जापान में इन दिनों एक बड़ा बदलाव देखनो को मिल रहा है। एक समय था जब वहां सूट, टाई और फॉर्मल जूते के बिना ऑफिस जाना लगभग असंभव माना जाता था। लेकिन अब तस्वीर बदल रही है। टोक्यो में सरकार ने अपने कर्मचारियों को गर्मियों में शॉर्ट्स, पोलो टी-शर्ट और स्नीकर्स पहनकर दफ्तर आने की अनुमति दे दी है। वजह है बढ़ती गर्मी और जलवायु परिवर्तन।
जापान का कूल बिज कैंपेन अपने अगले चरण में पहुंच चुका है।
यह बदलाव जापान के पुराने 'कूल बिज' मूवमेंट का नया चरण है। इसकी शुरुआत 2005 में हुई थी। तब सरकार ने लोगों से अपील की थी कि वे गर्मियों में हल्के कपड़े पहनें ताकि एयर कंडीशनर का इस्तेमाल कम हो और बिजली की बचत हो। अब वहां हीटवेव लगातार बढ़ रहे हैं। इसलिए ड्रेस कोड को और आरामदायक बनाया जा रहा है। लेकिन इस फैसले के साथ एक नई बहस भी शुरू हो गई है। इस बहस का नाम है 'सुनहारा (Sunehara)'।
जापानी भाषा सुनहारा - सुने और हारा। सुने यानी पिंडली और हारा यानी हैरेसमेंट। इसका मतलब है- किसी के पैर के बालों को लेकर टिप्पणी करना या दबाव बनाना।
बहस तब शुरू हुई जब पुरुष कर्मचारियों को शॉर्ट्स पहनने की छूट मिली। कई महिलाओं ने कहा कि अगर पैरों का बड़ा हिस्सा अब दिखाई देगा, तो क्या महिलाओं से अब भी यह उम्मीद की जाएगी कि उनके पैरों पर एक भी बाल न दिखे? क्या उन्हें पहले की तरह वैक्सिंग या शेविंग का सामाजिक दबाव झेलना पड़ेगा?
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सोशल मीडिया पर कई महिलाओं ने लिखा कि ऑफिस में प्रोफेशनल दिखने के नाम पर उनसे लंबे समय से ऐसी उम्मीदें की जाती रही हैं, जो पुरुषों पर लागू नहीं होतीं। किसी ने इसे सौंदर्य का दबाव कहा। किसी ने इसे वर्कप्लेस पर जेंडर इनइक्वालिटी का नया चेहरा बताया। यही वजह है कि 'सुनहारा' पर बहस छिड़ गई।
यह बहस सिर्फ पैरों के बालों की नहीं है। यह सवाल इस बात का भी है कि क्या वर्कप्लेस पर महिलाओं और पुरुषों के लिए समान सामाजिक मानक हैं? क्या आरामदायक ड्रेस कोड दोनों के लिए बराबर मायने रखता है?
दिलचस्प बात यह है कि जापान लंबे समय से अपने सख्त ऑफिस कल्चर के लिए जाना जाता रहा है। वहां समय की पाबंदी, फॉर्मल कपड़े और अनुशासन को बहुत महत्व दिया जाता है। ऐसे में शॉर्ट्स को स्वीकार करना अपने आप में एक बड़ा सांस्कृतिक बदलाव माना जा रहा है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन सिर्फ मौसम को नहीं बदल रहा। वह काम करने के तरीके भी बदल रहा है। अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि ऑफिस में क्या पहनना चाहिए। सवाल यह भी है कि ड्रेस कोड बनाते समय क्या सभी कर्मचारियों की सुविधा और समानता का ध्यान रखा जा रहा है।
यही कारण है कि टोक्यो के ऑफिसों में शुरू हुई यह बहस अब दुनिया के दूसरे देशों का भी ध्यान खींच रही है। दरअसल आने वाले समय में बढ़ती गर्मी के साथ शायद कई देशों को अपने पुराने ड्रेस कोड पर दोबारा विचार करना पड़े।
