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Gandhi Jayanti 2021 Speech, Quotes: सफलता का कोई शॉर्टकर्ट नहीं, भविष्‍य की चिंताओं में डूबना व्‍यर्थ- जीवन बदल देंगे महात्‍मा गांधी के ये अनमोल विचार

Gandhi Jayanti 2021 Speech, Quotes, Nibandh, Bhashan, Jeevan Parichay in Hindi: महात्‍मा गांधी महज एक नाम नहीं, बल्कि एक विचार हैं, एक सोच हैं। एक ऐसी सोच, जो न केवल भारत, बल्कि पूरी दुनिया में आज भी प्रासंगिक बनी हुई है और करोड़ों लोगों को प्रेरित करती है। अहिंसा महात्‍मा गांधी के दर्शन का मूल मंत्र रहा, जिसके बारे में उन्‍होंने कहा था, 'अहिंसा एक दर्शन है, एक सिद्धांत है और एक अनुभव है, जिसके आधार पर समाज को बेहतर बनाया जा सकता है।'

टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटलटाइम्स नाउ नवभारत डिजिटलUpdated Oct 2, 2021, 19:00 IST
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Gandhi Jayanti 2021 Speech, Quotes: सफलता का कोई शॉर्टकर्ट नहीं, भविष्‍य की चिंताओं में डूबना व्‍यर्थ- जीवन बदल देंगे महात्‍मा गांधी के ये अनमोल विचार
Photo Credit: BCCL

Gandhi Jayanti 2021 Speech, Quotes, Nibandh, Bhashan in Hindi: महात्‍मा गांधी का जन्‍मदिवस हर साल पूरी दुनिया में अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है। भारत में उन्‍हें राष्‍ट्रपिता का दर्जा प्राप्‍त है, जिन्‍हें लोग प्‍यार से बापू भी बुलाते हैं। इस साल उनकी 152वीं जयंती मनाई जा रही है। उनका जन्‍म 2 अक्टूबर, 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था।

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गांधी जी के अनमोल विचार
-व्यक्ति अपने विचारों से निर्मित एक प्राणी है, वह जो सोचता है वही बन जाता है: महात्मा गाँधी

-एक कायर प्यार का प्रदर्शन करने में असमर्थ होता है, प्रेम बहादुरों का विशेषाधिकार है: महात्मा गाँधी

-कर्म प्राथमिकताओं को व्यक्त करता है:  महात्मा गाँधी
गांधी जी के भाषण के अंश

4 फ़रवरी 1916 को बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में भाषण देते हुए गांधी जी ने कहा था, ' ...आप कभी भी सिर्फ़ ज़बानी जमा-ख़र्च से पूरी दुनिया को भारत का संदेश नहीं दे पाएँगे। मैं अपने वक्तव्य भाषणों और लेक्चरों से ऊब गया हूँ। मैं पिछले दो दिनों से जो लेक्चर यहाँ दिए गए हैं उनको अलहदा मानता हूँ, क्योंकि वो ज़रूरी हैं। लेकिन मैं आप को सलाह देने का साहस कर रहा हूँ कि हम लोग भाषण देने के अपने खजाने के आख़िर में पहुँच चुके हैं; यह पर्याप्त नहीं है कि हमारे कान तृप्त हो गए हैं..'

OCT 02, 2021 17:33 IST

'मानवता एक सागर के समान होती है'


महात्मा गांधी का मानवता में गहरा यकीन था उनका कहना था कि-आपको मानवता में विश्वास नहीं खोना चाहिए, मानवता एक सागर के समान होती है, सागर की कुछ बूंदे गंदी हो जाने से पूरा सागर गंदा नहीं होता।
 

OCT 02, 2021 15:04 IST

सफलता का कोई शॉर्टकर्ट नहीं

महात्‍मा गांधी किसी भी लक्ष्‍य तक पहुंचने के लिए सिर्फ कड़ी मेहनत में यकीन रखते थे। उनके लिए सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं था। वह कहा करते थे, 'कुछ लोग सफलता के केवल सपने देखते हैं जबकि अन्य व्यक्ति जागते हैं और कड़ी मेहनत करते हैं।' वह भविष्‍य की चिंताओं में डूबे रहने वालों को भी आगाह करते थे और कहते थे, 'भविष्य में क्या होगा, मैं यह नहीं सोचना चाहता। मुझे वर्तमान की चिंता है। ईश्वर ने मुझे आने वाले क्षणों पर कोई नियंत्रण नहीं दिया है।'

OCT 02, 2021 13:39 IST

'विचार ही तय करती है नियति'

महात्‍मा गांधी वैचारिक शुद्धता व आत्‍म संबल के प्रबल पक्षधर थे। उनका मानना था कि अच्‍छे विचारों से ही उनके जीवन के मूल्‍य, आदत और फिर नियति तय होती है। इस बारे में उन्‍होंने कहा था, 'आपकी मान्‍यताएं आपके विचार बन जाते हैं, आपके विचार आपके शब्‍द बन जाते हैं, आपके शब्‍द आपके कार्य बन जाते हैं, आपके कार्य आपकी आदत बन जाती है, आपकी आदतें आपके मूल्‍य बन जाते हैं, आपके मूल्‍य आपकी नियति बन जाती है।'

OCT 02, 2021 12:39 IST

महात्‍मा गांधी ने बताया था Independence से कैसे अलग है स्‍वराज

महात्‍मा गांधी स्वरज का मतलब आत्‍म शासन व आत्‍म संयम को मानते थे। उन्‍होंने एक बार 'यंग इंडिया' में स्‍वराज के मायने समझाते हुए लिखा था, 'स्वराज का अर्थ आत्म शासन व आत्म संयम है। अंग्रेजी शब्द इंडेपेंडेंस अक्सर सब प्रकार की मर्यादाओं से मुक्त निरंकुश आजादी व स्वच्छंदता का अर्थ देता है, यह अर्थ स्वराज में नहीं है।'

OCT 02, 2021 10:49 IST

सामाजिक भेदभाव, जाति प्रथा के खिलाफ थे महात्‍मा गांधी

महात्मा गांधी अपने जीवन में न सिर्फ अहिंसा की लड़ाई लड़े, बल्कि छुआछूत, जाति प्रथा व सामाजिक भेदभाव के खिलाफ भी उन्‍होंने संघर्ष किया। स्‍वराज को लेकर उनकी जो संकल्‍पना थी, उसमें उन्‍होंने जाति-धर्म से ऊपर उठने की बात कही थी। 'यंग इंडिया' में उन्होंने लिखा था, 'मेरे… हमारे… अपनों के स्वराज में जाति व धर्म के भेद का कोई स्थान नहीं हो सकता। उस पर शिक्षितों व धनवानों का एकाधिकार नहीं होगा। वह स्वराज सबके लिए, सबके कल्याण के लिए होगा।'

OCT 02, 2021 09:54 IST

शांति को सत्‍य का मार्ग मानते थे महात्‍मा गांधी

महात्‍मा गांधी ने पूरी दुनिया को शांति और अहिंसा का संदेश दिया तो जीवनभर व सत्‍य के मार्ग पर चलने के लिए भी लोगों को प्रेरित करते रहे। उन्‍होंने झूठ को हिंसा का जनक और शांति को सत्‍य का मार्ग बताया था। उनका स्पष्‍ट मानना था, 'शांति का मार्ग सत्य का मार्ग है, सत्यता, शांतिमयता से भी अधिक महत्वपूर्ण है, जबकि झूठ हिंसा का जनक है।'

OCT 02, 2021 09:06 IST

UN महासचिव ने दिया शांति का संदेश

गांधी जयंती के अवसर पर गुजरात के साबरमती आश्रम में प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। वहीं संयुक्‍त राष्‍ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने महात्‍मा गांधी की 152वीं जयंती पर एक बार फिर शांति का आह्वान किया। महात्‍मा गांधी के जन्‍मदिन को वैश्विक स्‍तर पर अंतरराष्‍ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है। उन्‍होंने कहा, 'इस अंतराष्‍ट्रीय अहिंसा दिवस- गांधी जयंती- पर आइये हम उनके  शांति के संदेश पर ध्‍यान दें और सभी के लिए एक बेहतर भविष्‍य के निर्माण की प्रतिबद्धता जताएं।'

OCT 02, 2021 08:46 IST

सोनिया गांधी ने राजघाट जाकर बापू को दी श्रद्धांजलि

कांग्रेस अध्‍यक्ष सोनिया गांधी ने राजघाट जाकर महात्‍मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित की।

OCT 02, 2021 07:34 IST

महात्‍मा गांधी को पीएम मोदी की श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को उनकी 152वीं जयंती पर श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका जीवन व आदर्श देश की हर पीढ़ी को कर्तव्य पथ पर चलने के लिए प्रेरित करता रहेगा। उन्‍होंने ट्वीट किया, 'राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को उनकी जन्म-जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि। पूज्य बापू का जीवन और आदर्श देश की हर पीढ़ी को कर्तव्य पथ पर चलने के लिए प्रेरित करता रहेगा।'
 

OCT 02, 2021 07:00 IST

'व्यक्ति अपने विचारों के सिवा कुछ नहीं'

महात्‍मा गांधी वैचारिक व आत्मिक शुद्धता पर बहुत जोर देते थे। उनका मानना था कि व्‍यक्ति अपने विचारों से जीवन में ऊंचा उठ सकता है और किसी की भी सोच उसके पूरे व्‍यक्तित्‍व को दर्शाती है। जीवन में वैचारिक महत्‍व को लेकर एक बार उन्‍होंने कहा था, 'व्यक्ति अपने विचारों के सिवा कुछ नहीं है। वह जो सोचता है, वह बन जाता है।'

OCT 02, 2021 00:18 IST

इन संदेशों के जरिए दीजिए गांधी जयंती की शुभकामनाएं

देश के लिए किया सब कुछ त्याग जिसने,
देशभक्ति के लिए छोड़ा विलास जिसने,
पहन काठ की चप्पल आया इक महात्मा,
जो बन गया इस भारत की आत्मा,
गांधी जयंती की शुभकामनाएं।

Gandhi Jayanti 2021 Quotes, Wishes Images: इन शानदार कोट्स से दें गांधी जयंती की बधाई

OCT 01, 2021 23:46 IST

गांधी जी के अनमोल विचार

महात्मा गांधी कहते थे कि 'जब तक आप किसी को वास्तव में खो नहीं देते, तब तक आप उसकी अहमियत नहीं समझते।'  इतना ही नहीं महात्मा गांधी का एक विचार काफी प्रसिद्ध है जो इस प्रकार है, 'मेरा मन मेरा मंदिर हैं ; मैं किसी को भी अपने गंदे पाँव के साथ मेरे मन से नहीं गुजरने दूंगा'

OCT 01, 2021 23:08 IST

गांधी जी प्रमुख विचार

गांधी के कुछ प्रमुख विचार इस प्रकार हैं-
-किसी देश की महानता और उसकी नैतिक उन्नति का अंदाजा हम वहां जानवरों के साथ होने वाले व्यवहार से लगा सकते हैं।
-कमजोर कभी क्षमाशील नहीं हो सकता है. क्षमाशीलता ताकतवर की निशानी है।
-व्यक्ति अपने विचारों के सिवाय कुछ नहीं है. वह जो सोचता है, वह बन जाता है।

OCT 01, 2021 22:28 IST

गांधी जी की हत्या के लिए हुआ था इटली निर्मित पिस्टल का इस्तेमाल

नाथूराम गोडसे ने 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसके लिए उसने इटली निर्मित स्वचालित पिस्तौल का इस्तेमाल किया था। यह बेरेटा सीएएल 9 पिस्तौल थी जिसकी संख्या 719791 थी। 1934 में निर्मित इस पिस्तौल की व्यवस्था ग्वालियर के डॉक्टर दत्तात्रेय पारचुरे ने की थी जिसके बारे में माना जाता है कि उसने हिन्दू राष्ट्र सेना (एचआरएस) की स्थापना की थी।
 

OCT 01, 2021 22:26 IST

आजादी मिलने से एक सप्ताह पहले रची गई थी गांधी की हत्या की साजिश : किताब

महात्मा गांधी की हत्या की साजिश 1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति से एक सप्ताह पहले ही रच ली गई थी। यह दावा एक नयी किताब में किया गया है जो हत्या के लिए इस्तेमाल की गई बेरेटा पिस्तौल तथा ग्वालियर के एक डॉक्टर द्वारा इसकी व्यवस्था किए जाने सहित पूरी घटना का विवरण पेश करती है। अप्पू एस्थोस सुरेश और प्रियंका कोटमराजू द्वारा लिखी गई किताब ‘द मर्डरर, द मोनार्क एंड द फकीर: ए न्यू इन्वेस्टिगेशन ऑफ महात्मा गांधीज असैसिनेशन’ गांधी की हत्या की परिस्थितियों, इसके कारणों और इसके बाद की जांच आदि पर प्रकाश डालती है।

OCT 01, 2021 20:54 IST

राष्ट्रपति ने दी गांधी जयंती की शुभकामनाएं

 राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गांधी जयंती की पूर्व संध्या पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और उनसे भारत को महात्मा गांधी के सपनों का देश बनाने का संकल्प लेने को कहा। महात्मा गांधी की 152वीं जयंती की पूर्वसंध्या पर अपने संदेश में राष्ट्रपति ने कहा कि गांधी जयंती सभी भारतीयों के लिये विशेष दिन है। कोविंद ने कहा, ‘यह अवसर पर हम सभी के लिये गांधीजी के संघर्ष और बलिदान को याद करने का मौका है। यह अवसर हमें हमारे देश एवं नागरिकों की समृद्धि एवं विकास के लिये काम करने की प्रेरणा देता है।' 

OCT 01, 2021 20:20 IST

रक्षा मंत्री शनिवार को लक्षद्वीप में महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण करेंगे

लक्षद्वीप के कुछ निर्जन द्वीपों में अशोक स्तंभ लगे होने को छोड़ कर भारत के मुस्लिम बहुल इस द्वीप में अब तक कोई प्रतिमा नहीं लगाई गई थी। लेकिन अब अरब सागर में स्थित देश के इस सबसे छोटे केंद्र शासित क्षेत्र में शनिवार को पहली प्रतिमा लगने जा रही है, जो गांधी जयंती पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की होगी। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह महात्मा गांधी की 152 वीं जयंती पर कवरत्ती में राष्ट्रपिता की एक प्रतिमा का अनावरण करेंगे।

OCT 01, 2021 19:46 IST

कुछ ऐसे मनाते थे गांधी जी अपना जन्मदिन


देश ही नहीं दुनिया भी कल यानि 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी का जन्मदिन मनाएगी। अहिंसा के पुजारी का जन्मदिन भी अलग-अलग तरह से देशभर में मनाया जाता लेकिन क्या आपको पता है कि बापू अपना जन्मदिन कैसे मनाते थे? गांधी जी अक्सर अपने जन्मदिन पर चरखा चलाते हुए ईश्वर से प्रार्थना करते थे और अधिकतर समय मौन धारण किए हुए रहते थे। 

OCT 01, 2021 19:12 IST

गांधी जयंती पर भाषण – Gandhi Jayanti Speech


गांधी जयंती पर स्कूल, कॉलेज और दफ्तरों में अक्सर भाषण प्रतियोगिताओं का भी आयोजन होते रहता है। इसके लिए गांधी जी के विचारों, उपदेशों को लेकर भाषण दिए जाते हैं। गांधी जी पर बना एक गाना बहुत प्रसिद्ध हुआ जिसके बोल इस प्रकार हैं- 'दे दी हमे आजादी बिना खड़क बिना ढाल, साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल।'

OCT 01, 2021 18:44 IST

गांधी जी की अनमोल वचन

गांधी जी के कुछ वचन अनमोल हैं जैसे- गांधी जी कहते थे-'आजादी का कोई अर्थ नहीं है यदि इसमें गलतियां करने की आजादी शामिल न हों।' इसके अलावा गांधी जी ने कहा था, 'उफनते तूफ़ान को मात देना है तो अधिक जोखिम उठाते हुए हमें पूरी शक्ति के साथ आगे बढ़ना होगा।'
 

OCT 01, 2021 18:16 IST

गांधी जी के आंदोलन जो ब्रिटिश सरकार के लिए बने सरदर्द

गांधी जी द्वारा अहिंसक तरीके से ऐसे आंदोलन चलाए गए थे जिन्होंने भारत में ब्रिटिश सम्राज्य की नींव हिलाकर रख दी। जो प्रमुख आंदोलन अंग्रेजों के लिए सिरदर्द साबित हुए उनमें चंपारण सत्याग्रह, असहयोग आंदोलन, दांडी सत्याग्रह, दलित आंदोलन, भारत छोड़ो आंदोलन शामिल हैं।

OCT 01, 2021 17:30 IST

गांधी जी के जीवन से जुड़े रोचक तथ्य


महात्मा गांधी के जीवन से जुड़े कई ऐसे तथ्य भी हैं जो रोचक हैं। कहा जाता है कि गांधी जी को फोटो खिंचवाना बिल्कुल पसंद नहीं था। अपनी वकालत करने के बाद जब उन्होंने पहला केस लड़ा था तो वह इसे हार गए थे। राम के नाम से उन्हें इतनी मोहब्बत थी कि अपने आखिरी क्षण में भी उन्होंने राम का ही नाम लिया था।

OCT 01, 2021 16:59 IST

जिन्ना मानते थे महात्मा गांधी को हिंदुओं का नेता 

मोहम्मद अली जिन्ना ने महात्मा गांधी को देश का नहीं बल्कि हिंदुओं का नेता माना था। यहीं वजह थी कि वह बंटवारे को लेकर भी अड़े रहे और उन्होंने लॉर्ड माउंटबेटन सहित इस बात के लिए मना लिया कि दो देश बना दिए जाएं। महात्मा गांधी को तो इस फैसले के बारे में बाद में पता चला था।

OCT 01, 2021 16:22 IST

गांधी जयंती से पहले छत्तीसगढ़ सरकार ने किया अहम फैसला

छत्तीसगढ़ सरकार ने गांधी जयंती से पहले राज्य में पांचवीं से 12वीं कक्षा तक के पाठ्यक्रम में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की शिक्षाओं को शामिल करने का फैसला किया है। राज्य के जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर छत्तीसगढ़ में अब नयी पीढी को महात्मा गांधी की बुनियादी शिक्षाओं से जोड़ा जाएगा। मुख्यमंत्री बघेल ने इसके लिए मुख्य सचिव को निर्देश दिया है कि बच्चों के संपूर्ण विकास के साथ आत्मनिर्भर बनाने वाली शिक्षा का प्रबंध राज्य शासन द्वारा सुनिश्चित किया जाए।

OCT 01, 2021 15:15 IST

बराक ओबामा, स्‍टीव जॉब्‍स भी गांधी के मुरीद

महात्‍मा गांधी से प्रभावित लोगों में अमेरिका के पूर्व राष्‍ट्रपति बराक ओबामा और दुनिया की दिग्‍गज कंपनियों में शुमार एप्‍पल के सह-संस्‍थापक स्‍टीव जॉब्‍स भी शामिल हैं। बराक ओबामा ने कहा था, 'भारत के प्रति मेरे आकर्षण की मुख्य वजह महात्मा गांधी रहे हैं।' वहीं, स्‍टीव जॉब्‍स ने उन्‍हें 'पर्सन ऑफ सेंचुरी' के लिए अपनी पसंद के तौर पर नामित करते हुए कहा था, गांधी ने हमें हमारे मानव स्वभाव के विनाशकारी पक्ष से बाहर निकलने का रास्ता दिखाया।

OCT 01, 2021 15:07 IST

गांधी ने सैकड़ों लोगों को किया प्रेरित

गांधी ने मानवता के लिए जो राह दिखाई, उसने भारत ही नहीं, दुनिया के असंख्‍य लोगों को प्रभावित किया। मार्टिन लूथर किंग, नेल्‍सन मंडेला दुनिया की उन चर्चित हस्तियों में शुमार हैं, जिन्‍होंने गांधी के विचारों से प्रेरित होकर नस्‍लभेद और रंगभेद के खिलाफ अपने आंदोलनों की रूपरेखा तैयार की। महात्‍मा गांधी को लेकर प्रख्‍यात साइंटिस्‍ट अल्‍बर्ट आइंस्‍टीन ने कभी कहा था, 'आने वाली नस्लें शायद मुश्किल से ही विश्वास करेंगी कि हाड़-मांस से बना हुआ कोई ऐसा व्यक्ति भी धरती पर चलता-फिरता था।'

OCT 01, 2021 14:49 IST

गांधी जयंती पर आयोजित होते हैं कई कार्यक्रम

गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर को आम तौर पर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री सहित अन्‍य गणमान्य हस्तियां राष्‍ट्रीय राजधानी दिल्ली के राजघाट जाकर महात्‍मा गांधी के समाधि स्‍थल पर जाकर उन्‍हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। देशभर में इस दिन राष्ट्रीय अवकाश होता है तो स्‍कूल-कॉलेजों और अन्‍य संस्‍थानों में भाषण, वाद-विवाद, नाटक, पोस्‍टर प्रतियोगिता आदि का आयोजन किया जाता है। बापू की समाधि पर प्रार्थना आयोजित की जाती है।

OCT 01, 2021 14:19 IST

चंपारण के किसान ने दिया था बापू नाम

दुनिया को अहिंसा जैसी असाधारण सीख देने वाले महात्‍मा गांधी को प्‍यार से लोग बापू भी बुलाते हैं। यह नाम उन्‍हें बिहार में चंपारण जिले के एक किसान से मिला था। बापू यहां नील की खेती करने वाले किसानों पर अंग्रेजों के अत्‍याचार के बारे में जानकर यहां पहुंचे थे, ताकि इसका कोई समाधान निकाला जा सके। यहां उन्‍हें इतना बेशुमार प्‍यार मिला कि वह देश और दुनिया में बापू के नाम से मशहूर हुए।

OCT 01, 2021 13:47 IST

गांधी क्‍यों लेते थे उपवास का सहारा?

एक बार जब किसी से गांधी से पूछा कि आप हर मुश्किल वक्‍त में उपवास का सहारा क्‍यों लेते हैं तो इस पर उन्‍होंने कहा था, 'अहिंसा के पुजारी के शस्त्रागार में यही अंतिम हथियार है। जब इंसान की चालाकी काम नहीं करती तो अहिंसा का पुजारी उपवास करता है। इसमें प्रार्थना की भावना प्रबल होती है, जो ईश्वर को समर्पित होती है। इसका असर जनता पर भी होता है। अगर जनता उपवास करनेवाले को जानती है, तो उसकी सोई हुई अंतरात्मा जाग उठती है।'
 

OCT 01, 2021 13:08 IST

'फल की आशा से न करें उपवास'

उपवास को लेकर महात्‍मा गांधी का साफ मानना था कि मजबूत इरादों वाले ही इसे कर सकते हैं और यह भी उपवास किसी फल की आशा से नहीं करना चाहिए। एक बार उन्‍होंने लिखा था, 'जिसके हृदय में बल नहीं, वह उपवास हरगिज न करे। फल की आशा से भी वह उपवास न करें। जो फल की आशा से उपवास करता है, वह हारता है। अगर वह हारता नजन न भी आए तो वह उपवास के आनंद को खो देता है।'

OCT 01, 2021 12:19 IST

गांधी के जीवन में उपवास

महात्‍मा गांधी की जीवन शैली बेहद सहज थी। अपने जीवन में उन्होंने सादे व शाकाहारी भोजन का चुनाव किया तो आत्म-शुद्धि और राजनीतिक विरोध के रूप में उन्‍होंने उपवास को एक साधन के रूप में चुना। महात्मा गांधी ने जहां स्‍वास्‍थ्‍य के लिए उपवास के फायदे महसूस किए थे, वहीं उन्‍होंने इस आध्यात्मिक साधना का राजनीतिक साधन के रूप में भी इस्‍तेमाल किया, जब उन्‍होंने अंग्रेजी शासन की नीतियों के खिलाफ कई बार लंबे उपवास रखे।
 

OCT 01, 2021 11:37 IST

क्‍या था RTI का जवाब?

वाराणसी के कमलेश कुमार सिंह ने यह आरटीआई दाखिल की थी, जिसमें सवाल किया गया था कि गांधी को आखिर कब राष्ट्रपिता का दर्जा मिला था? जवाब में गृह मंत्रालय ने कहा कि इस जानकारी के संबंध में कोई विवरण उसके पास उपलब्‍ध नहीं है। गृह मंत्रालय से मिले इस जवाब से याचिकाकर्ता हैरान रह गया। उसने 13 अगस्‍त, 2020 को आरटीआई दाखिल किया था, जिसका जवाब उसे 19 नवंबर, 2020 को मिला था।

OCT 01, 2021 10:52 IST

सरकार के पास दस्‍तावेज नहीं

30 जनवरी, 1948 को नाथूराम गोडसे ने महात्‍मा गांधी की गोली मारकर हत्‍या कर दी थी और तब रेडियो पर देश के नाम अपने संबोधन में जवाहरलाल नेहरू ने कहा था, 'राष्‍ट्रपिता अब नहीं रहे।' इस तरह सरकार ने उन्‍हें 'राष्‍ट्रपिता' के तौर पर मान्‍यता दी थी, लेकिन सरकारी दस्‍तावेजों में इसका कहीं जिक्र नहीं है, जिसका खुलासा बीते साल सूचना के अधिकार (RTI) के तहत किए गए एक आवेदन और गृह मंत्रालय से मिले जवाब से हुआ था।
 

OCT 01, 2021 10:11 IST

कैसे बने राष्‍ट्रपिता?

महात्‍मा गाधी के लिए राष्‍ट्रपिता का संबोधन सबसे पहले सुभाषचंद्र बोस ने सिंगापुर रेडियो से प्रसारित एकर कार्यक्रम में किया था। ऐतिहासिक तथ्‍यों के मुताबिक, पहले 4 जून और फिर 6 जुलाई, 1944 को बोस ने रेडियो पर प्रसारित अपने एक संदेश में महात्‍मा गांधी के लिए इस शब्‍द का इस्‍तेमाल किया था, जिसे आजाद भारत में देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की अगुवाई में बनी सरकार ने भी मान्‍यता दी।

OCT 01, 2021 09:32 IST

महात्‍मा बनने का सफर

गांधी के अहिंसक आंदोलन के विचारों ने भारत में एक बड़े वर्ग को प्रभावित किया। उनके जीवन दर्शन ने न सिर्फ बहुसंख्‍यक आबादी, बल्कि उस वक्‍त की नामचीन हस्तियों को भी प्रभावित किया, जिन्‍होंने उन्‍हें महात्‍मा की उपाधि से नवाजा। मोहनदास करमचंद गांधी के लिए महात्‍मा शब्‍द का सबसे पहले प्रयोग गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने 12 अप्रैल, 1919 को लिखे एक पत्र में किया था, जिसके बाद वह महात्मा गांधी के नाम से मशहूर हुए।

OCT 01, 2021 08:41 IST

नस्‍लभेद का प्रहार

नस्लभेद का यही वो पहला प्रहार था, जिसने भारत में अंग्रेजों के जुल्‍मों के खिलाफ महात्‍मा गांधी के अहिंसक आंदोलन का आधार तैयार कर दिया। 9 जनवरी, 1915 को जब वह देश लौटे तो औपनिवेश‍िक अंग्रेजी शासन, उसकी भेदभावपूर्ण नीतियों और आमजनों पर उसके जुल्‍म को लेकर उनकी सोच पूरी तरह बदल चुकी थी। फिर महात्‍मा गांधी की अगुवाई में हुए सविनय अवज्ञा आंदोलन ने अंग्रेजी सत्‍ता की चूलें हिलाकर रख दी थी।

OCT 01, 2021 08:11 IST

जुल्‍मों से लड़ने का फैसला

मोहनदास करमचंद गांधी ने अपना फर्स्‍ट क्‍लास का टिकट दिखाते हुए थर्ड क्‍लास कोच में जाने से मना कर दिया, जिसके बाद रेलवे के कर्मचारियों ने उन्‍हें धक्‍का देकर नीचे उतार दिया और उनके बैग व कपड़े आदि फेंक दिए। कड़ाके की ठंड के बीच उन्‍होंने पूरी रात वेटिंग रूम में जागते और घटना के बारे में सोचते हुए गुजारी। उनके मन में भारत लौट जाने सहित कई ख्‍याल आए, पर फिर उन्‍होंने दक्षिण अफ्रीका में रहकर स्थानीय और भारतीय मूल के लोगों पर हो रहे जुल्म के खिलाफ लड़ने का फैसला किया।

OCT 01, 2021 07:41 IST

प्रीटोरिया की वो घटना

पोरबंदर के दीवान करमचंद गांधी और उनकी पत्नी पुतलीबाई के बेटे मोहनदास करमचंद गांधी को दक्षिण अफ्रीका में भारतीय मूल के कारोबारी अब्‍दुल्‍ला ने मुकदमा लड़ने के लिए बुलाया था, जिसके लिए वह जहाज से डरबन पहुंचे थे। यहां से उन्होंने प्रीटोरिया के लिए ट्रेन ली थी, जिसके फर्स्ट क्लास कोच का टिकट उनके पास था। वह अपनी सीट पर बैठे थे जब पीटरमारिट्जबर्ग स्टेशन एक अंग्रेज टिकट चेकर ने फर्स्ट क्लास का टिकट होने के बावजूद उन्‍हें थर्ड क्लास कोच में जाने कहा।

OCT 01, 2021 07:08 IST

यूं बदला जीवन-दर्शन

लंदन में कानून की पढ़ाई कर चुके मोहनदास करमचंद गांधी का सपना कभी वकालत में खूब नाम कमाने का था। इसी दौरान उन्‍हें दक्षिण अफ्रीका में रह रहे भारतीय मूल के कारोबारी की ओर से दक्षिण अफ्रीका के तत्कालीन ट्रांसवाल प्रांत में काम का प्रस्ताव मिला था, जिसने उनके जीवन, दर्शन और आदर्शों को पूरी तरह बदल दिया और इस तरह अंतत: भारत की आजादी और ब्रिटिश कानूनों के खिलाफ जन आंदोलन की पृष्‍ठभूमि तैयार हुई।

OCT 01, 2021 07:07 IST

अहिंसा की ताकत

महात्‍मा गांधी ने शांति और अहिंसा के दम पर सत्‍याग्रह सहित कई आंदोलन चलाए, जिन्‍होंने तत्‍कालीन ब्रिटिश औपनिवेशिक सरकार को अशांत कर दिया था। महात्‍मा गांधी के अहिंसक आंदोलन के तौर-तरीके ने शुरुआती दौर में बहुत से लोगों को इसकी सफलता को लेकर आशंकित किया, लेकिन महात्‍मा गांधी अहिंसा की ताकत से भली-भांति परिचित थे, जिसका प्रयोग वह भारत से पहले दक्षिण अफ्रीका में कर चुके थे।

OCT 01, 2021 07:07 IST

पूरे देश का किया भ्रमण

मोहनदास करमचंद गांधी, यानी महात्‍मा गांधी लंदन में बैरिस्‍टर की पढ़ाई कर भारत लौटे थे, जब यहां ब्रिटिश राज में जनता की बदहाली और उन पर हुक्‍मरानों के अत्‍याचार-उत्‍पीड़न ने उन्‍हें झकझोरकर रख दिया। यहां के हालात व लोगों की स्थिति को समझने के लिए उन्‍होंने पूरे देश का भ्रमण किया और लोगों को साफ-सफाई से लेकर अंग्रेजों के काले कानूनों तक का विरोध करने के लिए प्रेरित व एकत्र किया।