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बंगाल की पहचान है झालमुड़ी, जिसके स्वाद के लिए रुक गए पीएम मोदी भी, मुंबई की भेलपुरी से कितनी अलग

What is Jhalmuri: प्रधानमंत्री मोदी के हालिया बंगाल दौरे के बाद से झालमुड़ी की खूब चर्चा है। झालमुड़ी बंगाल का एक पॉपुलर स्ट्रीट फूड है जिसे सरसों के तेल के साथ खाया जाता है। क्या ये भेलपुरी से अलग है।

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उस झालमुड़ी की कहानी जिसके स्वाद के लिए रुके पीएम मोदी
Authored by: Medha Chawla
Updated Apr 20, 2026, 14:48 IST
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What is Jhalmuri: पश्चिम बंगाल के चुनावी दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक अलग ही अंदाज़ देखने को मिला। जनसभाओं और राजनीतिक भाषणों के बीच उन्होंने अचानक काफिला रुकवाया और सड़क किनारे खड़े एक छोटे से ठेले से बंगाल की मशहूर स्ट्रीट डिश झालमुड़ी का स्वाद लिया। यह दृश्य सिर्फ एक स्नैक खाने का नहीं था, बल्कि बंगाल (West Bengal) की लोक संस्कृति, आम लोगों और स्थानीय खानपान से जुड़ने का प्रतीक बन गया। खबरों के मुताबिक, झाड़ग्राम में यह अनौपचारिक ठहराव लोगों के लिए यादगार पल बन गया, जहां प्रधानमंत्री ने स्थानीय विक्रेता से बातचीत करते हुए झालमुड़ी खाई।

क्या है झालमुड़ी- नाम में छिपा स्वाद

बंगाली भाषा में झाल का मतलब होता है तीखा या मसालेदार और मुरी हुआ मुरमुरा यानी फूला हुआ चावल। इस तरह झालमुड़ी हुई मसालेदार मुरमुरे का स्वादिष्ट मिश्रण। बता दें कि यह पूर्वी भारत और बांग्लादेश की बेहद लोकप्रिय स्ट्रीट फूड डिश है, जो पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा और पूर्वी उत्तर प्रदेश तक फैली हुई है। इसमें मुरमुरा, सरसों का तेल, हरी मिर्च, प्याज, टमाटर, नींबू, धनिया, चनाचूर और मसालों का अनोखा मेल होता है।

झालमुड़ी सिर्फ एक नाश्ता नहीं, बल्कि बंगाल की 'अड्डा संस्कृति' की पक्की साथी है। दोस्तों संग लंबी बातचीत में स्नैकिंग का सबसे पसंदीदा विकल्प है। रेलवे प्लेटफॉर्म से लेकर कॉलेज कैंपस और समुद्र किनारे तक - हर जगह कागज के ठोंगे में मिलती यह डिश बंगाली स्वाद की पहचान बन चुकी है।

झालमुड़ी की कहानी- लोकल से ग्लोबल हुई डिश

इतिहासकार मानते हैं कि मुरमुरे आधारित स्नैक्स भारत में सदियों से खाए जाते रहे हैं। बंगाल में सस्ते, हल्के और तुरंत तैयार होने वाले भोजन की जरूरत ने झालमुड़ी को जन्म दिया। कोलकाता की गलियों में घूमते 'झालमुड़ीवाला' अपने खास स्टाइल के लिए मशहूर होते हैं। वे पीतल या स्टील के डिब्बों में मसाले रखते हैं और ग्राहक के सामने बिजली की गति से मिश्रण तैयार करते हैं। यही लाइव तैयारी इसकी असली पहचान है और देखने के वाले के मुंह में पानी ले आती है।

मसालों का स्वाद और छोटी भूख का समाधान - वाली यह स्नैक इसी वजह से अब गरीब या आम आदमी का भोजन नहीं रही, बल्कि बंगाल की सांस्कृतिक विरासत बन गई। कोलकाता जाने पर पर्यटकों की मस्ट डू की लिस्ट में यहां की झालमुड़ी खाना भी शामिल रहता है।

झालमुड़ी का स्वाद क्यों हिट है

झालमुड़ी का स्वाद क्यों हिट है

कैसे बनती है झालमुड़ी, क्या है इसके स्वाद का राज

झालमुड़ी की रेसिपी भले सरल लगे, लेकिन इसका स्वाद संतुलन पर टिका होता है। झालमुड़ी की मुख्य सामग्री में मुरमुरा, सरसों का तेल, बारीक कटा प्याज, टमाटर, उबले आलू, भुनी मूंगफली, हरी मिर्च, नींबू रस, धनिया और चनाचूर नमकीन शामिल होते हैं।

इन सबके बीच सबसे अहम भूमिका निभाता है सरसों का तेल। इसकी तेज खुशबू और हल्की तीखी तासीर झालमुड़ी को बाकी मुरमुरा स्नैक्स से अलग पहचान देती है। यही तेल स्वाद में 'बंगालियत' भर देता है।

मुंबई की भेलपुरी से कितनी अलग है बंगाल की झालमुड़ी

भारत में मुरमुरे से बनी सबसे प्रसिद्ध चाट अगर कोई है तो वह मुंबई की भेलपुरी है। पहली नजर में दोनों एक जैसी लग सकती हैं, लेकिन दोनों ही चाट के स्वाद और शैली में बड़ा अंतर है।

बंगाल की झालमुड़ी मसालेदार, सूखी और तेज फ्लेवर वाली होती है। इसमें सरसों तेल और हरी मिर्च का असर प्रमुख रहता है। वहीं मुंबई की भेलपुरी मीठी-खट्टी चटनी, सेव और इमली के स्वाद से भरी होती है। भेलपुरी का टेक्सचर हल्का नम होता है क्योंकि इसमें चटनियां मिलाई जाती हैं।

अगर आसान शब्दों में समझें तो भेलपुरी चाट जैसा अनुभव देती है वहीं झालमुड़ी मसालेदार स्नैक जैसा स्वाद देती है। यही फर्क दोनों को अलग पहचान देता है।

कितनी अलग हैं झालमुड़ी और भेलपुरी

कितनी अलग हैं झालमुड़ी और भेलपुरी

चुरुमुरी: झालमुड़ी की दक्षिण भारतीय 'बहन'

अगर आप कर्नाटक या बेंगलुरु गए हों तो चुरुमुरी जरूर देखी होगी। यह दरअसल भेलपुरी और झालमुड़ी की दक्षिण भारतीय शैली है। चुरुमुरी भी मुरमुरे से बनती है, लेकिन इसमें नींबू का स्वाद ज्यादा प्रमुख होता है और कई जगह घी या नारियल तेल की हल्की खुशबू भी मिलती है। इसे कर्नाटक का लोकल स्ट्रीट स्नैक माना जाता है और यह क्षेत्रीय स्वाद के अनुसार बदली हुई रेसिपी है।

एक मुरमुरे की तीन पहचान

मुंबई की भेलपुरी, बंगाल की झालमुड़ी और कर्नाटक की चुरुमुरी - तीनों मिलकर भारतीय स्ट्रीट फूड की कहानी लिखती हैं। और साथ ही ये भारत की खाद्य विविधता का शानदार उदाहरण भी हैं। तीनों फूड बताते हैं कि भारत के हिस्सों में स्वाद बदल जाता है, मसाले बदल जाते हैं, लेकिन भावना वही रहती है - सादगी, अपनापन और साझा संस्कृति। और साथ ही हर व्यंजन पर क्षेत्र की छाप भी।

दक्षिण में चुरमुरी प्रसिद्ध है

दक्षिण में चुरमुरी प्रसिद्ध है

छोटे स्वाद की बड़ी कहानी

इस तरह बंगाल की पहचान बन चुकी झालमुड़ी आज सिर्फ एक स्ट्रीट फूड नहीं, बल्कि उस भारत का प्रतीक है जो छोटे स्वादों में बड़ी कहानियां समेटे हुए है। यह वो स्वाद है जो भावनाओं को जोड़ता है। यह वो स्वाद है जो अपनी माटी की सौंध को लेकर चलता है। ये वो स्वाद है जो अगली पीढ़ी के लिए कहानियां तैयार करता है।

और शायद इसलिए, बंगाल की सड़कों पर मिलने वाली इस साधारण डिश ने देश के प्रधानमंत्री तक को रुककर उसका स्वाद लेने पर मजबूर कर दिया।

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