किताब कैफे: अमृता प्रीतम क्यों चाहती थीं कि कुछ खास लोग ना पढ़ें उनकी रसीदी टिकट, कौन थे ये लोग

Kitaab Cafe (किताब कैफे): ​अमृता प्रीतम ने खुद रसीदी टिकट में लिखा है कि ये किताब कुछ खास लोगों के हाथों में नहीं जानी चाहिए। आखिर किन लोगों के पढ़े जाने के खिलाफ थीं अमृता?

Kitaab Cafe (किताब कैफे): आत्मकथाएं अमूमन किसी इंसान के जीवन की घटनाओं का सबसे अहम दस्तावेज होती हैं। लेकिन अमृता प्रीतम की ‘रसीदी टिकट’ केवल उन घटनाओं का लेखा-जोखा भर ही नहीं हैं। यह तो एक संवेदनशील स्त्री के मन की वह यात्रा है, जिसमें प्रेम, पीड़ा, खालीपन, विद्रोह और आत्म स्वीकृति के ना जाने कितने ही रंग घुल-मिल जाते हैं। रसीदी टिकट पढ़ेंगे तो महसूस होगा कि जैसे अमृता अपने जीवन के बंद कमरों की खिड़कियां खोल रही हों और पढ़ने वाला उन खिड़कियों से झांक कर उनके मन के मौसमों को महसूस कर रहा हो। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अमृता प्रीतम चाहती थीं कि उनकी यह आत्मकथा कोई भी ऐरा गैरा इंसान पढ़े?

Kitaab Cafe Amrita Pritam

रसीदी टिकट: अमृता प्रीतम की आत्मकथा

अमृता ने खुद रसीदी टिकट में लिखा है कि ये किताब कुछ खास लोगों के हाथों में नहीं जानी चाहिए। किताब कैफे के इस अंक में आपको इसी किस्से से रूबरू करवाएंगे कि अमृता क्यों नहीं चाहती थीं ये किताब हर कोई पढ़े। आखिर किन लोगों के पढ़े जाने के खिलाफ थीं अमृताप्रीतम ?

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