ससुराल वह जगह मानी जाती है जहां एक बेटी शादी के बाद नए सपनों के साथ अपना दूसरा घर बसाने जाती है। वह अपने माता-पिता का आंगन छोड़कर इस उम्मीद में जाती है कि वहां उसे अपनापन, सम्मान और प्यार मिलेगा। लेकिन जब उसी घर से उसकी मौत की खबर आती है, तो केवल एक लड़की नहीं मरती, बल्कि उसके साथ कई सपने, विश्वास और रिश्तों की गरिमा भी टूट जाती है।
भोपाल की ट्विशा शर्मा के साथ भी यही हुआ। ट्विशा के परिवार वालों ने बड़े अरमानों से बेटी को जब दुल्हन के जोड़े में ससुराल विदा किया था तो कभी नहीं सोचा होगा कि 6 महीने में ही वह कफन में लिपटी लाश बनकर लौटेगी।
इस केस में कुछ चैट्स सामने आए हैं जो बता रहे हैं कि ट्विशा ने मौत से एक दिन पहले ही अपनी मां को मैसेज कर अपना दर्द बयां कर दिया था। ट्विशा ने अपनी मां को लिखा था - मुझे बहुत ज्यादा घुटन हो रही है मां। एक और मैसेज में ट्विशा ने लिखा था- मेरी जिंदगी नरक बन गई है। मां को तब शायद अपनी बेटी के हालात का अंदाजा नहीं होगा कि वह किस मानसिक प्रताड़ना से गुजर रही है।
मां शायद हर रात ये सोच कर रोती होगी कि क्यों नहीं मैंने मैसेज मिलते ही बेटी को अपने पास बुला लिया। क्यों मैं उसी दिन उसके पास नहीं चली गई। लेकिन अफसोस ना तो अब बेटी है और ना ही कुछ करने की वजह, बस है तो कभी ना भरने वाला जख्म, आंखों से बहते आंसू और बेटी का दर्द ना समझ पाने का पछतावा।
दीपिका नागर ने भी मां को बताया था दर्द
ऐसा ही कुछ हुआ था ग्रेटर नोएडा की दीपिका नागर के मर्डर केस में भी। दीपिका के ससुराल वाले उसे दहेज के लिए प्रताड़ित करते थे। मानसिक और शारीरिक यातनाएं झेल रही दीपिका ने कई बार अपने हालात मां से बयां किये। मौत वाले दिन भी दीपिका ने मां को फोन कर कहा था कि ससुराल वाले उसे मार डालेंगे। कुछ घंटे बाद ही तीसरी मंजिल से गिर कर उसकी मौत की खबर ने हर किसी को सन्न कर दिया।
बेटियां अधूरे लफ्जों में बयां करती हैं दर्द (AI Image)
क्यों हो जाती है मां-बाप से चूक
यहां बड़ा सवाल ये उठता है कि आखिर क्यों मां बाप से ये चूक हो जाती है कि वह समय रहते अपनी बेटी के दर्द का अंदाजा नहीं लगा पाते। क्यों जब तक वह कुछ करने की सोचते हैं तब तक बहुत देर हो जाती है। ससुराल से आने वाले अपनी लाडली के कॉल्स या मैसेज में छिपे दर्द को क्यों नहीं समझ पाते मां-बाप?
टाइम्स नाऊ में हमारी सहयोगी महिला पत्रकार ने भी अपनी मैरिड लाइफ में ऐसा ही कुछ झेला। उन्होंने बताया कि जब वह पैसों के लालच में ससुराल में प्रताड़ना झेल रही थी तब कई बार अपने पेरेंट्स को इस बारे में बताया। पेरेंट्स ने इसे पति-पत्नी के बीच होने वाली आम अनबन समझ कई बार इग्नोर किया। लेकिन जब पानी सर से ऊपर हो गया तब उनके पिता ससुराल पहुंचे और अपनी बेटी को उस नर्क से निकाल कर लाए। हमारी इन साथी पत्रकार ने बताया कि ऐसा नहीं है कि पेरेंट्स को शादी के बाद अपनी बेटी की चिंता नहीं होती, लेकिन वो हालात की गंभीरता को समझने में शायद देर कर जाते हैं।
आज जब ऐसी घटनाएं आम हैं जहां ससुराल वाले ही बेटियों के दुश्मन बन बैठते हैं, वहां हर मां बाप को ये समझने की कला आनी चाहिए कि बेटी के कॉल्स या मैसेज क्या ना चाहकर भी क्या कुछ कहना चाह रहे हैं। उन्हें ये भी जानना चाहिए ससुराल से आया बिटिया का कौन सा मैसेज या कॉल इशारा है कि बस अब बहुत हो गया।
दिल्ली में विमहन्स हॉस्पिटल की वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ. नमृता गुप्ता ने बताया कि शादी के बाद बेटी अपने नए घर और रिश्तों में खुद को ढालने की कोशिश करती है। ऐसे में हर छोटी-बड़ी बात वह मायके वालों से साझा नहीं कर पाती। कई बार वह अपनी परेशानी खुलकर नहीं बता पाती, लेकिन उसकी आवाज, बातचीत का तरीका और मैसेज बहुत कुछ कह जाते हैं। व्यवहार में अचानक आए बदलाव कई बार मानसिक तनाव या भावनात्मक परेशानी की ओर इशारा कर सकते हैं।
कैसे पहचानें कि ससुराल में परेशान है बेटी
मां बाप को कब हो जाना चाहिए सतर्क
सबसे पहले तो ये जान लें कि अगर बेटी आपको मैसेज या कॉल करके कहती है कि वह तनाव में है या परेशान है तो बिल्कुल भी हल्के में ना लें। तुरंत उसके पास पहुंचे या फिर उसे अपने पास बुला लें। कई बार ये भी होता है कि बेटियां अपनी परेशानी छिपा जाती हैं। ऐसे में कुछ इशारे मिलते हैं जिससे आप समझ सकते हैं कि आपकी बिटिया के साथ सबकुछ ठीक नहीं है:
बातचीत में दिखने लगते हैं बदलाव
अगर बेटी पहले खुलकर बातें करती थी लेकिन अब फोन पर जल्दी-जल्दी बात खत्म करने लगे, हर समय घबराई हुई लगे या आसपास किसी के होने का डर महसूस करे, तो यह संकेत हो सकता है कि वह दबाव में है। कई बार उसकी आवाज में उदासी या डर साफ महसूस होने लगता है। बार-बार सब ठीक है कहना भी कभी-कभी अंदरूनी परेशानी छिपाने की कोशिश हो सकती है।
मैसेज के पैटर्न पर दें ध्यान
अगर बेटी पहले लंबे और सामान्य मैसेज भेजती थी, लेकिन अब सिर्फ हां या ना, ठीक हूं..जैसे छोटे मैसेज करने लगी है, तो यह बदलाव नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुछ लोग सीधे मदद नहीं मांग पाते, इसलिए वे इशारों में बात करते हैं। जैसे-
- यहां बहुत तनाव रहता है
- कुछ अच्छा सा नहीं लग रहा यहां
- मन बिल्कुल नहीं लगता
- काश कुछ दिन घर आ पाती
इस तरह का कोई भी कॉल या मैसेज आते ही समझ जाइए कि आपकी बेटी को आपकी सबसे ज्यादा जरूरत है। उसे अकेला ना पड़ने दें।
अचानक कम हो जाए संपर्क
अगर बेटी के कॉल्स या मैसेज आने कम हो जाए, सोशल मीडिया से अचानक गायब हो जाए, कॉल हमेशा किसी और की मौजूदगी में आए या वह अकेले बात करने से बचे, तो यह भी चिंता की बात हो सकती है।
डॉ. नमृता बताती हैं कि कंट्रोलिंग माहौल में रहने वाली लड़कियां अकसर खुलकर बातचीत नहीं कर पातीं। ऐसे में उनके व्यवहार से भी पता लगाया जा सकता है कि उसकी जिंदगी ठीक नहीं चल रही है। जैसे कि बातचीत में बार-बार रोना या भावुक हो जाना, छोटी बातों पर डर जाना, खुद को दोष देना, पहले की तुलना में बहुत चुप हो जाना या हमेशा तनाव और दबाव में लगना। ये संकेत बताते हैं कि वह मानसिक दबाव से गुजर रही हो सकती है।
क्या करें परिवार वाले?
मनोवैज्ञानिक डॉ. नीति सिंह (नोएडा गवर्नमेंट हॉस्पिटल) ने बताया कि ऐसी स्थिति में सबसे जरूरी है कि पेरेंट्स बेटी को जज न करें। उसे यह एहसास दिलाना जरूरी है कि वह सुरक्षित है और खुलकर बात कर सकती है।
फोन पर केवल औपचारिक सवाल पूछने के बजाय प्यार और धैर्य से बात करें। कई बार एक भरोसेमंद बातचीत ही किसी को अपनी परेशानी बताने की हिम्मत दे देती है।
अगर मामला गंभीर लगे, जैसे हिंसा, धमकी या लगातार मानसिक प्रताड़ना, तो परिवार को तुरंत मदद और कानूनी सलाह लेने में देर नहीं करनी चाहिए।
उम्मीद करते हैं कि कम से कम इस आर्टिकल को पढ़ने वाले पेरेंट्स ससुराल में मार दी गई इन बेटियों की मौत से सबक लेंगे और सतर्क बनेंगे। क्योंकि ससुराल में मार दी जाने वाली बेटियों के कमरे में बची तस्वीरें, अधूरे सपने और उसकी हंसी हमेशा के लिए सवाल बनकर रह जाते हैं कि आखिर उसकी गलती क्या थी?
