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चांद फतह के बाद मंगल की बारी, 22 करोड़ KM दूर लैंडिंग साइट्स की होगी खोज; जानें NASA के पिटारे में क्या-क्या

NASA Mars Mission: नासा के आर्टेमिस II मिशन को मिली ऐतिहासिक सफलता के बाद अब दुनियाभर की निगाहें मंगल ग्रह से जुड़े मिशनों पर जा टिकी हैं। ऐसे में जानते हैं कि नासा का मंगल मिशन क्या है।

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Photo : iStock
मिशन मंगल
Edited by: Anurag Gupta
Updated Apr 11, 2026, 16:30 IST

NASA Mars Mission: अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के चार अंतरिक्ष यात्री ऐतिहासिक आर्टेमिस II मिशन पूरा कर पृथ्वी पर सुरक्षित लौट आए। इसी के साथ ही भविष्य में चंद्रमा और मंगल पर होने वाले मिशनों को लेकर चर्चा शुरू हो गई। यूं तो वैज्ञानिकों का लक्ष्य चांद और मंगल पर मानव उपस्थिति को दर्ज कराना है, लेकिन उससे पहले उन्हें कई अन्य मिशनों को सफलतापूर्वक पूरा करना पड़ेगा तभी मानव मिशन की सफल बनाने की प्लानिंग कर सकें।

चंद्र मिशन

नासा की योजना 2026 में बिना क्रू के चंद्रमा पर लैंडर भेजने, 2027 में आर्टेमिस III टेस्ट मिशन और 2028 में इंसानों को फिर से चांद की सतह पर उतारने की है। हालांकि, लंबी अवधि में चंद्रमा पर बेस बनाने और मंगल ग्रह तक मानव मिशन पहुंचाने का लक्ष्य तो निर्धारित किया जा चुका है।

मिशन मंगल

नासा के वैज्ञानिकों को औसतन 22 करोड़ किलोमीटर दूर मौजूद मंगल ग्रह को लेकर काफी दिलचस्पी है। तभी तो आए दिन मंगल की सतह पर मौजूद रहस्यों को खंगालते रहते हैं। वहां पर मौजूद नासा के रोवर (क्यूरोसिटी और पर्सिवरेंस) गुल्थी सुलझाने में जुटे रहते हैं। तभी तो आए दिन मंगल ग्रह की विभिन्न तस्वीरें सामने आती हैं।

NASA Mars Mission

NASA Mars Mission

नासा का अगला बड़ा मंगल मिशन स्पेस रिएक्टर-वन फ्रीडम (SR-1 Freedom) है। नासा के मुताबिक, 2028 तक Space Reactor-1 Freedom नामक दुनिया का पहला न्यूक्लियर-पावर्ड (परमाणु ऊर्जा से चलने वाला) इंटरप्लानेटरी स्पेसक्राफ्ट लॉन्च किया जाएगा। ऐसे में जब SR-1 Freedom मंगल ग्रह पर पहुंचेगा, तो रेड प्लैनेट की सतह का अध्ययन करने के लिए Ingenuity-श्रेणी के हेलीकॉप्टर तैनात करेगा। इसके जरिए, संभावित लैंडिंग साइट्स और पानी के स्रोतों की पहचान की जाएगी।

क्या कुछ है खास?

  • परमाणु तकनीक को अंतरिक्ष में व्यावहारिक रूप से स्थापित करेगा।
  • भविष्य के लंबी अवधि वाले मिशनों के लिए आधार तैयार करेगा।
  • प्रोपल्शन, सतह संचालन और ऊर्जा आपूर्ति के नए रास्ते खोलेगा।

मंगल पर सभी की निगाहें

आर्टेमिस II की सफलता के बाद अब वैज्ञानिकों की निगाहें मंगल ग्रह पर टिकी हुई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आर्टेमिस II मिशन की सराहना करते हुए भविष्य की योजना भी स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि यह मिशन शानदार रहा और अगला बड़ा लक्ष्य मंगल है। उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिका जल्द ही इस दिशा में और कदम बढ़ाएगा।

मानव मिशन की तैयारी

चंद्रमा पर स्थायी मौजूदगी बनाने के बाद वैज्ञानिक पूरी तरह से मंगल की ओर अपना ध्यान आकर्षित करेंगे। नासा 2030 के दशक में इंसानों को मंगल भेजने की योजना बना रहा है। इसी के तहत, 2028 में SR-1 Freedom को लॉन्च करने की तैयारी में है। मंगल पर मानव मिशन मुख्य रूप से नासा के नेतृत्व में विकसित हो रहा है, लेकिन इसमें SpaceX जैसी निजी कंपनियां भी अहम भूमिका निभा रही हैं।

क्या होगा मिशन ?

2030 के दशक में शुरू होने वाले इस मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्री लंबी यात्रा के बाद मंगल तक पहुंचेंगे, जहां वैज्ञानिक प्रयोग किए जाएंगे। इस दौरान, पानी, ऑक्सीजन और जीवन के संकेतों की खोज की जाएगी, जो भविष्य की मानव बस्ती (Mars Base) की नींव रखेगी।

NASA Mars Mission

NASA Mars Mission

यूं तो स्पेसएक्स के फाउंडर एलन मस्क भी मंगल ग्रह पर मानव बस्ती बसाने की बातें कर रहे थे, लेकिन उन्होंने बाद में अपना ध्यान चांद की ओर केंद्रित किया था। उन्होंने कहा था कि 2050 तक वह मंगल ग्रह पर 10,000 लोगों के रहने लायक मानव बस्ती विकसित करेंगे। हालांकि, बाद में उन्होंने मंगल ग्रह से पहले चांद पर ऐसा कारनामा दिखाने की बात कही। ऐसा नहीं है कि सिर्फ अमेरिका ही मानव बस्ती बसाने की फिराक में है।

मंगल पर मानव बस्ती का ख्वाब सही मायने में तभी सफल हो पाएगा जब चांद पर यह करिश्मा हो जाए। नासा के अलावा चीन, साउथ कोरिया सहित इत्यादि देश चांद पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की फिराक में हैं और फिर वह मंगल पर भी ऐसा करना चाहते हैं। तभी तो एक के बाद एक मिशनों को लॉन्च किया जा रहा है।

मंगल पर बस्ती आसान नहीं

भले ही मंगल ग्रह पर बस्ती बसाने की योजनाएं बनाई जा रही हैं, लेकिन वहां पर रहना धरती की तरह आसान नहीं होने वाला है। विशेषज्ञों का मानना है कि मंगल ग्रह की स्थितियां इंसानी शरीर में कई खतरनाक बदलाव ला सकती हैं। जैसे शरीर का रंग बदलना, आंखों का कमजोर होना इत्यादि।

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