Gulabi Meenakari: कला फारसी पहचान बनारसी, काशी की कारीगरी का नायाब नमूना है गुलाबी मीनाकारी

Gulabi Meenakari: बनारस की गुलाबी मीनाकारी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह पूरी तरह से हस्तनिर्मित यानी कि हैंडमेड होती है और इसमें शुद्ध प्राकृतिक रंगों का उपयोग किया जाता है।

Gulabi Meenakari Craft: उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक राजधानी और बाबा विश्वनाथ की नगरी बनारस अपनी आध्यात्मिकता, घाटों और बनारसी साड़ियों के लिए ही नहीं, अपनी कई अनूठी और बेहद खूबसूरत कारीगरी के लिए भी दुनिया भर में मशहूर है। इसी में से एक है गुलाबी मीनाकारी। यह एक ऐसी कला है जो सोने-चांदी पर रंगों का जादू बिखेरकर उसे एक नया जीवन दे देती है। बनारस की इस बेशकीमती कला को भारत सरकार द्वारा जीआई टैग भी मिल चुका है, जो इसकी विशिष्टता सबूत भी है।

Gulabi Meenakari

बनारस की जादुई कला है गुलाबी मीनाकारी

फारस से बनारस तक का सफर

इतिहास में गुलाबी मीनाकारी की जड़ें प्राचीन फारस यानी आज के ईरान से जुड़ी हैं। मुगलों के शासनकाल में यह कला भारत आई और फिर राजस्थान से होते हुए बनारस के कारीगरों तक पहुंची। बनारस के हुनरमंद कारीगरों ने इस कला को ना सिर्फ अपनाया, बल्कि इसे एक नई और अनोखी पहचान भी दी। दुनिया भर में कई जगहों पर मीनाकारी (धातु पर रंग भरने की कला) की जाती है, लेकिन बनारस की मीनाकारी इस मायने में सबसे अलग है क्योंकि यहां सफंद इनेमल के ऊपर गुलाबी रंग का उपयोग करके बारीक पेंटिंग की जाती है। यही गुलाबी शेड इसे दुनिया की बाकी सभी मीनाकारी कलाओं से जुदा और खास बनाता है।

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