Times Now Navbharat
live-tv
Premium

International Yoga Day: योग की दुनिया का सबसे पावरफुल 'ब्रह्मचारी', मशहूर थी नेहरू परिवार से यारी

Dhirendra Brahmchari: योग गुरु धीरेंद्र ब्रह्मचारी लग्जरी गाड़ियों का भी शौक रखते। वह हमेशा चमचमाती नीली टोयोटा से चलते। हवाई सफर के लिए उनके पास अपना 4 सीटर सेसना और 19 सीटर डॉर्नियर विमान था।

Image
धीरेंद्र ब्रहम्चारी: देश के सबसे विवादित योग गुरु
Authored by: Suneet Singh
Updated Jun 21, 2026, 07:20 IST
Follow on Google News

आज अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस है। हमे गर्व करना चाहिए कि भारत ही वह मुल्क है जिसने पूरी दुनिया को योग की राह दिखाई। इस भारतभूमि से योग विद्या के एक से एक महारथी निकले। इन महारथियों में एक नाम ऐसा भी है जो उस दौर में प्राइवेट जेट से चलता, जब ज्यादातर लोगों के लिए ट्रेन के एसी कोच में चलना भी सपना था। ये नाम ऐसा था कि अगर नाराज हुआ तो बड़े-बड़े मंत्रियों की कुर्सी छीन लेता। यह नाम जितना प्रभावशाली था उसके दामन पर 'दाग' भी उतने ही लगे। हम बात कर रहे हैं देश के सबसे विवादित योग गुरु धीरेंद्र ब्रह्मचारी की।

खुद को मधुबनी, बिहार की पैदाइश बताने वाले धीरेंद्र ब्रह्मचारी 13 साल की उम्र में घर छोड़ गोरखपुर के पास गोपालखेड़ा में महर्षि कार्तिकेय के आश्रम आ गए थे। वहां उन्होंने योग सीखा। सीखने के बाद दूसरों को भी सिखाने लगे। कुछ साल आश्रम से जुड़े रहने के बाद 50 के दशक में वो दिल्ली कूच कर गए। कैथरीन फ्रैंक ने जो इंदिरा गांधी की आधाकारिक जीवनी लिखी है उसके मुताबिक ब्रह्मचारी 1956 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के संपर्क में आए और उन्हें योग सिखाने लगे। योग सीखने सिखाने के इस क्रम ने नेहरू और ब्रह्मचारी को बहुत करीब ला दिया। 1959 में धीरेंद्र ब्रह्मचारी ने दिल्ली में जब अपना आश्रम खोला तो उसका उद्घाटन स्वयं पीएम नेहरू करने पहुंचे थे।

योग करते पंडित नेहरू की यह तस्वीर काफी वायरल है।

योग करते पंडित नेहरू की यह तस्वीर काफी वायरल है।

नेहरू के बाद देश के प्रधानमंत्री बनने वाले तीन और बड़े नाम धीरेंद्र ब्रह्मचारी की योगा क्लास के शिष्य बने। इनमें लाल बहादुर शास्त्री, मोरारजी देसाई और इंदिरा गांधी का नाम शामिल है। इसके अलावा सत्ता और उद्योगजगत से जुड़े कई बड़े नाम धीरेंद्र शास्त्री के 'चेले' बन चुके थे।

इंदिरा गांधी के साथ से मिली ताकत

इंदिरा गांधी के प्रधानमंत्री बनने के बाद तो धीरेंद्र ब्रह्मचारी इतने प्रभावशाली हो गए कि वो एक फोन पर केंद्र सरकार में मंत्रियों की कुर्सी छीन लिया करते थे। इस बात की तस्दीक पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल ने अपनी आत्मकथा ‘मैटर्स ऑफ डिस्क्रेशन: एन ऑटोबॉयोग्राफी’ में भी की है।

बकौल गुजराल बात 1971 की है। तब वह इंदिरा सरकार में आवास व शहरी विकास मंत्री थे। "ब्रह्मचारी दिल्ली के गोल डाकखाने के पास नए आश्रम के लिए जमीन चाहते थे। मैं नहीं दे रहा था। एक दिन उन्होंने फोन कर कहा कि अगर मेरी फाइल पर साइन नहीं किये तो तुम्हारी कुर्सी छीन लूंगा। हुआ भी ऐसा ही। हफ्ते भर बाद ही मेरे ऊपर उमाशंकर दीक्षित को कैबिनेट मंत्री बना कर मुझे डिमोट कर दिया गया।"

गुजराल की इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि कैसे एक साधारण सा योग गुरु सरकार को अपनी अंगुलियों पर नचाया करता था। ब्रह्मचारी को ये ताकत मिली थी प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से नजदीकियों के कारण। कैथरीन फ्रैंक ने लिखा है कि धीरेंद्र ब्रह्मचारी उस दौर में इकलौते ऐसे पुरुष थे, जो इंदिरा गांधी के कमरे में अकेले जा सकते थे। इंदिरा गांधी से इतनी नजदीकी के चलते उन्हें भारत का ‘रासपुतिन’ कहा जाने लगा

धीरेंद्र ब्रह्मचारी ट्रेंड पायलट भी थे(Photo: Dhirendra Bhrahmachari fb)

धीरेंद्र ब्रह्मचारी ट्रेंड पायलट भी थे(Photo: Dhirendra Bhrahmachari fb)

भारत का रासपुतिन

रासपुतिन की ही तरह ब्रह्मचारी का व्यक्तित्व भी रौबदार था। पूर्व विदेश मंत्री नटवर सिंह, जो ब्रह्मचारी से खुद भी योग सीखते थे, एक जगह लिखते हैं- वो दिखने में तेजस्वी थे। 6 फुट एक इंच की हाइट और बिखरे हुए बाल। एकदम गोरी चमड़ी वाले और उनकी उपस्थिति करिश्माई थी।

पुपुल जयकर ने इंदिरा गांधी की जीवनी में लिखा है कि "इंदिरा गांधी हर छोटे-बड़े मुद्दे पर धीरेंद्र ब्रह्मचारी की सलाह लेती थीं और उस पर पूरी तरह अमल भी करती थीं। वह यह भी नहीं सोचती थीं कि इसका अंजाम क्या होगा। धीरेंद्र ब्रह्मचारी अगर कहे कि उनके विरोधी उनके खिलाफ तंत्र विद्या का इस्तेमाल कर रहे हैं तो वो ये भी मान लेतीं। बाद में खुद ब्रह्मचारी उन तांत्रिक क्रियाओं को बेअसर करने के लिए हवन पूजन करते।"

प्राइवेट प्लेन उड़ाने का शौक

योग विद्या के कारण देश के प्रधानमंत्रियों के करीब पहुंचने वाले ब्रह्मचारी लग्जरी गाड़ियों का भी शौक रखते। वह हमेशा चमचमाती नीली टोयोटा से चलते। हवाई सफर के लिए उनके पास अपना 4 सीटर सेसना और 19 सीटर डॉर्नियर विमान था। उन्होंने इमरजेंसी के दौरान अमेरिका से चार सीटर M5 विमान बिना इंपोर्ट ड्यूटी दिए मंगा लिया था। तब यह मामला काफी सुर्खियों में रहा था।

इंदिरा गांधी के साथ ब्रह्मचारी (Photo: Dhirendra Bhrahmachari fb)

इंदिरा गांधी के साथ ब्रह्मचारी (Photo: Dhirendra Bhrahmachari fb)

कैथरीन फ्रैंक ने लिखा है कि इंदिरा गांधी से अपनी नजदीकियों का फायदा उठाते हुए उन्होंने पाकिस्तान से सटे कश्मीर जैसे संवेदनशील इलाके में भी प्राइवेट हवाई पट्टी बनाने की मंजूरी ले ली थी। इमरजेंसी की ज्यादतियों की जांच करने वाली शाह कमीशन की रिपोर्ट में भी धीरेंद्र ब्र्ह्नचारी के ऐसे कई कारनामों का जिक्र है।

मशहूर लेखक खुशवंत सिंह ने अपनी किताब ट्रुथ, लव एंड द लिटिल मेलिस में लिखा है कि 70 के दशक में ब्र्ह्मचारी के बंगले पर इतनी भीड़ होती जितनी किसी मंत्री के यहां नहीं दिखती। इंदिरा सरकार के उस दौर में लोगों को यह पता था कि जो काम बड़े से बड़े मंत्री संत्री नहीं करा सकते वो सिर्फ एक शख्स करा सकता है - धीरेंद्र ब्रह्मचारी।

संजय गांधी और ब्रह्मचारी

इंदिरा गांधी ही नहीं संजय गांधी पर भी ब्रह्मचारी का बहुत प्रभाव था। दोनों में कई समानताएं भी थीं। दोनों को लंबी गाड़ी और प्लेन उड़ाने का शौक था। आपको जानकर हैरानी होगी कि दोनों की मौत भी प्राइवेट प्लेन हादसे के कारण ही हुई। बात इंदिरा गांधी के दूसरे बेटे राजीव की करें तो ब्रह्मचारी उन्हें कुछ खास पसंद नहीं थे।

संजय गांधी के साथ ब्रह्मचारी (Photo: Wikimedia Common)

संजय गांधी के साथ ब्रह्मचारी (Photo: Wikimedia Common)

इंदिरा गांधी के अंतिम दर्शन नहीं हुआ नसीब

संजय गांधी की मौत के बाद जब राजीव अपनी मां इंदिरा के साथ समय बिताने लगे तो उन्होंने तय किया कि ये धीरेंद्र ब्रह्मचारी 1 सफदरजंग रोड के अंदर ना सके। धीरेंद्र ब्रह्मचारी से ये चिढ़ राजीव गांधी के अंदर इतनी ज्यादा थी कि जब इंदिरा गांधी के निधन के बाद वह पार्थिव शरीर को श्रद्धांजलि देने आए तो उन्हें घर के अंदर ही नहीं आने दिया गया।

इंदिरा गांधी के निधन के बाद ब्रह्मचारी का प्रभाव घटता गया। वह धीरे-धीरे मीडिया के कैमरों और दिल्ली से दूर हो गए। कश्मीर में बने आश्रम में रहने लगे। अब तक उन्होंने अकूत संपत्ति और ना जाने कितने विवाद 'कमा' लिये थे। 9 जून 1994 को उनका प्राइवेट जेट लैंड करते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में उनकी मौत हो गई। इस तरह से योग और आध्यात्मिकता के दम पर सत्ता का भरपूर लाभ उठाने वाले भारतीय इतिहास के सबसे ताकतवर योग गुरु धीरेंद्र ब्रह्मचारी का अध्याय भी समाप्त हो गया।

End of Article