े रहें

दोस्तों और परिवार के साथ बातचीत करें। अकेलेपन से बचना मानसिक स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है।

6. अपनी पसंद का काम करें

किताब पढ़ना, गाने सुनना, पेंटिंग, बागवानी या कोई नई हॉबी अपनाना भी मन को हल्का कर सकता है।

कब डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए?

अगर उदासी लगातार बनी रहे, नींद या भूख में बड़ा बदलाव आए, रोजमर्रा के काम करना मुश्किल लगे या निराशा बहुत ज्यादा बढ़ जाए, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लेना सबसे सही कदम है। समय पर मदद लेना कमजोरी नहीं, बल्कि समझदारी की निशानी है।

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