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राफेल के ऊपर से 'नींबू-मिर्च' कब हटाएगी सरकार? इस कांग्रेस नेता के बयान पर गरमाई सियासत; जानिए किसने क्या कहा

Pahalgam Attack: अजय राय ने मोदी सरकार से पूछा है कि राफेल के ऊपर से ‘नींबू-मिर्च' सरकार कब हटाएगी? उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष ने ये भी पूछा कि पहलगाम हमले के खिलाफ ठोस कार्रवाई कब होगी? उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार केवल दिखावे की राजनीति कर रही है।

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अजय राय, अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश कांग्रेस।

कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष अजय राय ने राफेल लड़ाकू विमान का उपहास उड़ाते हुए प्रतीकात्मक तौर पर एक खिलौना विमान से ‘नींबू-मिर्च’ लटकाकर सरकार से पूछा कि इस लड़ाकू विमान के ऊपर से ‘नींबू-मिर्च’ कब हटेगा। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने राय की इस टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है।

लड़ाकू विमान के ऊपर से कब हटेगा ‘नींबू-मिर्च’?

विवाद के बावजूद राय ने अपनी टिप्पणी पर कायम रहते हुए सोमवार को कहा, 'मैंने देश को सच्चाई दिखाई। जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह राफेल लेने गए थे तो उन्होंने उस पर नींबू और मिर्च बांधी थी। मैंने कहा कि यह नींबू और मिर्च कब हटेगी और राफेल कब काम करेगा। आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई कब होगी? मैंने यही कहा।'

अजय राय ने रविवार को संवाददाताओं से बातचीत में राफेल विमान का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि पाकिस्तान को पहलगाम हमले का जवाब देने के लिए केंद्र सरकार राफेल के ऊपर से नींबू-मिर्च कब हटाएगी? उन्होंने जोर देकर कहा कि पूरा भारत पहलगाम हमले का बदला लिये जाने का इंतजार कर रहा है लेकिन केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

सरकार पर दिखावे की राजनीति करने का लगाया आरोप

अजय राय ने कहा, 'पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में जिन लोगों की जान गई, उनके परिजन आज भी यह उम्मीद लगाए बैठे हैं कि सरकार कब इस पर गंभीरता से कोई ठोस कार्रवाई करेगी, लेकिन दुर्भाग्यवश, सरकार इन गंभीर मसलों पर पूरी तरह विफल साबित हो रही है।' उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार केवल दिखावे की राजनीति कर रही है।

अजय राय के बयान पर भाजपा नेता की तीखी प्रतिक्रिया

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राज्यसभा सदस्य अमरपाल मौर्य ने सोमवार को राय के इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, 'कांग्रेस ने हमेशा सुरक्षा बलों का अपमान किया है और उनकी क्षमताओं पर संदेह जताया है। राय का बयान उसका एक और उदाहरण है। हालांकि, मैं यह कहना चाहता हूं कि कांग्रेस पार्टी और सभी राष्ट्र विरोधियों को मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा।' उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा पर सरकार के रुख पर जोर देते हुए कहा, 'हमारी सरकार ने सुरक्षा बलों को देश के दुश्मनों के खिलाफ हमले की प्रकृति और समय तय करने की पूरी छूट दी है।'

अमरपाल मौर्य ने कहा, 'यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस मोड़ पर भी जब सभी को दुश्मन से निपटने के लिए एकजुट होना चाहिए, कुछ लोग निम्न-स्तरीय राजनीति करने से खुद को नहीं रोक पा रहे हैं।' फैजाबाद से समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद अवधेश प्रसाद ने राय के बयान पर टिप्पणी करते हुए कहा, 'मैंने (राय का) बयान नहीं सुना है, लेकिन मुझे लगता है कि पूरा विपक्ष पहले दिन से ही इस कायराना आतंकवादी हमले के लिए देश के दुश्मनों के खिलाफ मुंहतोड़ जवाब की मांग कर रहा है। मुझे लगता है कि इस संबंध में हमारे दृष्टिकोण में कोई बदलाव नहीं आया है।'

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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