Ostrich Nest: पुरातत्वविदों को हाल ही में एक बड़ी कामयाबी मिली है। आंध्र प्रदेश के प्रकाशम में पुरातत्वविदों ने शुतुरमुर्ग के 41,000 साल पुराने घोंसले की खोज की। यह घोंसला तकरीबन 9 से 10 फीट चौड़ा है। इसे दुनिया में खोजा गया अबतक का सबसे पुराना शुतुरमुर्ग का घोंसला माना जा रहा है।
शुतुरमुर्ग
प्रकाशम जिले में मिले ये जीवाश्म पुरातात्विक लिहाज से काफी अहम माने हैं। इसे वडोदरा स्थित एमएस यूनिवर्सिटी के पुरातत्वविदों ने जर्मनी, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के सहयोगियों की मदद से तलाशा है। इसकी मदद से यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि भारत में मेगाफौना (50 किलोग्राम से अधिक वजन वाले जानवर) क्यों विलुप्त हो गए? तो चलिए अब शुतुरमुर्ग के बारे में भी जान लेते हैं।
रफ्तार के हो जाएंगे कायल
यूं तो शुतुरमुर्ग उड़ नहीं सकता है, लेकिन उसकी रफ्तार के आप कायल हो जाएंगे। तभी तो इसे दुनिया का सबसे तेज दौड़ने वाला पक्षी माना जाता है। खतरा महसूस होने पर शुतुरमुर्ग 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकता है। साथ ही यह सबसे लम्बा और सबसे भारी पक्षी भी है।
शुतुरमुर्ग
अगर नर शुतुरमुर्ग की बात की जाए तो उसकी लंबाई 9 फीट, जबकि मादा की 6 फीट तक हो सकती है। वहीं, शुतुरमुर्ग का वजन 100 से 150 किलो तक हो सकता है। इसके अलावा शुतुरमुर्ग के पास भीषण गर्मी से लेकर ठंड तक को बर्दाश्त करने की क्षमता होती है।
जमीन में क्यों छिपा लेता है अपना सिर
शुतुरमुर्ग को आप लोगों ने अपना सिर जमीन में छिपाते हुए देखा होगा। अक्सर यह कहा जाता है कि खतरा महसूस होने पर वह अपना सिर जमीन में छिपा लेता है और सोचता है कि खतरा टल गया, जबकि ऐसा नहीं है। विज्ञानियों का मानना है कि शुतुरमुर्ग अपने अंडों को सेकने के लिए गड्ढों में सिर डालते हैं। दरअसल, यह शिकारियों से बचाने के लिए अपने अंडों को जमीन के भीतर छिपाकर रखते हैं। साथ ही नर और मादा दोनों ही मिलकर अंडों को गर्म करते हैं।
