दीपावली सिर्फ रोशनी का पर्व नहीं, बल्कि अंधकार पर प्रकाश, बुराई पर अच्छाई और निराशा पर आशा की विजय का संदेश है। यह त्योहार हमारे जीवन में सकारात्मकता, नई शुरुआत और मिलनसारिता का भाव जगाता है। दीयों की रौशनी की तरह यह हमें अंदरूनी उजाले की भी प्रेरणा देता है।
मान्यता है, भगवान श्रीराम वनवास पूर्ण कर इसी दिन अयोध्या लौटे थे। मां लक्ष्मी इसी दिन समुद्र मंथन से प्रकट हुई थीं, इसलिए लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व है। इसे भगवान महावीर के निर्वाण दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। सिख परंपरा में गुरु हरगोविंद जी की रिहाई इसी दिन हुई थी।
पूरी जानकारी पढ़ें6 नवंबर शुक्रवार को श्री धनवनंतरी यमदीप दान सायं काल 05:49 से 08:13 पर्यन्त
8 नवंबर शनिवार नरक चतुर्दशी प्रातः स्नान समय: 4:53 AM – 6:38 AM, अभिजित् 11:42 AM – 12:26 PM, गोधूलि: 5:07 PM – 5:55 PM
दीपवाली प्रदोष काल मुहूर्त 05: 27 से 09:51 PM
ॐ महालक्ष्म्यै नमः नमः ॐ विष्णुप्रियायै नमः नमः ॐ धनप्रदायै नमः नमः ॐ विश्वजनन्यै नमः नमः
भारत के तमिलनाडू राज्य में थलाई दिवाली का रिवाज है. यहां इसे थलाई दीपावली के नाम से जाना जाता है. यह त्योहार कार्तिक माह की अमावस्या को मनाया जाता है, जो आमतौर अक्टूबर या नवंबर में पड़ता है. इस दिन, लोग अपने घरों की सफाई करते हैं और उसे लाइट्स में सजाते हैं.