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Children's Day Poem 2023: चांद का कुर्ता, चंदा मामा... बाल दिवस पर बच्चों को जरूर सुनाएं ये हिंदी कविताएं

Children's Day Poem in Hindi 2023: हर साल 14 नवंबर के दिन भारत में बाल दिवस बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। बाल दिवस को लेकर हम आज कुछ बाल कविताएं आपके साथ शेयर कर रहे हैं।

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Children's Day Poem 2023: बाल दिवस पर हिंदी कविताएं।

Children's Day Poem in Hindi 2023: बचपन के खूबसूरत अनुभव का जश्न मनाने के लिए हर साल भारत में 14 नवंबर (14 November) के दिन बाल दिवस (Children's Day) मनाया जाता है। देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के जन्मदिन को बाल दिवस (Children's Day 2023) के तौर पर मनाया जाता है। उन्हें बच्चों से बहुत प्यार था और एक अद्भुत राष्ट्र के निर्माण के लिए बच्चों की प्रगति के लिए काम करने में भी विश्वास रखते थे। बाल दिवस के मौके पर आज हम आपके साथ इस दिन से संबंधित बाल कविताएं (Children's Day Poem) शेयर कर रहे हैं।

बाल दिवस कविताएं (Children's Day Poem)

1. चांद का कुर्ता

हठ कर बैठा चांद एक दिन, माता से यह बोला,

सिलवा दो मां मुझे ऊन का मोटा एक झिंगोला।

सनसन चलती हवा रात भर, जाड़े से मरता हूं,

ठिठुर-ठिठुरकर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूं।

आसमान का सफ़र और यह मौसम है जाड़े का,

न हो अगर तो ला दो कुर्ता ही कोई भाड़े का।

बच्चे की सुन बात कहा माता ने, ‘‘अरे सलोने!

कुशल करें भगवान, लगें मत तुझको जादू-टोने।

जाड़े की तो बात ठीक है, पर मैं तो डरती हूँ,

एक नाप में कभी नहीं तुझको देखा करती हूँ।

कभी एक अंगुल भर चौड़ा, कभी एक फुट मोटा,

बड़ा किसी दिन हो जाता है, और किसी दिन छोटा।

घटता-बढ़ता रोज़ किसी दिन ऐसा भी करता है,

नहीं किसी की भी आंखों को दिखलाई पड़ता है।

अब तू ही ये बता, नाप तेरा किस रोज़ लिवाएं,

सी दें एक झिंगोला जो हर रोज बदन में आए।

- रामधारी सिंह ‘दिनकर’

2. चंदा मामा

चंदा मामा दौड़े आओ,

दूध कटोरा भर कर लाओ।

उसे प्यार से मुझे पिलाओ,

मुझ पर छिड़क चाँदनी जाओ।

मैं तैरा मृग-छौना लूँगा,

उसके साथ हँसूँ खेलूँगा।

उसकी उछल-कूद देखूँगा,

उसको चाटूँगा-चूमूँगा।

- अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’

3. कितनी प्यारी दुनिया इनकी,

कितनी मृदु मुस्कान।

बच्चों के मन में बसते हैं,

सदा, स्वयं भगवान।

एक बार नेहरू चाचा ने,

बच्चों को दुलराया।

किलकारी भर हंसा जोर से,

जैसे हाथ उठाया।

नेहरूजी भी उसी तरह,

बच्चे-सा बन करके।

रहे खिलाते बड़ी देर तक

जैसे खुद खो करके।

बच्चों में दिखता भारत का,

उज्ज्वल स्वर्ण विहान।

बच्चे मन में बसते हैं,

सदा स्वयं भगवान।

बच्चे यदि संस्कार पा गए,

देश सबल यह होगा।

बच्चों की प्रश्नावलियों से,

हर सवाल हल होगा।

बच्चे गा सकते हैं जग में,

अपना गौरव गान।

बच्चे के मन में बसते हैं,

सदा स्वयं भगवान।

- कार्तिकेय अमर

TNN Lifestyle Desk
TNN लाइफस्टाइल डेस्क author

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