Himalayan Golden Triangle Tour : ह‍िमालय के इस गोल्‍डन ट्राइएंगल का जरूर करें टूर, खूबसूरती कर देगी दंग

लाइफस्टाइल
श्वेता सिंह
श्वेता सिंह | सीनियर असिस्टेंट प्रोड्यूसर
Updated Jul 20, 2020 | 08:47 IST

Himalayan Golden Triangle: प्रकृति की गोद में जो सुकून है, वो शहरों की शोरगुल भरी जिंदगी में कहां। कुछ सुकून के ल‍िए हिमालयन गोल्डन ट्राइएंगल के तहत थानेधर, सांगला और सोझा की सैर करें।

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Himalayan Golden Triangle, हिमालयन गोल्डन ट्राइएंगल टूर, @Wiki Commons 

मुख्य बातें

  • श‍िमला के आस पास की तीन जगहें - थानेधर, सांगला और सोझा को हिमालयन गोल्डन ट्राइएंगल कहते हैं
  • कुदरत की बेमिसाल खूबसूरती देखनी हो तो यहां का टूर मिस नहीं करना चाह‍िए
  • ये जगहें अपना ऐत‍िहासिक महत्‍व भी रखती हैं

तनावभरी जिन्दगी से थोड़ा वक्त निकालकर प्रकृत‍ि से मिलना बेहद जरूरी है। वैसे नेचर से एक खूबसूरत मुलाकात आपकी ह‍िमालय के गोल्‍डन ट्राइएंगल टूर के जर‍िए हो सकती है जहां आप करेंगे थानेधर, सांगला और सोझा की सैर। हां, ह‍िमाचल प्रदेश की  ये तीनों ही ऐसी जगहें हैं, जो आपको सुखद अनुभूति कराएंगी। 

थानेधर, सांगला और सोझा के खूबसूरत पहाड़, हरी-भरी वादियां और सुहाना मौसम हर समय आपका बाहें खोलकर स्वागत करेगा। तो जब मौका मिले, इनको देखने जरूर न‍िकलें। बता दें क‍ि थानेधर, सांगला और सोझा, इन तीनों को ही हिमालयन गोल्डन ट्रायंगल के नाम से जानते हैं।       

मनमोहक थानेधर

अपार सुख और अनुपम छटा से भरपूर है थानेधर। ये पुराने हिंदुस्तान-तिब्बत रोड पर शिमला से करीब 80 किलोमीटर दूर है। पर्यटकों के कम जाने से इस जगह की खूबसूरती यूं ही बनी हुई है। अगर आप प्रकृति से सच में मोहब्बत करते हैं, तो ये जगह आपको अपनी ओर आकर्षित करेगी। यहां आने के बाद पहाड़ों की चित्रमाला आपकी आंखों को जो सुकून देगी, वो आपको कहीं और नहीं मिलेगा। यहां का वातावरण इतना साफ है कि आप 6 हजार फीट नीचे बह रही सतलज नदी को आसानी से देख सकते हैं। बर्फ में ढके पहाड़ और पेड़ आपका मन मोह लेते हैं।

थानेधर का ऐतिहासिक महत्व
1916 में, फिलाडेल्फिया के एक सामाजिक कार्यकर्ता सैमुअल स्टोक्स ने अपने घर के रूप में अपनाई गई इस जगह पर पहले सेब के पौधे लाए थे। उस बाग को आप आज भी देख सकते हैं।

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अद्भुत सांगला

पेड़, पहाड़, नदियां इन सब से भरा है सांगला। यहां आने के बाद किसी का मन घर वापस जाने को नहीं करता! 2700 मीटर की उंचाई पर बसी ये जगह आपको हिमालय के प्रति आकर्षित करती है। पहाड़ों से निकलते कलकल करते झरने, पक्षियों की मधुर आवाज और पेड़ों का यूं मस्ती में झूमना, ये सब आपके दिल में घर कर जाएगा।

आकर्षित करने वाली छटा
सांगला को पर्यटकों के लिए और भी खूबसूरत बनाया गया है। पत्थर और लकड़ी से बने दो मंजिला घर यहां की खूबसूरती में चार-चाँद लगाते हैं। नदियों के किनारे बनी झोपडियां आपको आराम और सुकून पहुंचाएंगी।     

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छोटा सा सोझा

शिमला और कुल्लू जिले को जोड़ने वाले जालोरी पास से 5 किलोमीटर दूर बसा एक छोटा सा गांव सोझा हर साल पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करता है। देवदार के पेड़ झूम-झूमकर आपका स्वागत करते हैं। बनावट से दूर प्रकृति की अनुपम छटा का अवलोकन करना चाहते हैं, तो सोझा से बेहतर जगह आपके लिए कोई नहीं होगी।

ट्रेकिंग के लिए बेस्ट है सोझा
इस छोटे-से गांव में हर वो चीज है, जो आपको सुख ही सुख देगा। यहां पहुंचकर आप अपने घर को भूल जाएंगे। अगर आपको पहाड़ों पर ट्रेकिंग करना पसंद है, तो यकीन मानिए आप खुद को रोक नहीं पाएंगे। 

ये ट‍िप्‍स करेंगे मदद 
पहाड़ी इलाकों के हिसाब से अपने कपड़ों की पैकिंग करें। फैशन फुटवियर नहीं, बल्कि स्पोर्ट्स शूज लेकर जाएं। फर्स्टएड बॉक्स जरूर लेकर जाएं। आईडी प्रूफ अपने पास रखें। बहुत ज्यादा रोड साइड फूड खाने से बचें।

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