Baramati Plane Crash: महाराष्ट्र के बारामती में एक बार फिर एक प्रशिक्षण विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। प्राप्त जानकारी के मुताबिक, अचानक तकनीकी खराबी आने के बाद प्रशिक्षण विमान क्रैश हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, अचानक उतरने के दौरान प्रशिक्षण विमान का एक हिस्सा पहले बिजली के एक खंभे से टकराया और फिर जमीन में गिर पड़ा।
बाल-बाल बची पायलट की जान
अधिकारियों ने बताया कि इस घटना में किसी को गंभीर चोट नहीं आयी और विमान में सवार एकमात्र प्रशिक्षु पायलट बारामती हवाई पट्टी के निकट स्थित गोजुबावी गांव के पास हुई इस घटना के बाद सुरक्षित बाहर आ गया तो चलिए समझते हैं कि दुर्घटनाग्रस्त विमान की जांच कैसे होती है। विमान दुर्घटना में बचने के लिए क्या-क्या करें। कॉकपिट के अंदर आखिरी मिनटों में क्या होता है। पायलट प्रशिक्षण में किन बातों की अनदेखी पड़ सकती है भारी इत्यादि।
विमान हादसे में बचने के लिए क्या करें?
यहां बात प्रशिक्षण विमान की हो रही है, जो आमतौर पर टू-सीटर होता है, लेकिन हम आपको विमान दुर्घटना में बचने के लिए क्या-क्या करना चाहिए? आज उन बातों को विस्तार से समझाएंगे। प्रशिक्षण विमान छोटे और हल्के होते हैं, जिनका इस्तेमाल नए पायलटों को प्रशिक्षित करने के लिए किया जाता है, लेकिन तकनीकी खामी, मौसम या मानवीय चूक के कारण जोखिम पैदा हो सकता है। ऐसे में कुछ जरूरी सावधानियां मददगार साबित हो सकती हैं।
trainee aircraft
उड़ान से पहले ब्रीफिंग पर दें ध्यान: उड़ान से पहले इंस्ट्रक्टर द्वारा बताई गई हर छोटी-छोटी बातों को ध्यान से सुनना चाहिए, जिनमें इमरजेंसी एग्जिट, सीट बेल्ट, अग्निशामक यंत्र और कम्युनिकेशन सिग्नल्स इत्यादि शामिल हैं।
सीट बेल्ट बांधना न भूलें: प्रशिक्षण विमान या कहें ट्रेनिंग विमान में अचानक टर्बुलेंस या हार्ड हैंडलिंग का खतरा ज्यादा हो सकता है। ऐसे में सीट बेल्ट को हमेशा कसकर बांधें।
घबराएं नहीं: इमरजेंसी में सबसे बड़ा खतरा पैनिक करने से बनता है। इसलिए लंबी सांस लें और इंस्ट्रक्टर के निर्देशों का शांति पूर्वक पालन करें।
इमरजेंसी एग्जिट: छोटे विमान में इमरजेंसी एग्जिट सीमित होते हैं। इसलिए उड़ान से पहले इमरजेंसी एग्जिट के बारे में पूरी जानकारी ले लें ताकि जरूरत पड़ने पर उससे बाहर निकला जा सकें।
सेफ्टी पोजिशन: अगर विमान दुर्घटनाग्रस्त होने वाला है तो सेफ्टी पोजिशन बनाकर रखें। सिर नीचे झुकाएं, हाथों से सिर को कवर करें और सीट से शरीर को सटाकर रखें। इससे इनजरी का खतरा कम हो सकता है।
प्राथमिक उपचार: सबसे अहम बात तो यह है कि पायलट को प्राथमिक उपचार करना आता हो। अगर चोट इत्यादि लग गई है तो तत्काल स्थिति को संभालते हुए प्राथमिक उपचार करें।
विमान की कैसे होती है जांच
विमान दुर्घटना के बाद विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) और नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) कई तकनीकी, मानवीय और पर्यावरणीय पहलुओं की गहन पड़ताल करती है। ताकि भविष्य में ऐसे किसी हादसे से बचा जा सकें।
घटनास्थल की जांच (Site Investigation): सबसे पहले जांच टीम दुर्घटनाग्रस्त साइट का दौरा करती है और वहां हर छोटी-छोटी चीजों की विस्तृत पड़ताल करती है। जैसे- विमान किस एंगल में गिरा, मलबा कितनी दूर तक बिखरा इत्यादि।
ब्लैक बॉक्स (Black Box): जांच टीम घटनास्थल को सील करके ब्लैक बॉक्स और कॉकपिट वॉइस रिकॉर्डर (CVR) की बरामद करती है, ताकि समझा जा सकें कि दुर्घटना के आखिरी क्षणों में क्या हुआ था।
Black Box
रखरखाव जांच: विमान की तकनीकी और रखरखाव जांच की जाती है और यह चेक किया जाता है कि क्या विमान का समय पर मेंटेनेंस हुआ था? क्या पहले भी तकनीकी शिकायतें आई थीं?
मानव कारक (Human Factors): पायलट के मेडिकल रिकॉर्ड, उड़ान अनुभव और ट्रेनिंग रिकॉर्ड्स को खंगाला जाता है। इसके अतिरिक्त, पायलट और एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) के बीच हुई अंतिम बातचीत का विश्लेषण किया जाता है।
पर्यावरणीय कारक (Environmental Factors): उड़ान के समय खराब मौसम, तेज हवा, बिजली या दृश्यता की स्थिति का विश्लेषण किया जाता है। इसके अतिरिक्त, पक्षियों से टकराव या रनवे की स्थिति इत्यादि को भी समझा जाता है।
कॉकपिट में आखिरी मिनटों पर क्या होता है?
विमान हादसे की स्थिति में कॉकपिट के अंदर काफी हलचल होती है। पायलट को इन परिस्थितियों के लिए पहले से ही ट्रेनिंग दी जाती है। विमान में इंजन फेलयर, फायर वार्निंग, अलार्म इत्यादि के सिग्नल दिखाई देने लगते हैं। ऐसे में पायलट हर पल स्थिति को संभालने की जुगत में लगा रहता है। पायलट इमरजेंसी चेकलिस्ट फॉलो करते हैं ताकि समस्या को नियंत्रित किया जा सके।
मेडे मेडे मेडे
पायलट तत्काल प्रभाव से सर्वप्रथम मेडे मेडे मेडे कहकर स्थिति की जानकारी देता है और इमरजेंसी लैंडिंग की कोशिश में जुट जाता है। अगर विमान में पायलट के साथ को-पायलट भी मौजूद है तो दोनों आपस में जिम्मेदारियां बांटते हैं। एक विमान को नियंत्रित करता है तो दूसरा सिस्टम और कम्युनिकेशन संभालता है।
