फूलन देवी और कुसुमा नैन के बीच अदावत की अनसुनी दास्तां बयां करती है ये किताब

Kitaab Cafe (किताब कैफे): लोग अपने घर की बेटियों के नाम गंगा, यमुना, सरस्वती, नर्मदा, गोदावरी, कावेरी आदि सब रखते हैं, लेकिन कोई चंबल नहीं रखता।

चंबल को महज एक नदी के तौर पर समझना हो तो शायद नक्शा काफी है। वहीं चंबल को ढंग से समझना हो तो उसकी कहानियों में उतरना पड़ेगा। इन कहानियों में प्रेम है, जाति है, गरीबी है, हिंसा है और बदले की वह आग भी है जो कई बार इंसान को ऐसी राह पर ले जाती है, जहां लौटने का रास्ता नहीं बचता। इसी कारण चंबल नदी और उसके आसपास की जमीन को लेकर एक धारणा यह भी रही कि यहां का माहौल शांत लोगों को भी हिंसक बना देता है।

Massacre Queens: True Story Of Love And Revenge In The Chambals

किताब कैफे: चंबल के बीहड़ों में पनपे प्रेम, बदले और हिंसा की सच्ची कहानी है Massacre Queens

चंबल को कभी भी गंगा या यमुना जैसी धार्मिक नदी नहीं माना गया। जबकि चंबल का उद्गम नर्मदा के पवित्र उद्गम क्षेत्र से बहुत दूर नहीं है। लोग अपने घर की बेटियों के नाम गंगा, यमुना, सरस्वती, नर्मदा, गोदावरी, कावेरी आदि सब रखते हैं, लेकिन कोई चंबल नहीं रखता। ये अलग बात है कि आगे चलकर दो बेटियों का नाम इसी चंबल के बीहड़ों में सालों तक अपराध का पर्याय बना रहा।

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